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Noida News: सेवानिवृत्त अधिकारी को 21 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 18 लाख रुपये की ठगी
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साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी, रेलवे से सेवानिवृत्त अधिकारी है पीड़ित बुजुर्ग
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। साइबर अपराधियों की तरफ से खौफ का मायाजाल बुनकर बुजुर्ग को 21 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 18 लाख रुपये ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल भेजने की धमकी देकर बुजुर्ग को जांच के नाम पर डिजिटल अरेस्ट किया और उनके खाते से 18 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना सेक्टर-36 में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक शिकायत ग्रेटर नोएडा निवासी 69 वर्षीय तिरुमले नाम्बी ने दी है। शिकायत के अनुसार, ठगी का सिलसिला 12 मार्च को शुरू हुआ। उनके मोबाइल पर एक अनजान कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को''मुंबई क्राइम ब्रांच' का अधिकारी बताया। जालसाज ने पीड़ित को डराते हुए कहा कि उनके सरकारी पहचान पत्र का दुरुपयोग कर केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है, जिसके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का काला खेल चल रहा है।
ठगों ने पीड़ित को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ दिया कि वह तीन सप्ताह तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रहे। अपराधियों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए फर्जी दस्तावेज दिखाए और गिरफ्तारी का डर पैदा किया। इस दौरान पीड़ित को किसी से भी बात करने या घटना की जानकारी साझा करने से मना किया गया। 18 मार्च को दबाव में आकर पीड़ित ने अपने केनरा बैंक के खाते से 18 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ठगों के बताए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जांच के नाम पर और धनराशि ट्रांसफर कराने का दबाव जालसाजों ने बनाना शुरू किया। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल और स्थानीय थाने में गुहार लगाई। साइबर क्राइम थाने के निरीक्षक स्तर के अधिकारी को जांच सौंपी गई है। पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को खंगाल रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी में हुआ। डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल के मुताबिक प्राथमिकी दर्ज कर सभी तथ्यों पर जांच की जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी की घटनाओं से बचने को बरतें सावधानी -
- कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग फोन या वीडियो कॉल के जरिए जांच नहीं करती है। न ही पैसे की मांग होती और गिरफ्तारी का डर भी नहीं दिखाया जाता है।
गोपनीयता बरतें- अपना आधार नंबर, बैंक विवरण या ओटीपी किसी अनजान को न दें, चाहे वह खुद को बड़ा अधिकारी ही क्यों न बताए।
घबराएं नहीं- साइबर ठग हमेशा डर का माहौल बनाते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत कॉल काटें और परिजनों को सूचित करें।
यहां करें शिकायत- यदि आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। साइबर अपराधियों की तरफ से खौफ का मायाजाल बुनकर बुजुर्ग को 21 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 18 लाख रुपये ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल भेजने की धमकी देकर बुजुर्ग को जांच के नाम पर डिजिटल अरेस्ट किया और उनके खाते से 18 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना सेक्टर-36 में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक शिकायत ग्रेटर नोएडा निवासी 69 वर्षीय तिरुमले नाम्बी ने दी है। शिकायत के अनुसार, ठगी का सिलसिला 12 मार्च को शुरू हुआ। उनके मोबाइल पर एक अनजान कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को''मुंबई क्राइम ब्रांच' का अधिकारी बताया। जालसाज ने पीड़ित को डराते हुए कहा कि उनके सरकारी पहचान पत्र का दुरुपयोग कर केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है, जिसके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का काला खेल चल रहा है।
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ठगों ने पीड़ित को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ दिया कि वह तीन सप्ताह तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रहे। अपराधियों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए फर्जी दस्तावेज दिखाए और गिरफ्तारी का डर पैदा किया। इस दौरान पीड़ित को किसी से भी बात करने या घटना की जानकारी साझा करने से मना किया गया। 18 मार्च को दबाव में आकर पीड़ित ने अपने केनरा बैंक के खाते से 18 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ठगों के बताए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जांच के नाम पर और धनराशि ट्रांसफर कराने का दबाव जालसाजों ने बनाना शुरू किया। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल और स्थानीय थाने में गुहार लगाई। साइबर क्राइम थाने के निरीक्षक स्तर के अधिकारी को जांच सौंपी गई है। पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को खंगाल रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी में हुआ। डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल के मुताबिक प्राथमिकी दर्ज कर सभी तथ्यों पर जांच की जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी की घटनाओं से बचने को बरतें सावधानी -
- कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग फोन या वीडियो कॉल के जरिए जांच नहीं करती है। न ही पैसे की मांग होती और गिरफ्तारी का डर भी नहीं दिखाया जाता है।
गोपनीयता बरतें- अपना आधार नंबर, बैंक विवरण या ओटीपी किसी अनजान को न दें, चाहे वह खुद को बड़ा अधिकारी ही क्यों न बताए।
घबराएं नहीं- साइबर ठग हमेशा डर का माहौल बनाते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत कॉल काटें और परिजनों को सूचित करें।
यहां करें शिकायत- यदि आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।