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Noida News: आग का खतरा, दांव पर देश का भविष्य
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जिले में 1000 से अधिक कोचिंग सेंटर का संचालन, लेकिन केवल 60 ने ही कराया पंजीकरण
गलियों में हो रहा कोचिंग सस्थानों का संचालन, दमकल की गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल
आज से अग्निशमन विभाग कोचिंग संस्थानों की करेगा जांच, समिति बनी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा/ग्रेटर नोएडा। लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 छात्रों की माैत ने नोएडा-ग्रेनो में संचालित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर लोगों का ध्यान खींचा है। जिले में एक हजार से ज्यादा कोचिंग सेंटर संचालित हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर का न तो पंजीकरण है और न ही अग्निशमन सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। केवल 60 कोचिंग सेंटर ने अब तक अपना पंजीकरण कराया है।
2024 में दिल्ली के राजेंद्र नगर के कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर नोएडा, दादरी और ग्रेटर नोएडा के 25 कोचिंग सेंटर को बंद कराया था। लेकिन, संचालकों पर कार्रवाई नहीं होने से सब फिर से अपने पुराने ढर्रे पर आ गए।
पिछले कुछ साल में सेक्टर- 62, 15, 16, 12, 27 आदि कोचिंग हब के रूप में उभरे हैं। दिल्ली से भी कई कोचिंग सेंटर सेक्टर- 62 में शिफ्ट हो गए हैं, जिनमें हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनमें से कई का संचालन ऐसी गलियों में हो रहा है, जहां दमकल की गाड़ियां नहीं जा सकती हैं, लेकिन विभाग का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे ने बताया कि पिछले साल करियर लाॅन्चर को सील किया गया था और आकाश इंस्टीट्यूट व फिट जी के बेसमेंट बंद कराए गए थे। अन एकेडमी को भी चेतावनी दी गई थी। आज से अग्निशमन विभाग कोचिंग सेंटर की जांच करेगा। इसके लिए कमिटी बनाई गई है। इसमें शिक्षा विभाग व प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हैं।
कोट
जिले में 60 कोचिंग सेंटर का पंजीकरण कराया गया है। जिन्होंने पंजीकरण नहीं कराया है, वहां पर दमकल विभाग, पीडब्ल्यूडी और शिक्षा विभाग मिलकर कार्रवाई करेंगे। -चंद्रशेखर, जिला विद्यालय निरीक्षक
कोचिंग संस्थानों ऐसे बरती जा रही लापरवाही
-अधिकतर कोचिंग संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग का एनओसी नहीं है।
-इंट्री व निकास मार्ग मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
-अग्निशमन यंत्रों की कमी, उपयोग का प्रशिक्षण नहीं।
-बेसमेंट में अलग से अग्निशमन व्यवस्था नहीं।
-जरूरत से जयादा छात्रों की संख्या
कोचिंग संस्थानों की पड़ताल
अल्फा-1 काॅमर्शियल बेल्ट में फायर सुरक्षा पर सवाल:
अल्फा-1 की कमर्शियल बेल्ट में संचालित लाइटबीम क्लासेस तीसरी मंजिल पर संचालित है। यहां पहुंचने के लिए लिफ्ट और सीढ़ियों की व्यवस्था तो है, लेकिन सीढ़ियों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं मिली। आपात स्थिति में अंधेरी सीढ़ियां छात्रों के लिए खतरा बन सकती हैं। प्रवेश द्वार पर लगे फायर एक्सटिंग्विशर की रीफिलिंग की तिथि काफी पहले की थी। अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त उपकरण उपलब्ध नहीं दिखे।
नॉलेज पार्क-1 में खुले पैनल बॉक्स और खराब उपकरण:
नॉलेज पार्क-1 स्थित ध्येय आईएएस कोचिंग संस्थान में भी कई कमियां दिखाई दीं। भवन के प्रथम तल पर लिफ्ट के पास विद्युत पैनल बॉक्स खुला मिला, जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है। सीढ़ियों के रास्ते में सामान रखे थे। अग्निशमन उपकरणों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। कई उपकरण खराब पाए गए। भवन में लगी होजरील में पाइप नहीं था, जबकि पानी की लाइनें भी सूखी नजर आईं।
क्या है नियम
कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए भवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से जुड़े कई मानकों का पालन आवश्यक होता है। बहुमंजिला भवनों में संचालित संस्थानों में पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर, कार्यशील होजरील, आपातकालीन निकास, स्पष्ट दिशा संकेतक, विद्युत सुरक्षा व्यवस्था और नियमित फायर ऑडिट होना जरूरी है। इसके अलावा विद्यार्थियों और कर्मचारियों को समय-समय पर मॉकड्रिल और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
तालमेल नहीं होने से नहीं हो पा रही कार्रवाई
15 मीटर से कम ऊंचाई और 500 मीटर स्क्वायर फुट से कम क्षेत्रफल वाली इमारत को एनओसी देने के लिए फायर विभाग अधिकृत नहीं है। इन्हें शिक्षा विभाग एनओसी देता है। अग्निशमन विभाग के अधिकारी का कहना है कि शिक्षा विभाग का सहयोग नहीं मिल पाने से कोचिंग सेंटर पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।
गलियों में हो रहा कोचिंग सस्थानों का संचालन, दमकल की गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल
आज से अग्निशमन विभाग कोचिंग संस्थानों की करेगा जांच, समिति बनी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा/ग्रेटर नोएडा। लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 छात्रों की माैत ने नोएडा-ग्रेनो में संचालित कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर लोगों का ध्यान खींचा है। जिले में एक हजार से ज्यादा कोचिंग सेंटर संचालित हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर का न तो पंजीकरण है और न ही अग्निशमन सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। केवल 60 कोचिंग सेंटर ने अब तक अपना पंजीकरण कराया है।
2024 में दिल्ली के राजेंद्र नगर के कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर नोएडा, दादरी और ग्रेटर नोएडा के 25 कोचिंग सेंटर को बंद कराया था। लेकिन, संचालकों पर कार्रवाई नहीं होने से सब फिर से अपने पुराने ढर्रे पर आ गए।
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पिछले कुछ साल में सेक्टर- 62, 15, 16, 12, 27 आदि कोचिंग हब के रूप में उभरे हैं। दिल्ली से भी कई कोचिंग सेंटर सेक्टर- 62 में शिफ्ट हो गए हैं, जिनमें हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनमें से कई का संचालन ऐसी गलियों में हो रहा है, जहां दमकल की गाड़ियां नहीं जा सकती हैं, लेकिन विभाग का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे ने बताया कि पिछले साल करियर लाॅन्चर को सील किया गया था और आकाश इंस्टीट्यूट व फिट जी के बेसमेंट बंद कराए गए थे। अन एकेडमी को भी चेतावनी दी गई थी। आज से अग्निशमन विभाग कोचिंग सेंटर की जांच करेगा। इसके लिए कमिटी बनाई गई है। इसमें शिक्षा विभाग व प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हैं।
कोट
जिले में 60 कोचिंग सेंटर का पंजीकरण कराया गया है। जिन्होंने पंजीकरण नहीं कराया है, वहां पर दमकल विभाग, पीडब्ल्यूडी और शिक्षा विभाग मिलकर कार्रवाई करेंगे। -चंद्रशेखर, जिला विद्यालय निरीक्षक
कोचिंग संस्थानों ऐसे बरती जा रही लापरवाही
-अधिकतर कोचिंग संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग का एनओसी नहीं है।
-इंट्री व निकास मार्ग मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
-अग्निशमन यंत्रों की कमी, उपयोग का प्रशिक्षण नहीं।
-बेसमेंट में अलग से अग्निशमन व्यवस्था नहीं।
-जरूरत से जयादा छात्रों की संख्या
कोचिंग संस्थानों की पड़ताल
अल्फा-1 काॅमर्शियल बेल्ट में फायर सुरक्षा पर सवाल:
अल्फा-1 की कमर्शियल बेल्ट में संचालित लाइटबीम क्लासेस तीसरी मंजिल पर संचालित है। यहां पहुंचने के लिए लिफ्ट और सीढ़ियों की व्यवस्था तो है, लेकिन सीढ़ियों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं मिली। आपात स्थिति में अंधेरी सीढ़ियां छात्रों के लिए खतरा बन सकती हैं। प्रवेश द्वार पर लगे फायर एक्सटिंग्विशर की रीफिलिंग की तिथि काफी पहले की थी। अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त उपकरण उपलब्ध नहीं दिखे।
नॉलेज पार्क-1 में खुले पैनल बॉक्स और खराब उपकरण:
नॉलेज पार्क-1 स्थित ध्येय आईएएस कोचिंग संस्थान में भी कई कमियां दिखाई दीं। भवन के प्रथम तल पर लिफ्ट के पास विद्युत पैनल बॉक्स खुला मिला, जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है। सीढ़ियों के रास्ते में सामान रखे थे। अग्निशमन उपकरणों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। कई उपकरण खराब पाए गए। भवन में लगी होजरील में पाइप नहीं था, जबकि पानी की लाइनें भी सूखी नजर आईं।
क्या है नियम
कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए भवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से जुड़े कई मानकों का पालन आवश्यक होता है। बहुमंजिला भवनों में संचालित संस्थानों में पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर, कार्यशील होजरील, आपातकालीन निकास, स्पष्ट दिशा संकेतक, विद्युत सुरक्षा व्यवस्था और नियमित फायर ऑडिट होना जरूरी है। इसके अलावा विद्यार्थियों और कर्मचारियों को समय-समय पर मॉकड्रिल और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
तालमेल नहीं होने से नहीं हो पा रही कार्रवाई
15 मीटर से कम ऊंचाई और 500 मीटर स्क्वायर फुट से कम क्षेत्रफल वाली इमारत को एनओसी देने के लिए फायर विभाग अधिकृत नहीं है। इन्हें शिक्षा विभाग एनओसी देता है। अग्निशमन विभाग के अधिकारी का कहना है कि शिक्षा विभाग का सहयोग नहीं मिल पाने से कोचिंग सेंटर पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।