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Noida News: नाले में दम तोड़ती सफाई, उखड़ी सड़कों में जलभराव का संकट
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-जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून आने के आसार, लेकिन शहर में तैयारियां अधूरी
-बारिश में पानी की निकासी नहीं होने पर तालाब बन जाती हैं शहर की सड़कें
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून आने के आसार हैं। इसके पहले प्री-मानसून बारिश भी हो सकती है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण इसके लिए शहर को तैयार नहीं कर पाया है। पूरे शहर की सड़कें उखड़ी या टूटी हैं। इनकी रिसर्फेसिंग नहीं हुई है। वहीं, बारिश के पानी की निकासी के लिए सफाई भी अब तक कुछ ही नालों तक सीमित है। जलनिकासी के इंतजाम दुरुस्त न होने से सड़कों पर जलभराव होगा, जिससे सड़कें और उखड़ेंगी।
नोएडा प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर में 190 छोटे-बड़े नाले हैं। पुराने हिस्से में 98 नाले हैं, जिनकी लंबाई 186.57 किलोमीटर है। वहीं, कम आबादी व एक्सप्रसेवे किनारे वाले क्षेत्र में 92 नाले हैं, जिनकी लंबाई 164.61 किलोमीटर है। पिछले कई वर्षों से इनकी सफाई 10 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय पर होती रही है।
इस बार नाला सफाई के लिए टेंडर ही मई के आखिर में जारी हुए, जिससे अब तक 10-12 नालों की ही सफाई हो पाई है। जन स्वास्थ्य विभाग समाप्त किए जाने के कारण इस बार नाला सफाई के टेंडर सभी 10 वर्क सर्कल से हुए हैं। इस बार लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नाला सफाई के प्रतिशत का आंकड़ा भी प्राधिकरण में मौजूद नहीं है।
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नालों की स्थिति पर नजर
-सेक्टर-58 व 59 से गुजरने वाला नाला कचरे से पटा है। सफाई न होने से इससे पिछले वर्षों में जलभराव की समस्या हुई थी।
-सेक्टर-56 के सामने से गुजरने वाला नाला क्षतिग्रस्त है। कई महीनों पहले गिरी दीवार का कंक्रीट नाले में ही पड़ा हुआ है।
-सेक्टर-22 में कोंडली नाला कचरे से पटा हुआ है। पिछले वर्ष नाले से बैक-फ्लो हुआ था, जिससे सेक्टर-22 समेत कई सेक्टरों में जलभराव हुआ था।
-सेक्टर-25ए के सामने सड़क किनारे बना नाला कचरे से पटा है।
-सेक्टर-34-35 के बीच से गुजरने वाला नाला भी साफ नहीं हुआ है।
300 करोड़ रुपये में हुआ टेंडर
शहर की सड़कें डेढ़ साल से उखड़ी हुई हैं। मरम्मत के लिए फरवरी से प्राधिकरण ने जारी किए। 300 करोड़ रुपये से ज्यादा के टेंडर जारी कर प्राधिकरण निर्माण एजेंसियों को काम सौंप चुका है, लेकिन रिसर्फेसिंग अब तक पूरी नहीं हो पाई है। ठेकेदार व इंजीनियरों ने बिटुमीन संकट का रोना रोकर तीन महीने गुजार दिए। अब काम तो शुरू हुआ है, लेकिन तेजी नहीं पकड़ पाया।
सड़कों की स्थिति
-प्राधिकरण दफ्तर के सामने की सड़क उद्योग मार्ग पूरी तरह उखड़ा चुका है।
-सेक्टर-22 की सड़कें पूरी तरह टूटी हुई हैं।
-सेक्टर-12-22 चौराहे से एडोबी चौराहा, सेक्टर-25ए से होकर सेक्टर-49 चौराहे को जाने वाली सड़क उखड़ी है।
-सेक्टर-15, 16,18 मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाली सर्विस रोड उखड़ी हुई है।
-सेक्टर-113 से 116 टी प्वाइंट के बीच की सड़क उखड़ी है।
कोट
नाले की सफाई को तेजी से कराने के निर्देश दिए गए हैं। जलभराव होने पर संबधित वर्क सर्किल प्रभारी जिम्मेदार होंगे। सड़कों की रिसर्फेसिंग 30 जून तक पूरा करने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर जिम्मेदार इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई होगी। -कृष्ण करुणेश, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण
-बारिश में पानी की निकासी नहीं होने पर तालाब बन जाती हैं शहर की सड़कें
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून आने के आसार हैं। इसके पहले प्री-मानसून बारिश भी हो सकती है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण इसके लिए शहर को तैयार नहीं कर पाया है। पूरे शहर की सड़कें उखड़ी या टूटी हैं। इनकी रिसर्फेसिंग नहीं हुई है। वहीं, बारिश के पानी की निकासी के लिए सफाई भी अब तक कुछ ही नालों तक सीमित है। जलनिकासी के इंतजाम दुरुस्त न होने से सड़कों पर जलभराव होगा, जिससे सड़कें और उखड़ेंगी।
नोएडा प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर में 190 छोटे-बड़े नाले हैं। पुराने हिस्से में 98 नाले हैं, जिनकी लंबाई 186.57 किलोमीटर है। वहीं, कम आबादी व एक्सप्रसेवे किनारे वाले क्षेत्र में 92 नाले हैं, जिनकी लंबाई 164.61 किलोमीटर है। पिछले कई वर्षों से इनकी सफाई 10 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय पर होती रही है।
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इस बार नाला सफाई के लिए टेंडर ही मई के आखिर में जारी हुए, जिससे अब तक 10-12 नालों की ही सफाई हो पाई है। जन स्वास्थ्य विभाग समाप्त किए जाने के कारण इस बार नाला सफाई के टेंडर सभी 10 वर्क सर्कल से हुए हैं। इस बार लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नाला सफाई के प्रतिशत का आंकड़ा भी प्राधिकरण में मौजूद नहीं है।
नालों की स्थिति पर नजर
-सेक्टर-58 व 59 से गुजरने वाला नाला कचरे से पटा है। सफाई न होने से इससे पिछले वर्षों में जलभराव की समस्या हुई थी।
-सेक्टर-56 के सामने से गुजरने वाला नाला क्षतिग्रस्त है। कई महीनों पहले गिरी दीवार का कंक्रीट नाले में ही पड़ा हुआ है।
-सेक्टर-22 में कोंडली नाला कचरे से पटा हुआ है। पिछले वर्ष नाले से बैक-फ्लो हुआ था, जिससे सेक्टर-22 समेत कई सेक्टरों में जलभराव हुआ था।
-सेक्टर-25ए के सामने सड़क किनारे बना नाला कचरे से पटा है।
-सेक्टर-34-35 के बीच से गुजरने वाला नाला भी साफ नहीं हुआ है।
300 करोड़ रुपये में हुआ टेंडर
शहर की सड़कें डेढ़ साल से उखड़ी हुई हैं। मरम्मत के लिए फरवरी से प्राधिकरण ने जारी किए। 300 करोड़ रुपये से ज्यादा के टेंडर जारी कर प्राधिकरण निर्माण एजेंसियों को काम सौंप चुका है, लेकिन रिसर्फेसिंग अब तक पूरी नहीं हो पाई है। ठेकेदार व इंजीनियरों ने बिटुमीन संकट का रोना रोकर तीन महीने गुजार दिए। अब काम तो शुरू हुआ है, लेकिन तेजी नहीं पकड़ पाया।
सड़कों की स्थिति
-प्राधिकरण दफ्तर के सामने की सड़क उद्योग मार्ग पूरी तरह उखड़ा चुका है।
-सेक्टर-22 की सड़कें पूरी तरह टूटी हुई हैं।
-सेक्टर-12-22 चौराहे से एडोबी चौराहा, सेक्टर-25ए से होकर सेक्टर-49 चौराहे को जाने वाली सड़क उखड़ी है।
-सेक्टर-15, 16,18 मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाली सर्विस रोड उखड़ी हुई है।
-सेक्टर-113 से 116 टी प्वाइंट के बीच की सड़क उखड़ी है।
कोट
नाले की सफाई को तेजी से कराने के निर्देश दिए गए हैं। जलभराव होने पर संबधित वर्क सर्किल प्रभारी जिम्मेदार होंगे। सड़कों की रिसर्फेसिंग 30 जून तक पूरा करने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर जिम्मेदार इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई होगी। -कृष्ण करुणेश, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण