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Noida News: एनसीआर में सड़कों का होगा वैज्ञानिक कायाकल्प, धूल और जाम पर लगेगी लगाम
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नोएडा-ग्रेटर नोएडा समेत चार शहरों की होगी डिजाइनिंग, किया जाएगा अध्ययन
योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क से उठने वाली धूल को कम कर प्रदूषण स्तर में सुधार लाना
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सड़कों से उड़ने वाली धूल पर लगाम लगाने, ट्रैफिक जाम कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ की सड़कों की वैज्ञानिक तरीके से डिजाइनिंग की जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने दिल्ली में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के साथ करार किया है। इससे जाम से तो राहत मिलेगी ही, साथ ही सड़कों की स्थिति में भी सुधार आएगा।
करार के तहत दोनों संस्थान यूपी पीडब्ल्यूडी को तकनीकी सलाह देंगे और सड़कों के डिजाइन, रोड इंजीनियरिंग, ट्रैफिक प्रबंधन, ग्रीनिंग और धूल नियंत्रण के लिए मानक तैयार करेंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क से उठने वाली धूल को कम कर एनसीआर के प्रदूषण स्तर में सुधार लाना है। दरअसल, हाल ही में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) की समीक्षा में यह सामने आया था कि एनसीआर में प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में सड़क की धूल भी शामिल है। उखड़ी हुई सड़कें, कच्ची पटरी, खराब रखरखाव और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है। इसके मद्देनजर विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से नई कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
जाम कम करने के लिए भी टीम करेगी काम
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली से जुड़ने वाले मार्गों और गाजियाबाद-मेरठ के व्यस्त चौराहों पर लगने वाले जाम के कारणों का भी अध्ययन होगा। विशेषज्ञ सड़क के अलाइनमेंट, लेन व्यवस्था, यू-टर्न, कट और चौराहों के डिजाइन में बदलाव के सुझाव देंगे, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु हो सके। इसमें कई प्वाइंट्स शुमार हैं जिनका अध्ययन किया जाएगा। वर्तमान में कई ऐसे स्थान हैं जहां पर हर दम जाम लगता है और काफी देर तक लोग फंसे रहते हैं। अध्ययन होने के बाद सुझाव के अनुसार बदलाव किए जाएंगे ताकि इससे राहत मिल सके।
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सड़कें खराब होने से पहले मरम्मत और रखरखाव की बनेगी योजना
योजना के तहत सड़कों की स्थिति, ट्रैफिक भार, मरम्मत की जरूरत और उनकी आयु का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (आरएएमएस) विकसित किया जाएगा। इससे सड़कें खराब होने से पहले उनकी मरम्मत और रखरखाव की योजना बनाई जा सकेगी। इससे शहरवासियों को खराब और उखड़ी सड़कों का सामना नहीं करना पड़ेगा। खराब होने से पहले ही उनकी मरम्मत करने से आवागमन भी बेहतर रहेगा।
ग्रीन बेल्ट और धूल नियंत्रण का भी रखा जाएगा ध्यान
शहर में जगह-जगह बनी ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ के संग जल निकासी की बेहतर योजना बनाई जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञ अध्ययन करेंगे। सड़कों से उड़ने वाली धूल से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए भी अध्ययन किया जाएगा। जलभराव से छुटकारा दिलाने के लिए भी इसके तहत कार्य किया जाएगा। जलभराव पर रोक लगेगी तो सड़कें लंबे समय तक बरकरार रहेंगी।
पहले भी उठ चुकी है सड़कों की धूल की समस्या
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सड़कों की धूल लंबे समय से प्रदूषण का बड़ा कारण रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों में सड़कों के खराब हिस्सों के पुनर्विकास और धूल नियंत्रण के लिए बड़े निवेश की जरूरत बताई गई है। ऐसे में विशेषज्ञ संस्थानों की भागीदारी को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एक नजर
-नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ की सड़कों की होगी वैज्ञानिक डिजाइनिंग
-यूपी पीडब्ल्यूडी ने सीआरआरआई और एसपीए के साथ किया करार
-सड़कों की धूल और प्रदूषण कम करने पर रहेगा ध्यान
-जाम वाले स्थानों की रोड इंजीनियरिंग का होगा अध्ययन
-रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम से होगी निगरानी
-सड़क किनारे हरित पट्टियां और पक्की पटरी विकसित करने की तैयारी
करार होने से सड़कों को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों से सुझाव लिए जाएंगे और भविष्य की परियोजनाओं में उनकी ड्राइंग-डिजाइन का भी उपयोग किया जाएगा। इससे सड़कें लंबे समय तक खराब नहीं होंगी। साथ ही जाम से छुटकारा दिलाने के लिए भी अध्ययन किया जाएगा।
-एसपी सिंह, जीएम नोएडा प्राधिकरण
योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क से उठने वाली धूल को कम कर प्रदूषण स्तर में सुधार लाना
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सड़कों से उड़ने वाली धूल पर लगाम लगाने, ट्रैफिक जाम कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ की सड़कों की वैज्ञानिक तरीके से डिजाइनिंग की जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने दिल्ली में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के साथ करार किया है। इससे जाम से तो राहत मिलेगी ही, साथ ही सड़कों की स्थिति में भी सुधार आएगा।
करार के तहत दोनों संस्थान यूपी पीडब्ल्यूडी को तकनीकी सलाह देंगे और सड़कों के डिजाइन, रोड इंजीनियरिंग, ट्रैफिक प्रबंधन, ग्रीनिंग और धूल नियंत्रण के लिए मानक तैयार करेंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क से उठने वाली धूल को कम कर एनसीआर के प्रदूषण स्तर में सुधार लाना है। दरअसल, हाल ही में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) की समीक्षा में यह सामने आया था कि एनसीआर में प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में सड़क की धूल भी शामिल है। उखड़ी हुई सड़कें, कच्ची पटरी, खराब रखरखाव और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है। इसके मद्देनजर विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से नई कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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जाम कम करने के लिए भी टीम करेगी काम
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली से जुड़ने वाले मार्गों और गाजियाबाद-मेरठ के व्यस्त चौराहों पर लगने वाले जाम के कारणों का भी अध्ययन होगा। विशेषज्ञ सड़क के अलाइनमेंट, लेन व्यवस्था, यू-टर्न, कट और चौराहों के डिजाइन में बदलाव के सुझाव देंगे, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु हो सके। इसमें कई प्वाइंट्स शुमार हैं जिनका अध्ययन किया जाएगा। वर्तमान में कई ऐसे स्थान हैं जहां पर हर दम जाम लगता है और काफी देर तक लोग फंसे रहते हैं। अध्ययन होने के बाद सुझाव के अनुसार बदलाव किए जाएंगे ताकि इससे राहत मिल सके।
सड़कें खराब होने से पहले मरम्मत और रखरखाव की बनेगी योजना
योजना के तहत सड़कों की स्थिति, ट्रैफिक भार, मरम्मत की जरूरत और उनकी आयु का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (आरएएमएस) विकसित किया जाएगा। इससे सड़कें खराब होने से पहले उनकी मरम्मत और रखरखाव की योजना बनाई जा सकेगी। इससे शहरवासियों को खराब और उखड़ी सड़कों का सामना नहीं करना पड़ेगा। खराब होने से पहले ही उनकी मरम्मत करने से आवागमन भी बेहतर रहेगा।
ग्रीन बेल्ट और धूल नियंत्रण का भी रखा जाएगा ध्यान
शहर में जगह-जगह बनी ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ के संग जल निकासी की बेहतर योजना बनाई जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञ अध्ययन करेंगे। सड़कों से उड़ने वाली धूल से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए भी अध्ययन किया जाएगा। जलभराव से छुटकारा दिलाने के लिए भी इसके तहत कार्य किया जाएगा। जलभराव पर रोक लगेगी तो सड़कें लंबे समय तक बरकरार रहेंगी।
पहले भी उठ चुकी है सड़कों की धूल की समस्या
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सड़कों की धूल लंबे समय से प्रदूषण का बड़ा कारण रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों में सड़कों के खराब हिस्सों के पुनर्विकास और धूल नियंत्रण के लिए बड़े निवेश की जरूरत बताई गई है। ऐसे में विशेषज्ञ संस्थानों की भागीदारी को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एक नजर
-नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ की सड़कों की होगी वैज्ञानिक डिजाइनिंग
-यूपी पीडब्ल्यूडी ने सीआरआरआई और एसपीए के साथ किया करार
-सड़कों की धूल और प्रदूषण कम करने पर रहेगा ध्यान
-जाम वाले स्थानों की रोड इंजीनियरिंग का होगा अध्ययन
-रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम से होगी निगरानी
-सड़क किनारे हरित पट्टियां और पक्की पटरी विकसित करने की तैयारी
करार होने से सड़कों को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों से सुझाव लिए जाएंगे और भविष्य की परियोजनाओं में उनकी ड्राइंग-डिजाइन का भी उपयोग किया जाएगा। इससे सड़कें लंबे समय तक खराब नहीं होंगी। साथ ही जाम से छुटकारा दिलाने के लिए भी अध्ययन किया जाएगा।
-एसपी सिंह, जीएम नोएडा प्राधिकरण