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Noida News: शहर के वो सेक्टर जहां सुविधाएं हैं 'हाई' और मेंटेनेंस 'लो'
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शहर के वो सेक्टर जहां सुविधाएं हैं 'हाई' और मेंटेनेंस 'लो'
कम रखरखाव शुल्क में बेहतर सुविधाएं दे रहे सेक्टर
सामुदायिक केंद्र की व्यवस्थाएं किसी निजी होटल से कम नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में सुकून और बेहतर वातावरण के बीच कौन नहीं रहना चाहता लेकिन सवाल यह है कि वह कितना महंगा पड़ सकता है। शहर में ऐसे भी सेक्टर हैं जो कम रखरखाव शुल्क में बेहतर सुविधाएं देते हैं। इनमें सेक्टर-36, 19, 122 और अरूण विहार के तीन सेक्टर शामिल हैं।
सेक्टर-19 आरडब्ल्यूए महासचिव लक्ष्मी नारायण ने बताया कि जब सेक्टर बसा था, तब यहां सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा व्यवस्था और जंगल की थी। उस चुनौती से निपटने के लिए आरडब्ल्यूए ने सबसे पहले काम किया। यहां के सामुदायिक केंद्र की व्यवस्थाएं किसी निजी होटल से कम नहीं हैं। वहीं बात करें सेक्टर-36 की तो वह भी कम रखरखाव शुल्क लेकर मेट्रो से लेकर सार्वजनिक बसों और चमचमाती सड़कों की बेहतर कनेक्टिविटी देता है। पास ही बना मॉडल यूटर्न भी यहां का सबसे खास है, जो आकर्षण का केंद्र है। हालांकि कई सेक्टर ऐसे भी हैं जो सालाना 5,000 रुपये रखरखाव शुल्क लेते हैं लेकिन उन आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों का कहना है कि उनके सेक्टर में अन्य सेक्टरों के मुकाबले कम लोग हैं और सेक्टर में व्यवस्था अन्य के मुकाबले ज्यादा हैं और सुंदरता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
कोट्स
हमारे सेक्टर में 2300 भवन हैं, 1983 में आरडब्ल्यूए का पहली बार गठन हुआ, सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया गया। हम एलआईजी से 100 रुपये और एमआईजी से 200 रुपये प्रतिमाह रखरखाव शुल्क लेते हैं। -सविता मेहता, सेक्टर-19, प्रबंध कारिणी, आरडब्ल्यूए
हमारे सेक्टर में 634 बड़े प्लाॅट हैं, जिनसे सालाना 7260 रुपये और 294 ईडब्ल्यूएस धारकों से 1573 शुल्क लिया जाता है, जिसके एवज में सभी को समान व्यवस्थाएं दी जाती हैं। सेक्टर की सबसे खास बातों में गोल्फ कार्ट शामिल है। -अनीता, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, सेक्टर-36
हमारे आरडब्ल्यूए में सेक्टर-27, 29 व सेक्टर 37 आते हैं। इनमें करीब 5 हजार परिवार रहते हैं। हम 3,500 रुपये सालाना रखरखाव शुल्क लेते हैं। सेक्टर में सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। सेक्टरवासियों की सुनवाई के लिए अलग से टीम बनाई गई है, जो काउंसलिंग करती है। -प्रशांत गुप्ता, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, अरूण विहार
हम सेक्टरवासियों से हर माह 200 रुपये रखरखाव शुल्क लेते हैं। सुबह और शाम सामुदायिक केंद्र में निवासियों की समस्याएं सुनने के लिए पदाधिकारी उपलब्ध रहते हैं। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए हर एक सूचना नियमित भेजी जाती है। -नितिन चौहान, आरडब्ल्यूए महासचिव, सेक्टर-116
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कम रखरखाव शुल्क में बेहतर सुविधाएं दे रहे सेक्टर
सामुदायिक केंद्र की व्यवस्थाएं किसी निजी होटल से कम नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में सुकून और बेहतर वातावरण के बीच कौन नहीं रहना चाहता लेकिन सवाल यह है कि वह कितना महंगा पड़ सकता है। शहर में ऐसे भी सेक्टर हैं जो कम रखरखाव शुल्क में बेहतर सुविधाएं देते हैं। इनमें सेक्टर-36, 19, 122 और अरूण विहार के तीन सेक्टर शामिल हैं।
सेक्टर-19 आरडब्ल्यूए महासचिव लक्ष्मी नारायण ने बताया कि जब सेक्टर बसा था, तब यहां सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा व्यवस्था और जंगल की थी। उस चुनौती से निपटने के लिए आरडब्ल्यूए ने सबसे पहले काम किया। यहां के सामुदायिक केंद्र की व्यवस्थाएं किसी निजी होटल से कम नहीं हैं। वहीं बात करें सेक्टर-36 की तो वह भी कम रखरखाव शुल्क लेकर मेट्रो से लेकर सार्वजनिक बसों और चमचमाती सड़कों की बेहतर कनेक्टिविटी देता है। पास ही बना मॉडल यूटर्न भी यहां का सबसे खास है, जो आकर्षण का केंद्र है। हालांकि कई सेक्टर ऐसे भी हैं जो सालाना 5,000 रुपये रखरखाव शुल्क लेते हैं लेकिन उन आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों का कहना है कि उनके सेक्टर में अन्य सेक्टरों के मुकाबले कम लोग हैं और सेक्टर में व्यवस्था अन्य के मुकाबले ज्यादा हैं और सुंदरता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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कोट्स
हमारे सेक्टर में 2300 भवन हैं, 1983 में आरडब्ल्यूए का पहली बार गठन हुआ, सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया गया। हम एलआईजी से 100 रुपये और एमआईजी से 200 रुपये प्रतिमाह रखरखाव शुल्क लेते हैं। -सविता मेहता, सेक्टर-19, प्रबंध कारिणी, आरडब्ल्यूए
हमारे सेक्टर में 634 बड़े प्लाॅट हैं, जिनसे सालाना 7260 रुपये और 294 ईडब्ल्यूएस धारकों से 1573 शुल्क लिया जाता है, जिसके एवज में सभी को समान व्यवस्थाएं दी जाती हैं। सेक्टर की सबसे खास बातों में गोल्फ कार्ट शामिल है। -अनीता, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, सेक्टर-36
हमारे आरडब्ल्यूए में सेक्टर-27, 29 व सेक्टर 37 आते हैं। इनमें करीब 5 हजार परिवार रहते हैं। हम 3,500 रुपये सालाना रखरखाव शुल्क लेते हैं। सेक्टर में सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। सेक्टरवासियों की सुनवाई के लिए अलग से टीम बनाई गई है, जो काउंसलिंग करती है। -प्रशांत गुप्ता, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, अरूण विहार
हम सेक्टरवासियों से हर माह 200 रुपये रखरखाव शुल्क लेते हैं। सुबह और शाम सामुदायिक केंद्र में निवासियों की समस्याएं सुनने के लिए पदाधिकारी उपलब्ध रहते हैं। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए हर एक सूचना नियमित भेजी जाती है। -नितिन चौहान, आरडब्ल्यूए महासचिव, सेक्टर-116

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