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Noida News: किराए पर गई कार वापस न आने पर कंपनी जिम्मेदार, 30 दिन में करना होगा भुगतान
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जिसने कार किराए पर बुक की, उसने वापस करने के इन्कार कर दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। अगर किसी प्लेटफॉर्म के जरिए किराए पर दी गई कार वापस नहीं आती, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की ही होगी। ऐसे ही एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने जूमकार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह 30 दिन के भीतर या तो कार बरामद कर मालिक को सौंपे या उसकी कीमत का भुगतान करे। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने मामले की सुनवाई की।
नोएडा के चौड़ा गांव निवासी मोहम्मद अयाज ने 16 अप्रैल 2024 को अपनी कार उक्त कंपनी के साथ पंजीकृत कर किराए पर देनी शुरू की थी। कंपनी कार मालिक को 200 रुपये प्रति घंटा दिलाती थी, जिसमें से 40 प्रतिशत कमीशन काटा जाता था, साथ ही टीडीएस भी लिया जाता था। 16 जून 2024 को कंपनी के माध्यम से अजय कुमार नाम के ग्राहक ने कार 19 जून के लिए 24 घंटे के लिए बुक की थी। तय समय पर कार वापस नहीं आई। जब मालिक ने ग्राहक से संपर्क किया, तो उसने कार लौटाने से इन्कार कर दिया। कुछ समय बाद कार की लोकेशन दादरी-झाझर मार्ग पर दिखी और फिर बंद हो गई।
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मालिक ने कंपनी को सूचना दी, नहीं हुई कार्रवाई
कार मालिक ने पूरी जानकारी कंपनी को दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने माना कि कंपनी ने अपने माध्यम से कार किराए पर दिलाई थी और कार वापस न आने के लिए वही जिम्मेदार है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह 30 दिन के भीतर कार को ट्रेस कर मालिक को सौंपे। यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो कंपनी कार की आईडीवी (इंश्योर्ड डिक्लेयर वैल्यू) के अनुसार 6,78,346 रुपये की राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करे। इसके अलावा, 5 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और 5 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी देने होंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। अगर किसी प्लेटफॉर्म के जरिए किराए पर दी गई कार वापस नहीं आती, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की ही होगी। ऐसे ही एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने जूमकार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह 30 दिन के भीतर या तो कार बरामद कर मालिक को सौंपे या उसकी कीमत का भुगतान करे। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने मामले की सुनवाई की।
नोएडा के चौड़ा गांव निवासी मोहम्मद अयाज ने 16 अप्रैल 2024 को अपनी कार उक्त कंपनी के साथ पंजीकृत कर किराए पर देनी शुरू की थी। कंपनी कार मालिक को 200 रुपये प्रति घंटा दिलाती थी, जिसमें से 40 प्रतिशत कमीशन काटा जाता था, साथ ही टीडीएस भी लिया जाता था। 16 जून 2024 को कंपनी के माध्यम से अजय कुमार नाम के ग्राहक ने कार 19 जून के लिए 24 घंटे के लिए बुक की थी। तय समय पर कार वापस नहीं आई। जब मालिक ने ग्राहक से संपर्क किया, तो उसने कार लौटाने से इन्कार कर दिया। कुछ समय बाद कार की लोकेशन दादरी-झाझर मार्ग पर दिखी और फिर बंद हो गई।
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मालिक ने कंपनी को सूचना दी, नहीं हुई कार्रवाई
कार मालिक ने पूरी जानकारी कंपनी को दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने माना कि कंपनी ने अपने माध्यम से कार किराए पर दिलाई थी और कार वापस न आने के लिए वही जिम्मेदार है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह 30 दिन के भीतर कार को ट्रेस कर मालिक को सौंपे। यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो कंपनी कार की आईडीवी (इंश्योर्ड डिक्लेयर वैल्यू) के अनुसार 6,78,346 रुपये की राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करे। इसके अलावा, 5 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और 5 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी देने होंगे।
