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Noida News: हजारों स्कूली वाहन सड़कों पर, पंजीकृत केवल दो हजार
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अभिभावक संघ ने कहा बरती जा रही है लापरवाही, बिना परमिट चलाए जा रहे कई वाहन
राजेश भाटी
ग्रेटर नोएडा। जिले में स्कूली बच्चों के परिवहन को लेकर लापरवाही सामने आई है। अभिभावक संघ गौतमबुद्ध नगर के यतेंद्र कसाना के मुताबिक जिले में स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए करीब 15 से 16 हजार वाहन संचालित हो रहे हैं। इनमे से आधिकारिक रूप से केवल करीब दो हजार वाहन ही पंजीकृत हैं। आरोप है कि बड़ी संख्या में वाहन बिना परमिट और अनुमति के चलाए जा रहे हैं।
जिले में दो हजार से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए बसों के साथ-साथ वैन और अन्य निजी वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। कई मामलों में वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है जो सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है। दादरी, जारचा, रबुपुरा, दनकौर, जेवर क्षेत्रों के कई स्कूलों में छोटे बच्चों को वैन में ले जाया जाता है। इन वाहनों में सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम तक नहीं हैं। अधिकांश निजी वाहन बिना किसी आधिकारिक अनुमति के स्कूल में लगे हैं।
अभिभावक संघ के मुताबिक जिले के लगभग हर स्कूल में औसतन 8 से 10 वाहन संचालित हो रहे हैं, जबकि कई बड़े स्कूलों में 35 से 40 बसें और अन्य वाहन चल रहे हैं। इनमें कैब, वैन और अन्य छोटे वाहन शामिल हैं। कई वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है।
मानकों का हो रहा खुला उल्लंघन
- निजी वाहनों का बिना अनुमति स्कूल परिवहन में उपयोग
- वाहनों में बच्चों की संख्या, फिटनेस, फायर सेफ्टी जैसे मानकों की अनदेखी
- कई मामलों में कम उम्र या बिना लाइसेंस वाले चालक वाहन चला रहे हैं।
नोट: अभिभावकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार
800 से 2500 रुपये है किराया
स्कूलों में बच्चों को लाने और वापस छोड़ने के लिए 800 रुपये से लेकर 2500 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से किराया वसूला जाता है। ट्रांसपोर्ट शुल्क के रूप में लिया जाता है। जिसको स्कूल प्रबंधन फीस के साथ वसूलते है। निजी वाहनों का कॉमर्शियाल उपयोग करके कई स्कूल राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं।
84 स्कूली वाहनों को नोटिस
परिवहन विभाग ने बिना पंजीकरण और फिटनेस वाले 84 स्कूली वाहनों को नोटिस जारी किया है। इन वाहन संचालकों को 15 दिनों के भीतर जवाब देने और पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक अधिकांश ने पालन नहीं किया है। स्कूल वाहनों के संचालन को लेकर जल्द ही जिले में विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - उदित नारायण पाण्डेय एआरटीओ नोएडा
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राजेश भाटी
ग्रेटर नोएडा। जिले में स्कूली बच्चों के परिवहन को लेकर लापरवाही सामने आई है। अभिभावक संघ गौतमबुद्ध नगर के यतेंद्र कसाना के मुताबिक जिले में स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए करीब 15 से 16 हजार वाहन संचालित हो रहे हैं। इनमे से आधिकारिक रूप से केवल करीब दो हजार वाहन ही पंजीकृत हैं। आरोप है कि बड़ी संख्या में वाहन बिना परमिट और अनुमति के चलाए जा रहे हैं।
जिले में दो हजार से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए बसों के साथ-साथ वैन और अन्य निजी वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। कई मामलों में वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है जो सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है। दादरी, जारचा, रबुपुरा, दनकौर, जेवर क्षेत्रों के कई स्कूलों में छोटे बच्चों को वैन में ले जाया जाता है। इन वाहनों में सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम तक नहीं हैं। अधिकांश निजी वाहन बिना किसी आधिकारिक अनुमति के स्कूल में लगे हैं।
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अभिभावक संघ के मुताबिक जिले के लगभग हर स्कूल में औसतन 8 से 10 वाहन संचालित हो रहे हैं, जबकि कई बड़े स्कूलों में 35 से 40 बसें और अन्य वाहन चल रहे हैं। इनमें कैब, वैन और अन्य छोटे वाहन शामिल हैं। कई वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है।
मानकों का हो रहा खुला उल्लंघन
- निजी वाहनों का बिना अनुमति स्कूल परिवहन में उपयोग
- वाहनों में बच्चों की संख्या, फिटनेस, फायर सेफ्टी जैसे मानकों की अनदेखी
- कई मामलों में कम उम्र या बिना लाइसेंस वाले चालक वाहन चला रहे हैं।
नोट: अभिभावकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार
800 से 2500 रुपये है किराया
स्कूलों में बच्चों को लाने और वापस छोड़ने के लिए 800 रुपये से लेकर 2500 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से किराया वसूला जाता है। ट्रांसपोर्ट शुल्क के रूप में लिया जाता है। जिसको स्कूल प्रबंधन फीस के साथ वसूलते है। निजी वाहनों का कॉमर्शियाल उपयोग करके कई स्कूल राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं।
84 स्कूली वाहनों को नोटिस
परिवहन विभाग ने बिना पंजीकरण और फिटनेस वाले 84 स्कूली वाहनों को नोटिस जारी किया है। इन वाहन संचालकों को 15 दिनों के भीतर जवाब देने और पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक अधिकांश ने पालन नहीं किया है। स्कूल वाहनों के संचालन को लेकर जल्द ही जिले में विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - उदित नारायण पाण्डेय एआरटीओ नोएडा