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Delhi NCR News: आबकारी नीति मामले में ईडी की याचिका पर केजरीवाल समेत 23 को नोटिस
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- हाईकोर्ट ने ईडी से कहा, स्पेशल जज की टिप्पणियां सामान्य, वर्तमान मामले से जुड़े नहीं
- अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी उन्हें आदेश जारी करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कथित आबकारी घोटाला मामले में ईडी की याचिका पर नोटिस जारी कर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों से जवाब दाखिल करने को कहा है। ईडी ने याचिका में विशेष अदालत की ओर से 27 फरवरी 2026 को पारित आदेश से कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। इस आदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कुल 23 आरोपियों को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में बरी कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा की एकल पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की दलीलों पर ध्यान दिया। ईडी ने तर्क दिया कि विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) जितेंद्र सिंह द्वारा दिए गए कई पैराग्राफ (जिनमें 109, 1048 से 1052, 1062, 1083, 1106 और 1124 से 1132 शामिल हैं) में एजेंसी के खिलाफ अनुचित, व्यापक और अनावश्यक टिप्पणियां की गई हैं। ईडी का कहना है कि जांच एजेंसी को सुनवाई का मौका दिए बिना ही निंदा की गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
स्वतंत्र जांच को प्रभावित कर सकती हैं टिप्पणियां
ईडी ने दावा किया कि ये टिप्पणियां पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम) के तहत उसकी स्वतंत्र जांच को प्रभावित कर सकती हैं। ट्रायल कोर्ट केवल सीबीआई के मामले में आरोपमुक्त करने की याचिकाओं पर विचार कर रहा था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ईडी को पार्टी बनाए बिना ही उस पर सीधे आरोप लगाए गए। इस पर न्यायमूर्ति ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि ये अवलोकन सामान्य प्रकृति के प्रतीत होते हैं और वर्तमान मामले से सीधे संबंधित नहीं लगते। उन्होंने कहा कि यह उस जज की भावना से जुड़ा हो सकता है कि जांच निष्पक्ष नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी उन्हें आदेश देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों के साथ-साथ सीबीआई को भी नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर की थी टिप्पणी
ट्रायल कोर्ट के आदेश में जज जितेंद्र सिंह ने पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम) के तहत ईडी की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि ईडी अक्सर आधारभूत अपराध की जांच पूरी होने और न्यायिक जांच से पहले ही गिरफ्तारियां और अभियोजन शिकायतें दाखिल कर देती है, जिससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होती है। जज ने माना कि यदि आधारभूत अपराध बंद हो जाता है तो मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं टिकता, फिर भी ईडी पहले से कार्रवाई करती है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है। ईडी का तर्क है कि ये टिप्पणियां उसके पीएमएलए मामले को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है और जनता के हित में भी हानिकारक है।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कथित आबकारी घोटाला मामले में ईडी की याचिका पर नोटिस जारी कर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों से जवाब दाखिल करने को कहा है। ईडी ने याचिका में विशेष अदालत की ओर से 27 फरवरी 2026 को पारित आदेश से कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। इस आदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कुल 23 आरोपियों को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में बरी कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा की एकल पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की दलीलों पर ध्यान दिया। ईडी ने तर्क दिया कि विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) जितेंद्र सिंह द्वारा दिए गए कई पैराग्राफ (जिनमें 109, 1048 से 1052, 1062, 1083, 1106 और 1124 से 1132 शामिल हैं) में एजेंसी के खिलाफ अनुचित, व्यापक और अनावश्यक टिप्पणियां की गई हैं। ईडी का कहना है कि जांच एजेंसी को सुनवाई का मौका दिए बिना ही निंदा की गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
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स्वतंत्र जांच को प्रभावित कर सकती हैं टिप्पणियां
ईडी ने दावा किया कि ये टिप्पणियां पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम) के तहत उसकी स्वतंत्र जांच को प्रभावित कर सकती हैं। ट्रायल कोर्ट केवल सीबीआई के मामले में आरोपमुक्त करने की याचिकाओं पर विचार कर रहा था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ईडी को पार्टी बनाए बिना ही उस पर सीधे आरोप लगाए गए। इस पर न्यायमूर्ति ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि ये अवलोकन सामान्य प्रकृति के प्रतीत होते हैं और वर्तमान मामले से सीधे संबंधित नहीं लगते। उन्होंने कहा कि यह उस जज की भावना से जुड़ा हो सकता है कि जांच निष्पक्ष नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी उन्हें आदेश देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों के साथ-साथ सीबीआई को भी नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर की थी टिप्पणी
ट्रायल कोर्ट के आदेश में जज जितेंद्र सिंह ने पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम) के तहत ईडी की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि ईडी अक्सर आधारभूत अपराध की जांच पूरी होने और न्यायिक जांच से पहले ही गिरफ्तारियां और अभियोजन शिकायतें दाखिल कर देती है, जिससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होती है। जज ने माना कि यदि आधारभूत अपराध बंद हो जाता है तो मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं टिकता, फिर भी ईडी पहले से कार्रवाई करती है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है। ईडी का तर्क है कि ये टिप्पणियां उसके पीएमएलए मामले को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है और जनता के हित में भी हानिकारक है।