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Nuh News: बारापुला नाले में झुग्गियों का सीवेज गिरने पर विवाद, डूसिब ने डीजेबी और एमसीडी पर उठाए सवाल
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-रिपोर्ट में डूसिब ने कहा, सीवर लाइन बिछाने और सीवेज का ट्रीटमेंट करने की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बारापुला नाले में झुग्गी बस्तियों से पहुंच रहे गंदे पानी और सीवेज को लेकर दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपनी रिपोर्ट दाखिल की है। डूसिब ने कहा कि सीवर लाइन बिछाने और सीवेज का ट्रीटमेंट करने की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की है। वहीं, नाले में अवैध रूप से जुड़े शौचालयों के कनेक्शन हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। डूसिब के अनुसार, आरके पुरम की नौ झुग्गी बस्तियों का गंदा पानी नाला नंबर-4 के जरिये बारापुला नाले में पहुंच रहा है। इन बस्तियों में तीन हजार से अधिक झुग्गियां हैं और करीब 15 हजार लोग रहते हैं। एनजीटी के निर्देश पर डूसिब, जल बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने इन इलाकों का संयुक्त निरीक्षण भी किया।
डूसिब ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसकी जिम्मेदारी झुग्गी बस्तियों में पानी, सड़क, बिजली और सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। सीवर लाइन बिछाना, सीवेज पंपिंग स्टेशन और ट्रीटमेंट प्लांट लगाना तथा उनका संचालन करना जल बोर्ड का काम है। डूसिब ने आरोप लगाया कि बैठकों में जल बोर्ड की इन जिम्मेदारियों को उसके ऊपर डालने की कोशिश की जा रही है। निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर लोगों के निजी शौचालय और बाथरूम के पाइप सीधे नाला नंबर-4 में जुड़े मिले।
जहां सीवर संभव नहीं, वहां पुनर्वास की मांग : डूसिब ने इस संबंध में एमसीडी को पत्र भेजकर ऐसे कनेक्शन हटाने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, जमीन की मालिक एजेंसियों से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जरूरी अनुमति देने को कहा है। डूसिब ने एनजीटी के सामने यह भी कहा कि कुछ झुग्गी बस्तियों की जमीन और ढलान ऐसी है, जहां सीवर लाइन बिछाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। ऐसे इलाकों में डूसिब ने संबंधित भूमि मालिक एजेंसियों को पात्र लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के निर्देश देने की मांग की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बारापुला नाले में झुग्गी बस्तियों से पहुंच रहे गंदे पानी और सीवेज को लेकर दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपनी रिपोर्ट दाखिल की है। डूसिब ने कहा कि सीवर लाइन बिछाने और सीवेज का ट्रीटमेंट करने की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की है। वहीं, नाले में अवैध रूप से जुड़े शौचालयों के कनेक्शन हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। डूसिब के अनुसार, आरके पुरम की नौ झुग्गी बस्तियों का गंदा पानी नाला नंबर-4 के जरिये बारापुला नाले में पहुंच रहा है। इन बस्तियों में तीन हजार से अधिक झुग्गियां हैं और करीब 15 हजार लोग रहते हैं। एनजीटी के निर्देश पर डूसिब, जल बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने इन इलाकों का संयुक्त निरीक्षण भी किया।
डूसिब ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसकी जिम्मेदारी झुग्गी बस्तियों में पानी, सड़क, बिजली और सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। सीवर लाइन बिछाना, सीवेज पंपिंग स्टेशन और ट्रीटमेंट प्लांट लगाना तथा उनका संचालन करना जल बोर्ड का काम है। डूसिब ने आरोप लगाया कि बैठकों में जल बोर्ड की इन जिम्मेदारियों को उसके ऊपर डालने की कोशिश की जा रही है। निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर लोगों के निजी शौचालय और बाथरूम के पाइप सीधे नाला नंबर-4 में जुड़े मिले।
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जहां सीवर संभव नहीं, वहां पुनर्वास की मांग : डूसिब ने इस संबंध में एमसीडी को पत्र भेजकर ऐसे कनेक्शन हटाने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, जमीन की मालिक एजेंसियों से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जरूरी अनुमति देने को कहा है। डूसिब ने एनजीटी के सामने यह भी कहा कि कुछ झुग्गी बस्तियों की जमीन और ढलान ऐसी है, जहां सीवर लाइन बिछाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। ऐसे इलाकों में डूसिब ने संबंधित भूमि मालिक एजेंसियों को पात्र लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के निर्देश देने की मांग की है।
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