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Nuh News: एमएसपी से ऊपर सरसों के दाम, मंडियों में 6800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक्री
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तेल की बढ़ती कीमतों और पाम ऑयल के आयात पर असर से बाजार में तेजी, किसानों के चेहरे खिले
शेरसिंह डागर
नूंह। जिले की अनाज मंडियों में इस बार सरसों की फसल किसानों के लिए राहत और खुशहाली लेकर आई है। बाजार में सरसों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर चल रहे हैं। जहां सरकार की ओर से तय एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं मंडियों में सरसों 6300 से 6800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है।
मंडी में बेहतर दाम मिलने से किसानों में उत्साह का माहौल है। लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिल रहा है कि फसल एमएसपी से ऊपर बिक रही है, जिससे किसानों को सीधा फायदा हो रहा है। किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह बाजार भाव बने रहे तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
- तेल के दामों में उछाल से बढ़ी मांग -
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा असर सरसों के दामों पर पड़ा है। हाल के समय में वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और तनाव के कारण खाने वाले तेलों की कीमतों में उछाल आया है। खासकर पाम ऑयल का आयात प्रभावित होने से घरेलू बाजार में सरसों तेल की मांग तेजी से बढ़ी है, जिसका असर सरसों के दामों पर साफ दिखाई दे रहा है। भारत में बड़ी मात्रा में पाम ऑयल का आयात किया जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होने और निर्यातक देशों में उत्पादन व आपूर्ति में आई बाधाओं के चलते आयात घटा है। इसका सीधा फायदा देसी तिलहनों, खासकर सरसों को मिल रहा है।
किसान बोले- हर बार एमएसपी से नीचे बेचनी पड़ती थी फसल, इस बार माहौल अलग
किसान इलियास जुबेर, सलीम, किशोर, महेन्द्र व अशोक का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें अक्सर एमएसपी से नीचे फसल बेचनी पड़ती थी, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। किसान राजीव ने बताया कि इस बार मंडी में व्यापारी खुद अच्छे दाम दे रहे हैं, जिससे हमें सरकारी खरीद का इंतजार भी नहीं करना पड़ रहा।
आगे भी बने रह सकते हैं मजबूत दाम
कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह का कहना है कि जैसे वैश्विक हालात है, उस हिसाब से आगे भी इसी प्रकार की स्थिति बनी रहेगी। पाम ऑयल का आयात लंबे समय तक कम रहने की संभावना है। इसका सीधा असर सरसों और तिलहन की फसलों पर पड़ेगा और उनकी बिक्री अच्छे दामों पर होगी। वहीं, नूंह अनाज मंडी के प्रधान सतपाल सिंघला का कहना है कि इस बार सरसों की फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। किसानों में उत्साह है और इसका सकारात्मक असर अन्य फसलों पर भी होगा.
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शेरसिंह डागर
नूंह। जिले की अनाज मंडियों में इस बार सरसों की फसल किसानों के लिए राहत और खुशहाली लेकर आई है। बाजार में सरसों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर चल रहे हैं। जहां सरकार की ओर से तय एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं मंडियों में सरसों 6300 से 6800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है।
मंडी में बेहतर दाम मिलने से किसानों में उत्साह का माहौल है। लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिल रहा है कि फसल एमएसपी से ऊपर बिक रही है, जिससे किसानों को सीधा फायदा हो रहा है। किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह बाजार भाव बने रहे तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
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- तेल के दामों में उछाल से बढ़ी मांग -
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा असर सरसों के दामों पर पड़ा है। हाल के समय में वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और तनाव के कारण खाने वाले तेलों की कीमतों में उछाल आया है। खासकर पाम ऑयल का आयात प्रभावित होने से घरेलू बाजार में सरसों तेल की मांग तेजी से बढ़ी है, जिसका असर सरसों के दामों पर साफ दिखाई दे रहा है। भारत में बड़ी मात्रा में पाम ऑयल का आयात किया जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होने और निर्यातक देशों में उत्पादन व आपूर्ति में आई बाधाओं के चलते आयात घटा है। इसका सीधा फायदा देसी तिलहनों, खासकर सरसों को मिल रहा है।
किसान बोले- हर बार एमएसपी से नीचे बेचनी पड़ती थी फसल, इस बार माहौल अलग
किसान इलियास जुबेर, सलीम, किशोर, महेन्द्र व अशोक का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें अक्सर एमएसपी से नीचे फसल बेचनी पड़ती थी, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। किसान राजीव ने बताया कि इस बार मंडी में व्यापारी खुद अच्छे दाम दे रहे हैं, जिससे हमें सरकारी खरीद का इंतजार भी नहीं करना पड़ रहा।
आगे भी बने रह सकते हैं मजबूत दाम
कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह का कहना है कि जैसे वैश्विक हालात है, उस हिसाब से आगे भी इसी प्रकार की स्थिति बनी रहेगी। पाम ऑयल का आयात लंबे समय तक कम रहने की संभावना है। इसका सीधा असर सरसों और तिलहन की फसलों पर पड़ेगा और उनकी बिक्री अच्छे दामों पर होगी। वहीं, नूंह अनाज मंडी के प्रधान सतपाल सिंघला का कहना है कि इस बार सरसों की फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। किसानों में उत्साह है और इसका सकारात्मक असर अन्य फसलों पर भी होगा.