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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Nuh News ›   Newborn sold for six lakhs; police bust gang and arrest five women.

Nuh News: छह लाख में नवजात का सौदा, पुलिस ने पांच महिलाओं को दबोचकर गिराेह का किया खुलासा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 08:12 PM IST
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-उत्तरी जिला के एसटीएफ ने गिरोह का किया खुलासा, कश्मीरी गेट इलाके से एक नवजात बरामद, पांच से छह नवजात बच्चों का गिरोह कर चुका है सौदा, पुलिस कर रही छापेमारी
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-पुलिस ने गिरोह के कुछ और लोगों की पहचान की, उनकी तलाश में छापेमारी की जा रही, पुलिस ने नकली ग्राहक बनकर आरोपी को दबोचा, एक महिला ने अपने जानकार से खरीदा था मासूम
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
उत्तरी जिला के एसटीएफ ने नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में पांच महिलाओं को गिरफ्तार कर एक नवजात को सकुशल बरामद किया है। महिला आरोपियों की पहचान ईशा (30), हरजीत (40), शबनम (40), प्रिया (35) और सिमरन (30) के रूप में हुई है। पुलिस ने नकली ग्राहक बनकर गिरोह को दबोचा है। नवजात का 6 लाख रुपये में सौदा हुआ था। मौके पर एडवांस के 20 हजार रुपये लेकर नकली दंपती को बच्चा लेने महिलाओं के पास भेजा गया। पुलिस ने नवजात को सौंपते समय मौके पर ही आरोपी महिलाओं को दबोच लिया। बरामद मासूम चार से पांच दिन का है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त राजा बांठिया ने बताया कि उनकी टीम को जानकारी मिल रही थी कि कुछ लोग नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं। उपायुक्त ने जिले के एसटीएफ इंस्पेक्टर आशीष दुबे व उनकी टीम को गिरोह की जानकारी जुटाने के लिए कहा। टीम को खबर मिली कि गिरोह गरीब परिवारों से बच्चे खरीदकर जरूरतमंद दंपती को बेचता है।
फौरन वरिष्ठ अधिकारियों ने एक हवलदार व महिला सिपाही को नकली दंपती बनाकर गिरोह के पास बच्चा खरीदने भेजा गया। शुरुआत में गिरोह बच्चा न होने की बात करता रहा। दबाव बनाने पर आरोपी छह लाख रुपये में एक बच्चा देने के लिए तैयार हो गए थे।

पांच से छह बच्चों को बेच चुका है गिरोह : पुलिस की जांच में पता चला कि गिरोह अब तक पांच से छह बच्चों को सौदा करवा चुका है। आरोपी सरकारी अस्पतालों में गरीब परिवार को ढूंढते थे। उनको लालच देकर बच्चे खरीदे जाते थे। कई बार जिन परिवारों में लड़कियां ज्यादा होती थीं, उनसे से भी संपर्क कर बच्चे खरीदे जाते थे। बच्चों के खरीदारों की तलाश के लिए सोशल मीडिया पर नजर रखी जाती थी।
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