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Nuh News: युवाओं की सेहत से खिलवाड़... करोड़ों रुपये की व्यायामशालाएं बनीं खंडहर
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आयुष और पंचायतीराज विभाग की अनदेखी के कारण युवा पूछ रहे कहां करें व्यायाम
दिनेश देशवाल
नूंह। जहां एक ओर सरकार फिट इंडिया और स्वस्थ हरियाणा के नारे के साथ युवाओं को खेल और व्यायाम से जोड़ने की बात कर रही है, वहीं नूंह में हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बनीं सरकारी व्यायामशालाएं आज युवाओं के पसीने की जगह खंडहर की तस्वीर पेश कर रही हैं। हालत यह है कि जिन भवनों में कभी युवाओं के स्वास्थ्य और खेल प्रतिभा के निखरने की उम्मीदें जगाई गई थीं, वही भवन अब लापरवाही, उदासीनता और विभागीय खींचतान की भेंट चढ़ चुके हैं।
करीब दस वर्ष पहले तत्कालीन मनोहर सरकार के पहले कार्यकाल में जिले के इंड़री, छपेड़ा, आलदोका, उजीना और साकरस गांवों में आधुनिक व्यायामशालाओं का निर्माण कराया गया था। इन पर सरकार ने कई करोड़ रुपये खर्च किए थे। उद्देश्य साफ था कि ग्रामीण युवाओं को गांव में ही व्यायाम, योग और खेलकूद की बेहतर सुविधा मिले, ताकि वे स्वस्थ रहें और खेलों में आगे बढ़ सकें। लेकिन आज यह महत्वाकांक्षी योजना सफेद हाथी बनकर रह गई है।
झाड़ियों में दबा सरकारी सपना:
व्यायामशालाओं की मौजूदा स्थिति किसी से छिपी नहीं है। भवनों के भीतर और मैदान में घास-फूस व बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग चुकी हैं। वर्षों से सफाई न होने के कारण कई जगह तो हालात ऐसे हैं कि युवाओं को अंदर जाने में भी डर लगता है। कहीं टूटे फर्श, कहीं जर्जर दीवारें और कहीं बंद पड़े दरवाजे यह सब सरकारी उपेक्षा की गवाही दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई और रखरखाव किया रहता, तो आज ये व्यायामशालाएं युवाओं की पहली पसंद होती।
सड़क पर व्यायाम, जान जोखिम में
व्यायामशालाएं बंद पड़ी होने का सीधा असर युवाओं की सेहत और सुरक्षा पर पड़ रहा है। मजबूरी में युवा सुबह-शाम सड़कों पर दौड़ लगाते और व्यायाम करते दिखाई देते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच व्यायाम करना किसी खतरे से कम नहीं, लेकिन विकल्प न होने के कारण युवा यही करने को मजबूर हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि हादसे की आशंका बनी रहती है, फिर भी प्रशासन इस ओर आंखें मूंदे बैठा है।
स्टाफ का टोटा, जिम्मेदारी से पल्ला
व्यायामशालाओं के रखरखाव के लिए न तो चौकीदार है, न माली और न ही सफाईकर्मी। आयुष विभाग की ओर से केवल योग सहायकों की तैनाती की गई है, वह भी सीमित समय के लिए। ये योग सहायक सुबह महज दो घंटे योग कराते हैं। चूंकि अधिकांश व्यायामशालाएं गांव से बाहर स्थित हैं, इसलिए ग्रामीण वहां पहुंच ही नहीं पाते। नतीजतन योग सहायक भी व्यायामशाला की बजाय गांव में किसी स्कूल, बैठक या सार्वजनिक स्थान पर योग कक्षा लगाने को मजबूर हो जाते हैं। आलदोका व्यायामशाला में तो योग सहायक का पद भी रिक्त पड़ा है। बाकी स्थानों पर तैनात योग सहायकों की गतिविधियों की निगरानी भी सवालों के घेरे में है। कुल मिलाकर, योजना कागजों में चल रही है, जमीन पर नहीं।
ग्रामीणों में रोष:
आलदोका के रवींद्र देशवाल, छपेड़ा के पूर्व सरपंच रमेश, खेड़ली दौसा के सरपंच अंतराम, देशराज पंवार, पूर्व सरपंच कमल और मुकेश कुमार जैसे कई ग्रामीणों में रोष है। इनका कहना है कि सरकार की करोड़ों रुपये की योजना विभागीय लापरवाही के कारण बर्बाद हो रही है। यदि समय पर सफाई, मरम्मत और स्टाफ की व्यवस्था कर दी जाए, तो इन व्यायामशालाओं से हजारों युवाओं को लाभ मिल सकता है।
पत्र लिखे पर नहीं हुआ समाधान
जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशबीर गहलावत का कहना है कि एक व्यायामशाला में योग सहायक का पद रिक्त है, बाकी जगह योग सहायक अपना काम कर रहे हैं। सफाई और मरम्मत को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक भी हुई थी, जिसमें पंचायतीराज विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कई बार पत्राचार के बावजूद जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।
खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नितिन यादव ने जल्द सफाई कराने का आश्वासन दिया है। सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन भी कागजों तक सीमित रहेगा या वाकई झाड़ियों में दबे इन सरकारी सपनों को दोबारा सांस मिलेगी। जिले के युवाओं की नजरें अब जवाब और कार्रवाई दोनों पर टिकी हैं।
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फोटो: छपेड़ा गांव में बनी व्यायामशाला में बिना रखरखाव के उगी झाड़ियां।
फोटो: गांव आलदोका में बिना रखरखाव के व्यायामशाला बनी घासफूंस का केंद्र।
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दिनेश देशवाल
नूंह। जहां एक ओर सरकार फिट इंडिया और स्वस्थ हरियाणा के नारे के साथ युवाओं को खेल और व्यायाम से जोड़ने की बात कर रही है, वहीं नूंह में हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बनीं सरकारी व्यायामशालाएं आज युवाओं के पसीने की जगह खंडहर की तस्वीर पेश कर रही हैं। हालत यह है कि जिन भवनों में कभी युवाओं के स्वास्थ्य और खेल प्रतिभा के निखरने की उम्मीदें जगाई गई थीं, वही भवन अब लापरवाही, उदासीनता और विभागीय खींचतान की भेंट चढ़ चुके हैं।
करीब दस वर्ष पहले तत्कालीन मनोहर सरकार के पहले कार्यकाल में जिले के इंड़री, छपेड़ा, आलदोका, उजीना और साकरस गांवों में आधुनिक व्यायामशालाओं का निर्माण कराया गया था। इन पर सरकार ने कई करोड़ रुपये खर्च किए थे। उद्देश्य साफ था कि ग्रामीण युवाओं को गांव में ही व्यायाम, योग और खेलकूद की बेहतर सुविधा मिले, ताकि वे स्वस्थ रहें और खेलों में आगे बढ़ सकें। लेकिन आज यह महत्वाकांक्षी योजना सफेद हाथी बनकर रह गई है।
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झाड़ियों में दबा सरकारी सपना:
व्यायामशालाओं की मौजूदा स्थिति किसी से छिपी नहीं है। भवनों के भीतर और मैदान में घास-फूस व बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग चुकी हैं। वर्षों से सफाई न होने के कारण कई जगह तो हालात ऐसे हैं कि युवाओं को अंदर जाने में भी डर लगता है। कहीं टूटे फर्श, कहीं जर्जर दीवारें और कहीं बंद पड़े दरवाजे यह सब सरकारी उपेक्षा की गवाही दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई और रखरखाव किया रहता, तो आज ये व्यायामशालाएं युवाओं की पहली पसंद होती।
सड़क पर व्यायाम, जान जोखिम में
व्यायामशालाएं बंद पड़ी होने का सीधा असर युवाओं की सेहत और सुरक्षा पर पड़ रहा है। मजबूरी में युवा सुबह-शाम सड़कों पर दौड़ लगाते और व्यायाम करते दिखाई देते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच व्यायाम करना किसी खतरे से कम नहीं, लेकिन विकल्प न होने के कारण युवा यही करने को मजबूर हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि हादसे की आशंका बनी रहती है, फिर भी प्रशासन इस ओर आंखें मूंदे बैठा है।
स्टाफ का टोटा, जिम्मेदारी से पल्ला
व्यायामशालाओं के रखरखाव के लिए न तो चौकीदार है, न माली और न ही सफाईकर्मी। आयुष विभाग की ओर से केवल योग सहायकों की तैनाती की गई है, वह भी सीमित समय के लिए। ये योग सहायक सुबह महज दो घंटे योग कराते हैं। चूंकि अधिकांश व्यायामशालाएं गांव से बाहर स्थित हैं, इसलिए ग्रामीण वहां पहुंच ही नहीं पाते। नतीजतन योग सहायक भी व्यायामशाला की बजाय गांव में किसी स्कूल, बैठक या सार्वजनिक स्थान पर योग कक्षा लगाने को मजबूर हो जाते हैं। आलदोका व्यायामशाला में तो योग सहायक का पद भी रिक्त पड़ा है। बाकी स्थानों पर तैनात योग सहायकों की गतिविधियों की निगरानी भी सवालों के घेरे में है। कुल मिलाकर, योजना कागजों में चल रही है, जमीन पर नहीं।
ग्रामीणों में रोष:
आलदोका के रवींद्र देशवाल, छपेड़ा के पूर्व सरपंच रमेश, खेड़ली दौसा के सरपंच अंतराम, देशराज पंवार, पूर्व सरपंच कमल और मुकेश कुमार जैसे कई ग्रामीणों में रोष है। इनका कहना है कि सरकार की करोड़ों रुपये की योजना विभागीय लापरवाही के कारण बर्बाद हो रही है। यदि समय पर सफाई, मरम्मत और स्टाफ की व्यवस्था कर दी जाए, तो इन व्यायामशालाओं से हजारों युवाओं को लाभ मिल सकता है।
पत्र लिखे पर नहीं हुआ समाधान
जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशबीर गहलावत का कहना है कि एक व्यायामशाला में योग सहायक का पद रिक्त है, बाकी जगह योग सहायक अपना काम कर रहे हैं। सफाई और मरम्मत को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक भी हुई थी, जिसमें पंचायतीराज विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कई बार पत्राचार के बावजूद जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।
खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नितिन यादव ने जल्द सफाई कराने का आश्वासन दिया है। सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन भी कागजों तक सीमित रहेगा या वाकई झाड़ियों में दबे इन सरकारी सपनों को दोबारा सांस मिलेगी। जिले के युवाओं की नजरें अब जवाब और कार्रवाई दोनों पर टिकी हैं।
फोटो: छपेड़ा गांव में बनी व्यायामशाला में बिना रखरखाव के उगी झाड़ियां।
फोटो: गांव आलदोका में बिना रखरखाव के व्यायामशाला बनी घासफूंस का केंद्र।