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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Organ donation rate in Delhi-NCR lags significantly behind the national average

Delhi NCR News: दिल्ली-एनसीआर में अंगदान की रफ्तार राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 09:00 PM IST
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विश्व अंगदान दिवसः
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मौत के बाद अंगदान की हिस्सेदारी महज तीन फीसदी, राष्ट्रीय औसत 17.5-18 फीसदी; देश में हर 20 मिनट में एक मरीज जुड़ रहा प्रतीक्षा सूची में

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। अंगदान को महादान कहा जाता है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर में मौत के बाद अंगदान की स्थिति राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बेहद कमजोर है। यहां मौत के बाद दान से होने वाले प्रत्यारोपण की हिस्सेदारी करीब तीन फीसदी है, जबकि देश में यह औसत 17.5 से 18 फीसदी है। ऐसे में जरूरतमंद मरीजों को उपयुक्त अंग मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
विश्व अंगदान दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को ओखला स्थित निजी अस्पताल में आयोजित ‘गिव द गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम में एनओटीटीओ के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। वर्तमान में 1,05,560 मरीज प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं। इनमें 73,646 किडनी और 23,396 मरीज लीवर प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। देश में हर 20 मिनट में एक नया मरीज इस सूची में जुड़ रहा है।
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किडनी के मरीज सबसे ज्यादा
हर साल दो लाख से अधिक नए मरीज किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत वाली श्रेणी में आते हैं, जबकि करीब 14 हजार किडनी प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं। लिवर और हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की संख्या भी सालाना करीब 50 हजार है। पिछले साल करीब 5,100 लीवर और केवल 239 हृदय प्रत्यारोपण हुए।
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अंगदान से बच सकती है आठ लोगों की जिंदगी
विशेषज्ञों ने कहा कि अंगदान बढ़ाने के लिए अस्पतालों के साथ समाज और परिवारों को भी जागरूक करना होगा। एक व्यक्ति मृत्यु के बाद अंगदान कर आठ लोगों की जिंदगी बचा सकता है। किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, आंत और पैंक्रियाज के अलावा कॉर्निया, त्वचा और हड्डी जैसे ऊतक भी दान किए जा सकते हैं।

एक दशक में प्रत्यारोपण चार गुना से ज्यादा
देश में वर्ष 2013 में करीब 4,900 अंग प्रत्यारोपण हुए थे। पिछले साल यह संख्या बढ़कर 20,138 से अधिक हो गई। इसके बावजूद उपलब्ध अंगों की तुलना में जरूरत कहीं अधिक है। ‘जुग-जुग’ अभियान के जरिए लोगों को अंगदान का संकल्प लेने और जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।


2805 मरीजों की अंगदान के इंतजार में हुई मौत
वर्ष 2020 से 2024 के बीच 2,805 मरीजों की मृत्यु अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हुए हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक, अंगों की उपलब्धता बढ़ाना प्रत्यारोपण व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है।
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