AIIMS Parking: इलाज से ज्यादा मुश्किल हो रहा गाड़ी पार्क करना, घंटों कतार में खड़े मरीज-परिजन हो रहे बेहाल
इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले मरीजों का दावा है कि उन्हें अस्पताल समय पर पहुंचने के लिए घर से काफी पहले निकलना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद पार्किंग स्थल तक पहुंचने में ही काफी समय निकल जाता है। कई बार इस देरी के कारण मरीजों की ओपीडी या जांच का समय भी प्रभावित हो जाता है।
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देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में से एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में पार्किंग व्यवस्था मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। जहां गाड़ी पार्क करने में कुछ ही मिनट लगने चाहिए, वहां लोगों को कई बार एक से दो घंटे तक लंबी कतारों को पार करना पड़ता है। सबसे अधिक भीड़ गेट नंबर दो पर देखने को मिलती है, जहां से इमरजेंसी के साथ-साथ पार्किंग की भी एंट्री शुरू है। यहां वाहनों की लंबी कतार लग जाती है और धीरे-धीरे आगे बढ़ने की प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को गर्मी और भीड़ के बीच इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी हालत और खराब हो जाती है।
तीन मंजिल में पार्किंग, दो तो एम्स स्टाफ के आरक्षित
इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले मरीजों का दावा है कि उन्हें अस्पताल समय पर पहुंचने के लिए घर से काफी पहले निकलना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद पार्किंग स्थल तक पहुंचने में ही काफी समय निकल जाता है। कई बार इस देरी के कारण मरीजों की ओपीडी या जांच का समय भी प्रभावित हो जाता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। वहीं, अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अस्पताल में तीन मंजिल की पार्किंग है, जिसमें ऊपर के दो मंजिलों पर पार्किंग की सुविधा डॉक्टरों, अधिकारियों और स्टाफ के लिए आरक्षित है। ऐसे में, मरीजों के वाहनों की पार्किंग मुख्य रूप से अंडरग्राउंड में निर्धारित है। इसके बावजूद अधिकतर लोग गेट नंबर दो से ही प्रवेश करते हैं, जिससे वहां दबाव बढ़ जाता है और व्यवस्था प्रभावित होती है।
लोगों को सही प्रवेश द्वार की जानकारी नहीं
मरीजों के अनुसार, एक बड़ी समस्या यह भी सामने आई है कि लोगों को सही प्रवेश द्वार की जानकारी नहीं होती। प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार अगर मरीज और परिजन सीधे गेट नंबर छह का उपयोग करें, तो उन्हें पार्किंग के लिए कम समय इंतजार करना पड़ेगा और भीड़भाड़ से भी बचा जा सकता है। जानकारी के अभाव में लोग गलत गेट से प्रवेश कर जाते हैं, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि पार्किंग व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित किया जाए और अस्पताल परिसर में स्पष्ट दिशा-निर्देश और सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि लोगों को सही मार्ग की जानकारी मिल सके। उनका कहना है कि इलाज के लिए आने वाले लोगों को पहले से ही मानसिक और शारीरिक तनाव होता है, ऐसे में पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधा में देरी उनकी परेशानी को और बढ़ा देती है।
मेरे परिवार से यहां से कोई भर्ती है, जिसके लिए मुझे रोजाना यहां आना पड़ता है। लेकिन पार्किंग में ही दो घंटे से ज्यादा लग गए। अब इसके बाद मुझे यहां से फिर तीन किलोमीटर जाना पड़ेगा। अगर शटर गाड़ियों की सुविधा बढ़ा दी जाए तो समय की बचत होगी। -अफजल अल्वी
बीमार हालत में अस्पताल आना ही मुश्किल होता है, ऊपर से पार्किंग के लिए इतनी देर इंतजार करना बहुत तकलीफ देता है। हमें तो इलाज के लिए समय पर पहुंचना होता है, लेकिन यहां पहले पार्किंग की चिंता करनी पड़ती है, फिर इलाज कराने के लिए अपनी बारी की। -मनोज कुमार
गेट नंबर दो पर बहुत ज्यादा भीड़ होती है, जिसकी वजह से गाड़ी आगे ही नहीं बढ़ पाती। हमें नहीं पता था कि गेट नंबर छह से जल्दी पार्किंग मिल जाती है, यह जानकारी पहले मिल जाती तो बहुत आसानी होती, क्योंकि अस्पताल में वक्त बहुत कीमती है। -कुणाल गुप्ता
हम दो-तीन घंटे पहले निकलते हैं फिर भी देर हो जाती है। क्योंकि आम लोगों के लिए अंडर ग्राउड में पार्किंग की व्यवस्था है। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था अगर सही तरीके से और साफ जानकारी के साथ हो तो मरीजों को बहुत राहत मिलेगी। -अमित वर्मा