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Delhi NCR News: उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन, रोहित एक्ट की मांग तेज
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- आइसा ने जातिगत भेदभाव रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ शनिवार को जंतर-मंतर पर सैकड़ों की संख्या में छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किया। अगुवाई ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने की। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर ब तख्तियां लिए पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने रोहित वेमुला का उदाहरण देते हुए बताया कि अगर समय रहते भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून और प्रभावी व्यवस्था होती, तो कई छात्रों की जान बचाई जा सकती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए छात्रों ने रोहित एक्ट की तर्ज पर एक ऐसा कानून बनाने की मांग की, जो उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोक सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।
प्रदर्शनकारी सत्यम ने बताया कि केवल नियम और दिशा-निर्देश काफी नहीं हैं, बल्कि एक मजबूत संवैधानिक कानून की जरूरत है, ताकि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव होने पर उसे तुरंत न्याय मिल सके। वहीं, आईसा से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि यह आंदोलन किसी एक संस्था या वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सभी छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। अगर सरकार भेदभाव के खिलाफ कोई कानून नहीं लाती है, तो हम आगे भी अपना विरोध जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, यूजीसी के नियम उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इन नियमों पर रोक लगने से छात्रों में भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हो गई है। शिक्षा से जुड़े फैसलों में छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इस प्रदर्शन में अधिवक्ता राजेंद्र पाल गौतम, सांसद सुदामा प्रसाद, प्रोफेसर जितेंद्र मीणा और लक्ष्मण यादव समेत कई विशेष अतिथि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ शनिवार को जंतर-मंतर पर सैकड़ों की संख्या में छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किया। अगुवाई ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने की। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर ब तख्तियां लिए पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने रोहित वेमुला का उदाहरण देते हुए बताया कि अगर समय रहते भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून और प्रभावी व्यवस्था होती, तो कई छात्रों की जान बचाई जा सकती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए छात्रों ने रोहित एक्ट की तर्ज पर एक ऐसा कानून बनाने की मांग की, जो उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोक सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।
प्रदर्शनकारी सत्यम ने बताया कि केवल नियम और दिशा-निर्देश काफी नहीं हैं, बल्कि एक मजबूत संवैधानिक कानून की जरूरत है, ताकि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव होने पर उसे तुरंत न्याय मिल सके। वहीं, आईसा से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि यह आंदोलन किसी एक संस्था या वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सभी छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। अगर सरकार भेदभाव के खिलाफ कोई कानून नहीं लाती है, तो हम आगे भी अपना विरोध जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, यूजीसी के नियम उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इन नियमों पर रोक लगने से छात्रों में भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हो गई है। शिक्षा से जुड़े फैसलों में छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इस प्रदर्शन में अधिवक्ता राजेंद्र पाल गौतम, सांसद सुदामा प्रसाद, प्रोफेसर जितेंद्र मीणा और लक्ष्मण यादव समेत कई विशेष अतिथि मौजूद रहे।
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