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Delhi NCR News: मनोचिकित्सकों ने ईसीटी को बताया जीवनरक्षक
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ईसीटी को लेकर डब्लूएचओ की गाइडलाइन पर चल रही बहस
नई दिल्ली। इलेक्ट्रोकनवल्सिव थेरेपी (ईसीटी) को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की गाइडलाइन पर चल रही वैश्विक बहस अब स्थानीय स्तर तक पहुंच गई है। राजधानी के मनोचिकित्सकों का कहना है कि ईसीटी को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां हैं, जबकि यह गंभीर डिप्रेशन के मरीजों के लिए कई बार जीवनरक्षक साबित होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब दवाइयों और काउंसलिंग का असर नहीं होता या मरीज आत्महत्या के खतरे में होता है, तब ईसीटी एक प्रभावी विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जाती है। यह पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसमें मरीज को एनेस्थीसिया देकर उपचार किया जाता है। विशेषज्ञों ने इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है। संवाद
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नई दिल्ली। इलेक्ट्रोकनवल्सिव थेरेपी (ईसीटी) को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की गाइडलाइन पर चल रही वैश्विक बहस अब स्थानीय स्तर तक पहुंच गई है। राजधानी के मनोचिकित्सकों का कहना है कि ईसीटी को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां हैं, जबकि यह गंभीर डिप्रेशन के मरीजों के लिए कई बार जीवनरक्षक साबित होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब दवाइयों और काउंसलिंग का असर नहीं होता या मरीज आत्महत्या के खतरे में होता है, तब ईसीटी एक प्रभावी विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जाती है। यह पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसमें मरीज को एनेस्थीसिया देकर उपचार किया जाता है। विशेषज्ञों ने इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है। संवाद
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