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Delhi NCR News: राणा अय्यूब के हिंदू देवताओं और सावरकर पर ट्वीट्स अपमानजनक, पुलिस को तुरंत कार्रवाई का आदेश
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सोशल मीडिया पर रार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार राणा अय्यूब के 2013 से 2017 के बीच किए गए कुछ पुराने ट्वीट्स को अत्यधिक अपमानजनक, उत्तेजक और सांप्रदायिक करार दिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इन अत्यधिक अपमानजनक, उत्तेजक और सांप्रदायिक ट्वीट्स के कारण एक सक्षम अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। मामले पर तुरंत विचार की जरूरत है। दिल्ली पुलिस, एक्स और केंद्र सरकार को मिलकर कार्रवाई करनी होगी।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने वकील अमिता सचदेवा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इन ट्वीट्स के कारण एक सनातन धर्म के अनुयायी को गहरी ठेस पहुंची है और ये सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को एक्स कॉर्प को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजने का भी आदेश दिया। याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा ने कहा कि इन ट्वीट्स से हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर का अपमान हुआ है तथा एंटी-इंडिया भावना फैलाई गई है। कोर्ट ने राणा अय्यूब, एक्स और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी।
इन ट्वीट्स पर जताई थी आपत्ति
याचिका में राणा अय्यूब के निम्नलिखित ट्वीट्स का जिक्र किया गया है:
- 2013: “रावण ने सीता को छुआ तक नहीं जबकि वह कर सकता था। राम ने सीता के लिए खड़ा होने तक की कोशिश नहीं की जबकि उन्हें करना चाहिए था। रावण 1, राम 0।”
- 2014: अली सरदार जाफरी की एक कविता का हवाला देते हुए सीता और द्रौपदी का जिक्र।
- 2015: “वीर सावरकर ने हिंदुत्व राष्ट्रवाद का आवश्यक अंग बलात्कार को बताया था।”
- सावरकर पर एक और ट्वीट: “नाथूराम गोडसे के सावरकर वाले बयान को पढ़कर सोच रहा हूं कि क्या हमें आतंकवादी समर्थक का सम्मान जारी रखना चाहिए।”
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार राणा अय्यूब के 2013 से 2017 के बीच किए गए कुछ पुराने ट्वीट्स को अत्यधिक अपमानजनक, उत्तेजक और सांप्रदायिक करार दिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इन अत्यधिक अपमानजनक, उत्तेजक और सांप्रदायिक ट्वीट्स के कारण एक सक्षम अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। मामले पर तुरंत विचार की जरूरत है। दिल्ली पुलिस, एक्स और केंद्र सरकार को मिलकर कार्रवाई करनी होगी।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने वकील अमिता सचदेवा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इन ट्वीट्स के कारण एक सनातन धर्म के अनुयायी को गहरी ठेस पहुंची है और ये सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को एक्स कॉर्प को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजने का भी आदेश दिया। याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा ने कहा कि इन ट्वीट्स से हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर का अपमान हुआ है तथा एंटी-इंडिया भावना फैलाई गई है। कोर्ट ने राणा अय्यूब, एक्स और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी।
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इन ट्वीट्स पर जताई थी आपत्ति
याचिका में राणा अय्यूब के निम्नलिखित ट्वीट्स का जिक्र किया गया है:
- 2013: “रावण ने सीता को छुआ तक नहीं जबकि वह कर सकता था। राम ने सीता के लिए खड़ा होने तक की कोशिश नहीं की जबकि उन्हें करना चाहिए था। रावण 1, राम 0।”
- 2014: अली सरदार जाफरी की एक कविता का हवाला देते हुए सीता और द्रौपदी का जिक्र।
- 2015: “वीर सावरकर ने हिंदुत्व राष्ट्रवाद का आवश्यक अंग बलात्कार को बताया था।”
- सावरकर पर एक और ट्वीट: “नाथूराम गोडसे के सावरकर वाले बयान को पढ़कर सोच रहा हूं कि क्या हमें आतंकवादी समर्थक का सम्मान जारी रखना चाहिए।”