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Report: दिल्ली में गंभीर अपराध का आंकड़ा घटा... केस सुलझाने का बढ़ा, फिर भी असुरक्षित महसूस करती हैं महिलाएं

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 22 Jan 2026 01:50 AM IST
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सार

2024 की तुलना में 2025 में दिल्ली में हत्या, दुष्कर्म और अन्य जघन्य अपराधों में कमी आई है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने ताजा आंकड़े जारी किए हैं।

Report: Serious crime figures in Delhi fallen, case resolution rates risen, yet women still feel unsafe.
demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में पुलिस की सख्ती के बाद आपराधिक घटनाओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 2024 की तुलना में 2025 में दिल्ली में हत्या, दुष्कर्म और अन्य जघन्य अपराधों में कमी आई है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने ताजा आंकड़े जारी किए हैं। महिलाओं से जुड़े अन्य अपराधों में भी लगातार गिरावट देखी गई है। पुलिस की मुस्तैदी के कारण न केवल वारदातों की संख्या कम हुई है, बल्कि केस सुलझाने की दर में भी काफी सुधार हुआ है। पुलिस के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि निरंतर निगरानी, सख्त कानून व्यवस्था और तकनीकी उपायों के कारण अपराध नियंत्रण में ठोस परिणाम सामने आए हैं। हालांकि पुलिस ने आंकड़ों के माध्य्म से जो राहतकारी तस्वीर दिखाई है वह महिलाओं में सुरक्षा का भाव जगाने में वनाकाम रही है। 

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महिलाओं के प्रति अपराध में कमी आई
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध) देवेश श्रीवास्तव के मुताबिक दिल्ली में छेड़छाड़ के वर्ष 2023 में कुल 2,345 मामले दर्ज किए गए थे। यह संख्या 2024 में घटकर 2,037 रह गई। वर्ष 2025 में और कम होकर 1,708 रह गए। पुलिस ने छेड़छाड़ के कुल मामलों के 95.20 प्रतिशत सुलझाने का दावा किया। साथ ही दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार दुष्कर्म के मामलों में कमी देखी गई। वर्ष 2023 में दुष्कर्म के कुल 2,141 मामले दर्ज किए गए, वहीं वर्ष 2024 में 2,076 मामले ही दर्ज हुए। वर्ष 2025 में दुष्कर्म के मामले घटकर दो हजार से नीचे 1,901 दर्ज किए गए। पुलिस ने दावा किया है कि पिछले एक साल में दिल्ली पुलिस ने 97.11 प्रतिशत मामलों को हल किया है। ईव टीजिंग के मामले को सुलझाने का प्रतिशत भी 89.02 प्रतिशत रहा है।
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हत्या के मामलों में आई कमीवर्ष 2023 में 506 हत्या के मामले दर्ज किए गए और 2024 में यह संख्या 504 पर थी। 2025 में गिरावट के साथ यह संख्या 500 से नीचे यानी 491 पर पहुंच गई है। पुलिस ने 2025 में हत्या की 95.32 प्रतिशत घटनाओं को सुलझाने का दावा किया है।

डकैती के मामलों में भी कमी
पिछले तीन साल में डकैती के मामलों में लगातार कमी आई है। वर्ष 2023 में कुल 1,654 मामले दर्ज किए गए थे। यह आंकड़ा 2024 में घटकर 1,510 हो गया और 2025 में और घटकर 1,326 हो गया। पुलिस ने इनमें से 97 प्रतिशत मामले सुलझाए।

वर्ष 2025 में फिरौती की 212 घटनाएं भी दर्ज की गईं, जो 2024 के मुकाबले (228 केस) कम थीं। स्नैचिंग के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि 2023 में 7,886 स्नैचिंग के मामले दर्ज किए गए। यह संख्या 2024 में घटकर 6,493 हो गई और 2025 में और कम होकर 5,406 हो गई। हालांकि, 2025 में मामलों को सुलझाने की दर 64 प्रतिशत पर कम रही।

सुलझाने का प्रतिशत कम रहा
जबरन वसूली के मामलों में वर्ष 2025 में 212 केस दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 228 और 2023 में 204 मामले सामने आए थे। हालांकि इस श्रेणी में केस सलझाने की दर 63.68 प्रतिशत रही, जिसे सुधारने पर पुलिस का विशेष फोकस बताया जा रहा है। झपटमारी के मामलों में लगातार कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में 7886 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में 6493 और 2025 में घटकर 5406 रह गए. इन मामलों में 64.22 प्रतिशत का खुलासा किया गया।

विकसित राजधानी की चकाचौंध में भी महिलाएं असहज और असुरक्षित
अजीब सी निगाहों ने जीना दुश्वार कर दिया, हमने पलटकर देखना नहीं, सहना सीख लिया। किसी शायर की इस लाइन में महिलाओं का वह दर्द छिपा है जो हर जगह उन्हें असहज कर देता है। महिलाओं और युवतियों का कहना है कि दिल्ली में हमने सीख लिया है कि हर बात का जवाब जरूरी नहीं होता, कभी-कभी चुप्पी ही बचाव है। दिल्ली के कापसहेड़ा की रहने वाली गीता ने बताया कि अब कैब बुक करते समय ड्राइवर का नाम, रेटिंग देखने के बाद पापा को नंबर लाइव लोकेशन शेयर करना नहीं भूलती। मन में सवाल चलता है, कि क्या पुरुष भी ऐसे लोकेशन शेयर करते होंगे। यकीन के साथ कह सकती हूं कि नहीं...

2025 में दुष्कर्म के कुल 1901 मामले दर्ज-
बीते साल की दिल्ली क्राइम ब्रांच के आंकड़ों के तहत 2025 में महिलाओं से छेड़छाड़ के कुल 1708 मामले दिल्ली के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज किए गए हैं। घूरने, असहज करने या अपशब्द के 337 मामलें दर्ज हैं, जिसमें से 95% मामले ही सुलझे हैं, 5 % मामले अभी अटके हैं। 2025 में दुष्कर्म के कुल 1901 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 3% फीसदी मामले लंबित हैं।

मैं कैब में भी सुरक्षित महसूस नहीं करती हूं। यही वजह है कैब बुक करते समय पापा को अपनी लोकेशन भेज देती हूं। कई बार तो ऐसे कैब ड्राइवर होते हैं, जो बार-बार घूरकर हमें असहज कर देते हैं। घर के दरवाजे पर कैब पहुंचते ही राहत की सांस लेती हूं।
- निशी कुमारी, कापसहेड़ा, (लॉजिस्टिक में कार्यरत)

मेट्रो स्टेशन से निकलकर रिक्शा या रैपिडो राइडर का इंतजार करना पड़ता है, तो चेहरे पर एक अलग सा डर उभरने लगता है। बेटियों की तरह जब तक लड़कों को उनकी हद और रहने का सलीका नहीं सिखाया जाएगा तब तक कोई बदलाव नहीं होने वाला।
-सपना मिश्रा, द्वारका, (सीनियर ट्रेवल कोरडिनेटर)

ईवेंट मैनेजमेंट कंपनी चलाने के नाते, मुझे बहुत यात्रा करनी पड़ती है। लेकिन दिल्ली में मुझे कभी असुरक्षा का एहसास नहीं हुआ। हालांकि कभी-कभी कुछ लोगों की वजह से मुश्किलें आईं हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन की सतर्कता से हादसे की नौबत नहीं आई।
-शिल्पा मित्रा,लाजपत नगर, (इवेंट मैनेजमेंट कंपनी चलाती हैं)

दिल्ली के कई ऐसे इलाके हैं, जहां देर रात में सफर करना जोखिमभरा है। बदरपुर की तरफ हालात बहुत खराब हैं। वहां देर रात शराबियों का अड्डा होता है। कभी-कभी तो रिक्शा चालक भी नशे में होते हैं। चैन स्नेचिंग आम है। मैं अक्सर फोन पर पति को कनेक्ट रखती हूं।
- करिश्मा कुमारी, बदरपुर, (गृहणी)

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