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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Reports appeared normal, yet hemoglobin levels kept dropping... quick-thinking doctors save the life of a young man with a gunshot wound.

Delhi NCR News: रिपोर्ट सामान्य, फिर भी गिरता रहा हीमोग्लोबिन...डॉक्टरों की सूझबूझ से बची गोली लगे युवक की जान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 06:01 PM IST
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-खून चढ़ाने पर भी नहीं बढ़ा हीमोग्लोबिन, सीटी एंजियोग्राफी से खुला छिपी चोट का राज, स्टेंट डालकर रोका खून का रिसाव, छह महीने बाद काम पर लौटा युवक
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सिमरन
नई दिल्ली। पैर की नब्ज सामान्य थी, शुरुआती जांच में भी सब ठीक दिख रहा था, लेकिन युवक का हीमोग्लोबिन लगातार गिर रहा था। खून चढ़ाने पर भी सुधार नहीं हुआ तो सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने सीटी एंजियोग्राफी कराई। जांच में जांघ की रक्त वाहिकाओं में छिपी जानलेवा चोट का खुलासा हुआ। डॉक्टरों ने बिना बड़ी सर्जरी स्टेंट डालकर रक्तस्राव रोका और गोली लगे युवक की जान बचा ली।
28 वर्षीय युवक को बायीं जांघ के ऊपरी हिस्से में गोली लगने के बाद सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। गोली से जांघ की मुख्य हड्डी फीमर भी टूट गई थी। शुरुआती जांच में पैर गर्म था और उसकी नब्ज सामान्य थी। कलर डॉप्लर जांच में भी रक्त वाहिकाओं में कोई बड़ी गड़बड़ी सामने नहीं आई।
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केस स्टडी : गिरते हीमोग्लोबिन स्तर के साथ धड़कनें तेज होने लगीं
मरीज का हीमोग्लोबिन स्तर शुरुआत में 9.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर था। उसे एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया। इसके बावजूद हीमोग्लोबिन बढ़ने के बजाय गिरता गया। अगले दिन यह 7.3 और तीसरे दिन 6.4 ग्राम प्रति डेसीलीटर रह गया। इस दौरान मरीज की धड़कन तेज होने लगी और सांस लेने में भी परेशानी होने लगी।
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नहीं मानी हार...सीटी एंजियोग्राफी का किया फैसला
लगातार बिगड़ते संकेतों को देखते हुए डॉक्टरों ने सामान्य डॉप्लर रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय सीटी एंजियोग्राफी कराने का फैसला किया। सफदरजंग अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जीशान अहमद खलील के अनुसार, सीटी एंजियोग्राफी में धमनी और शिरा के बीच असामान्य रास्ता बनने का पता चला। इस स्थिति को आर्टीरियोवीनस फिस्टुला (एवीएफ) कहते हैं। इसके अलावा धमनी के पास थैलीनुमा उभार भी बना था, जिसे स्यूडोएन्यूरिज्म कहा जाता है। इन दोनों समस्याओं के कारण रक्तस्राव हो रहा था।

बड़ी सर्जरी के बजाय निकाला रास्ता
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण कुमार मंगल बताते हैं कि इलाज के लिए इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी और वैस्कुलर सर्जरी विशेषज्ञों की मदद ली गई। बड़ी सर्जरी के बजाय एंडोवैस्कुलर तकनीक अपनाई गई। इसमें रक्त वाहिका के भीतर से विशेष कवरयुक्त स्टेंट ग्राफ्ट डालकर असामान्य रास्ते और स्यूडोएन्यूरिज्म को बंद किया गया। इससे रक्तस्राव रुक गया और रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद मिली। इसके बाद टूटी हुई जांघ की हड्डी को रॉड और वायर की मदद से जोड़ा गया। छह महीने बाद मरीज की जांघ की हड्डी जुड़ चुकी है और घुटने तथा कूल्हे की गतिविधियां सामान्य हैं। अब वह बिना सहारे चल सकता है और अपने काम पर लौट चुका है।
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