{"_id":"6a7de294e6888e886b02bbc2","slug":"risk-of-side-effects-due-to-concealing-medication-records-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-150541-2026-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: दवाओं का रिकॉर्ड छिपाने से साइड इफेक्ट का खरता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: दवाओं का रिकॉर्ड छिपाने से साइड इफेक्ट का खरता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। शहरी व्यस्तता और जागरूकता की कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य के इलाज में अक्सर गंभीर लापरवाही देखने को मिलती है। कई बार मरीज अलग-अलग डॉक्टरों से सलाह लेते हैं, लेकिन पुरानी दवाओं का रिकॉर्ड साझा नहीं करते। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं का पूरा रिकॉर्ड न होने से दवा दोहराने और उनके खतरनाक साइड इफेक्ट का खतरा काफी बढ़ जाता है।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएचबीएएस) के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने इस बात पर जोर दिया है कि परिवार को मरीज की सभी दवाओं का एक अपडेटेड रिकॉर्ड हमेशा अपने पास रखना चाहिए। इस सूची में दवा का नाम, खुराक, समय और अवधि का स्पष्ट उल्लेख होना जरूरी है। साथ ही, हाल ही में बंद या बदली गई दवाओं की जानकारी भी नए डॉक्टर को जरूर दें।
डॉक्टरों के मुताबिक, कई साइकेट्रिक दवाएं एक साथ देना कुछ मामलों में जरूरी होता है, लेकिन इसका फैसला केवल विशेषज्ञ की निगरानी में होना चाहिए। दवाओं की संख्या बढ़ने से अत्यधिक नींद, चक्कर, बेचैनी और कंपकंपी जैसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं। इसलिए समय-समय पर दवाओं की समीक्षा बेहद जरूरी है।अक्सर परिवार के लोग दवा शुरू होने या खुराक बदलने के बाद दिखने वाले बदलावों से घबराकर खुद ही दवा बंद कर देते हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का कहना है कि खुद से दवा बंद करने के बजाय डॉक्टर को बताएं कि ये लक्षण कब से शुरू हुए। इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि यह बीमारी का लक्षण है या दवा का कोई साइड इफेक्ट। इसके अलावा, व्यवहार में अचानक आए बड़े बदलाव, अत्यधिक उत्तेजना या भ्रम जैसे गंभीर लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे संकेतों पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना आवश्यक है। सुरक्षित और सटीक उपचार के लिए दवाओं का पूरा रिकॉर्ड साझा करना और समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करना ही सबसे सही रास्ता है।
विज्ञापन
नई दिल्ली। शहरी व्यस्तता और जागरूकता की कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य के इलाज में अक्सर गंभीर लापरवाही देखने को मिलती है। कई बार मरीज अलग-अलग डॉक्टरों से सलाह लेते हैं, लेकिन पुरानी दवाओं का रिकॉर्ड साझा नहीं करते। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं का पूरा रिकॉर्ड न होने से दवा दोहराने और उनके खतरनाक साइड इफेक्ट का खतरा काफी बढ़ जाता है।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएचबीएएस) के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने इस बात पर जोर दिया है कि परिवार को मरीज की सभी दवाओं का एक अपडेटेड रिकॉर्ड हमेशा अपने पास रखना चाहिए। इस सूची में दवा का नाम, खुराक, समय और अवधि का स्पष्ट उल्लेख होना जरूरी है। साथ ही, हाल ही में बंद या बदली गई दवाओं की जानकारी भी नए डॉक्टर को जरूर दें।
विज्ञापन
डॉक्टरों के मुताबिक, कई साइकेट्रिक दवाएं एक साथ देना कुछ मामलों में जरूरी होता है, लेकिन इसका फैसला केवल विशेषज्ञ की निगरानी में होना चाहिए। दवाओं की संख्या बढ़ने से अत्यधिक नींद, चक्कर, बेचैनी और कंपकंपी जैसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं। इसलिए समय-समय पर दवाओं की समीक्षा बेहद जरूरी है।अक्सर परिवार के लोग दवा शुरू होने या खुराक बदलने के बाद दिखने वाले बदलावों से घबराकर खुद ही दवा बंद कर देते हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का कहना है कि खुद से दवा बंद करने के बजाय डॉक्टर को बताएं कि ये लक्षण कब से शुरू हुए। इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि यह बीमारी का लक्षण है या दवा का कोई साइड इफेक्ट। इसके अलावा, व्यवहार में अचानक आए बड़े बदलाव, अत्यधिक उत्तेजना या भ्रम जैसे गंभीर लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे संकेतों पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना आवश्यक है। सुरक्षित और सटीक उपचार के लिए दवाओं का पूरा रिकॉर्ड साझा करना और समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करना ही सबसे सही रास्ता है।