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Delhi NCR News: अमेरिकी नागरिकों से ठगी के आरोप में गिरफ्तार सात आरोपियों को जमानत
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- अदालत ने आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट ने अमेरिका के नागरिकों से ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार सात लोगों को जमानत दे दी है। इन पर एप्पल कंपनी के नाम पर फर्जी तकनीकी सहायता कॉल सेंटर चलाकर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया था। दिल्ली पुलिस ने इस कथित गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रियंका राजपूत की अदालत ने सभी आरोपियों को राहत देते हुए कहा कि मामले की जांच मुख्य रूप से दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित है। ऐसे में, आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखने की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है। अदालत ने दीपांशु, मयंक कुमार, अमन प्रसाद, करण कपूर, मयंक, आनन सिंह और जनप्रीत सिंह को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि अब तक की जांच में आरोपियों के कथित खुलासा बयानों के अलावा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी वास्तव में किसी अवैध कॉल सेंटर का संचालन कर रहे थे या किसी अमेरिकी नागरिक के साथ ठगी हुई है।
जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि इस मामले में अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई से जवाब का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें समय लग सकता है। एफबीआई से जानकारी मिलने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि वास्तव में कोई पीड़ित है या पैसों का लेन-देन हुआ है या नहीं। अदालत के अनुसार, जब तक इस संबंध में ठोस साक्ष्य सामने नहीं आते, तब तक आरोपियों को जेल में रखना उचित नहीं है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट ने अमेरिका के नागरिकों से ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार सात लोगों को जमानत दे दी है। इन पर एप्पल कंपनी के नाम पर फर्जी तकनीकी सहायता कॉल सेंटर चलाकर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया था। दिल्ली पुलिस ने इस कथित गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रियंका राजपूत की अदालत ने सभी आरोपियों को राहत देते हुए कहा कि मामले की जांच मुख्य रूप से दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित है। ऐसे में, आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखने की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है। अदालत ने दीपांशु, मयंक कुमार, अमन प्रसाद, करण कपूर, मयंक, आनन सिंह और जनप्रीत सिंह को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि अब तक की जांच में आरोपियों के कथित खुलासा बयानों के अलावा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी वास्तव में किसी अवैध कॉल सेंटर का संचालन कर रहे थे या किसी अमेरिकी नागरिक के साथ ठगी हुई है।
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जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि इस मामले में अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई से जवाब का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें समय लग सकता है। एफबीआई से जानकारी मिलने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि वास्तव में कोई पीड़ित है या पैसों का लेन-देन हुआ है या नहीं। अदालत के अनुसार, जब तक इस संबंध में ठोस साक्ष्य सामने नहीं आते, तब तक आरोपियों को जेल में रखना उचित नहीं है।