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TB Eradication: 2025 तक टीबी मुक्ति का था सपना, 2026 में भी अधूरा; दिल्ली में अब भी आ रहे हैं तपेदिक के मरीज

सोनम प्रतिहस्त, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 15 Jan 2026 02:56 AM IST
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सार

इंडिया टीबी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का टीबी स्कोर 82 दर्ज हुआ है, जो दर्शाता है कि बीमारी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है।

TB eradication by 2025 remains unfulfilled even in 2026; tuberculosis patients are still arriving in Delhi.
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विस्तार
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देश में 2025 तक टीबी के उन्मूलन का लक्ष्य तय हुआ था, लेकिन राजधानी में अब भी तपेदिक के मरीज सामने आ रहे हैं। इंडिया टीबी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का टीबी स्कोर 82 दर्ज हुआ है, जो दर्शाता है कि बीमारी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी आबादी का दबाव, झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में भीड़-भाड़ और देर से इलाज शुरू होना इसके प्रमुख कारण हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक टीबी नियंत्रण के लिए निजी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए पेशेंट प्रोवाइडर सपोर्ट सिस्टम की व्यवस्था की गई है। दिल्ली में 25 जिलों को पेशेंट प्रोवाइडर सपोर्ट सिस्टम के लिए मंजूरी तो मिली है, लेकिन एक भी जिला पूरी तरह कार्यशील नहीं है। इससे निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की समय पर सूचना, फॉलोअप और इलाज की निगरानी प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर टीबी नियंत्रण पर हो रहा है।
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पूर्वी दिल्ली स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ प्रवीण कुमार ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है। यह माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्यूलोसिस नाम के बैक्टीरिया से होती है। टीबी में वृद्धि की बड़ी वजह यह कि मरीजों द्वारा शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना है। लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखने के बावजूद लोग जांच नहीं कराते, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है।

उन्होंने कहा की टीबी के इलाज में सबसे अहम है दवाओं का पूरा कोर्स करना। कई मरीज बीच में ही दवा छोड़ देते हैं, जिससे दवा प्रतिरोधी टीबी का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, नियमित दवा और पोषणयुक्त आहार से टीबी से राहत मिल सकती है।

स्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। खांसी या बुखार दो सप्ताह से अधिक रहने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। टीबी मरीजों को मास्क का इस्तेमाल, साफ-सफाई और परिवार के अन्य सदस्यों की जांच कराना जरूरी है। जब तक दिल्ली में जांच, इलाज और निगरानी व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करना चुनौती बना रहेगा।

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