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Delhi NCR News: जेएनयू में वार्ड कोटा को लेकर नहीं खत्म हो रहा विवाद
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-जेएनयू शिक्षक संघ ने कुलगुरु की बेटी के विश्वविद्यालय में पढ़ाने को लेकर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों को यूजी और पीजी कार्यक्रम में दाखिला के लिए सुपरन्यूमेरी कोटा पांच फीसदी निर्धारित करने के मामले को लेकर विवाद खत्म नहीं हो रहा है। जेएनयू शिक्षक संघ ने जीबीएम में वार्ड कोटा को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और विश्वविद्यालय की समावेशी प्रवेश नीति के खिलाफ बताया।
जेएनयू शिक्षक संघ अध्यक्ष सैयद अख्तर हुसैन और सचिव अविनाश कुमार के अनुसार यह निर्णय बिना शिक्षकों के परामर्श के कार्यकारी परिषद में कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित ने लिया। शिक्षकों ने कभी ऐसी सुविधा की मांग नहीं की और यह कदम विशेषाधिकार को बढ़ावा देने वाला है। जेएनयू की पहचान उसकी डिप्राइवेशन पॉइंट्स सिस्टम जैसी नीतियों से है जो सामाजिक, आर्थिक और क्षेत्रीय रूप से वंचित छात्रों को अवसर देती हैं। ऐसे में शिक्षकों के बच्चों के लिए कोटा लागू करना मूल भावना के विरुद्ध है।
फैसले से गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों के लिए पहले से मौजूद सीटों पर असर पड़ सकता है। इस निर्णय को चुनौती देंगे और तुरंत वापस लेने की मांग करते है। साथ ही पूरे मामले को शिक्षा मंत्रालय व विश्वविद्यालय के विजिटर के सामने उठाया जाएगा। इसके अलावा शिक्षक संघ ने आरोप लगाते हुए कुलगुरु की बेटी के इंजीनियरिंग स्कूल में पढ़ाने को लेकर भी सवाल उठाए है। संघ के अनुसार उनकी बेटी बिना किसी उचित प्रक्रिया के नियुक्त हुए एक संकाय सदस्य के रूप में प्रभावी रूप से काम कर रही है। इसकी पुष्टि न केवल इंजीनियरिंग स्कूल की वेबसाइट पर प्रसारित समय-सारणी जैसे दस्तावेजों से होती है बल्कि उनकी बेटी द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए गए स्वयं के बयान से भी होती है। यहां तक कि उनकी बेटी जेएनयू प्रतिनिधिमंडलों के साथ विदेश यात्रा में भाग लेने जाती है।
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नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों को यूजी और पीजी कार्यक्रम में दाखिला के लिए सुपरन्यूमेरी कोटा पांच फीसदी निर्धारित करने के मामले को लेकर विवाद खत्म नहीं हो रहा है। जेएनयू शिक्षक संघ ने जीबीएम में वार्ड कोटा को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और विश्वविद्यालय की समावेशी प्रवेश नीति के खिलाफ बताया।
जेएनयू शिक्षक संघ अध्यक्ष सैयद अख्तर हुसैन और सचिव अविनाश कुमार के अनुसार यह निर्णय बिना शिक्षकों के परामर्श के कार्यकारी परिषद में कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित ने लिया। शिक्षकों ने कभी ऐसी सुविधा की मांग नहीं की और यह कदम विशेषाधिकार को बढ़ावा देने वाला है। जेएनयू की पहचान उसकी डिप्राइवेशन पॉइंट्स सिस्टम जैसी नीतियों से है जो सामाजिक, आर्थिक और क्षेत्रीय रूप से वंचित छात्रों को अवसर देती हैं। ऐसे में शिक्षकों के बच्चों के लिए कोटा लागू करना मूल भावना के विरुद्ध है।
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फैसले से गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों के लिए पहले से मौजूद सीटों पर असर पड़ सकता है। इस निर्णय को चुनौती देंगे और तुरंत वापस लेने की मांग करते है। साथ ही पूरे मामले को शिक्षा मंत्रालय व विश्वविद्यालय के विजिटर के सामने उठाया जाएगा। इसके अलावा शिक्षक संघ ने आरोप लगाते हुए कुलगुरु की बेटी के इंजीनियरिंग स्कूल में पढ़ाने को लेकर भी सवाल उठाए है। संघ के अनुसार उनकी बेटी बिना किसी उचित प्रक्रिया के नियुक्त हुए एक संकाय सदस्य के रूप में प्रभावी रूप से काम कर रही है। इसकी पुष्टि न केवल इंजीनियरिंग स्कूल की वेबसाइट पर प्रसारित समय-सारणी जैसे दस्तावेजों से होती है बल्कि उनकी बेटी द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए गए स्वयं के बयान से भी होती है। यहां तक कि उनकी बेटी जेएनयू प्रतिनिधिमंडलों के साथ विदेश यात्रा में भाग लेने जाती है।

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