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Delhi NCR News: 2027 तक अधिकतर जल निकायों का होगा पुनरुद्धार
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-असोला भाटी में विश्व वेटलैंड्स दिवस पर बोले पर्यावरण मंत्री
-नीली झील को रामसर साइट बनाने की तैयारी, रिज फॉरेस्ट में लगेंगे 35 लाख पौधे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
सरकार ने दिल्ली के जल स्रोतों को फिर से जीवित करने का लक्ष्य तय किया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि साल 2027 के अंत तक दिल्ली के अधिकतर जल निकायों का पुनरुद्धार किया जाएगा। उन्होंने कहा, वेटलैंड्स का संरक्षण सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि दिल्ली के भविष्य और जल सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।
विश्व वेटलैंड्स दिवस के अवसर पर असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। एक समय दिल्ली में एक हजार से अधिक तालाब, झीलें और अन्य जल निकाय मौजूद थे, लेकिन अतिक्रमण और वर्षों की उपेक्षा के कारण इनमें से अधिकांश या तो सूख गए या खत्म हो गए। सरकार इस स्थिति को बदलेगी। 2027 तक अधिकतम जल निकायों को पूरी तरह बहाल करेंगे। पुराने तालाबों, झीलों और वेटलैंड्स की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से पुनर्जीवित किया जा रहा है। असोला भाटी स्थित ऐतिहासिक नीली झील को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए रामसर साइट घोषित कराने की प्रक्रिया केंद्र सरकार के सहयोग से तेजी से चल रही है।
दिल्ली रिज राजधानी की जीवनरेखा
मंत्री ने दिल्ली रिज को राजधानी की जीवनरेखा बताया। कई दशकों के बाद पहली बार करीब 10 हजार एकड़ भूमि को रिज फॉरेस्ट घोषित किया गया है। इसके लिए एक वर्किंग प्लान तैयार किया जा रहा है, जहां अगले चार साल में करीब 35 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
वेटलैंड्स प्राकृतिक फिल्टर
मंत्री ने कहा, वेटलैंड्स प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करते हैं। वायु व जल प्रदूषण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सरकार नई तकनीकों पर भी काम कर रही है, जिनके जरिए जल स्रोतों के आसपास पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषक कणों को कम किया जा सके। मंत्री ने कूड़े के पहाड़ों की जानकारी दी। दिल्ली की 202 एकड़ लैंडफिल साइट्स में से 45 एकड़ जमीन खाली हुई है। बायो माइनिंग से कचरे से ईंधन, अन्य उपयोगी सामग्री बनाई जा रही। 2027 तक दिल्ली को कूड़े के पहाड़ों से मुक्त करने की योजना है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
सरकार ने दिल्ली के जल स्रोतों को फिर से जीवित करने का लक्ष्य तय किया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि साल 2027 के अंत तक दिल्ली के अधिकतर जल निकायों का पुनरुद्धार किया जाएगा। उन्होंने कहा, वेटलैंड्स का संरक्षण सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि दिल्ली के भविष्य और जल सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।
विश्व वेटलैंड्स दिवस के अवसर पर असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। एक समय दिल्ली में एक हजार से अधिक तालाब, झीलें और अन्य जल निकाय मौजूद थे, लेकिन अतिक्रमण और वर्षों की उपेक्षा के कारण इनमें से अधिकांश या तो सूख गए या खत्म हो गए। सरकार इस स्थिति को बदलेगी। 2027 तक अधिकतम जल निकायों को पूरी तरह बहाल करेंगे। पुराने तालाबों, झीलों और वेटलैंड्स की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से पुनर्जीवित किया जा रहा है। असोला भाटी स्थित ऐतिहासिक नीली झील को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए रामसर साइट घोषित कराने की प्रक्रिया केंद्र सरकार के सहयोग से तेजी से चल रही है।
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दिल्ली रिज राजधानी की जीवनरेखा
मंत्री ने दिल्ली रिज को राजधानी की जीवनरेखा बताया। कई दशकों के बाद पहली बार करीब 10 हजार एकड़ भूमि को रिज फॉरेस्ट घोषित किया गया है। इसके लिए एक वर्किंग प्लान तैयार किया जा रहा है, जहां अगले चार साल में करीब 35 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
वेटलैंड्स प्राकृतिक फिल्टर
मंत्री ने कहा, वेटलैंड्स प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करते हैं। वायु व जल प्रदूषण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सरकार नई तकनीकों पर भी काम कर रही है, जिनके जरिए जल स्रोतों के आसपास पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषक कणों को कम किया जा सके। मंत्री ने कूड़े के पहाड़ों की जानकारी दी। दिल्ली की 202 एकड़ लैंडफिल साइट्स में से 45 एकड़ जमीन खाली हुई है। बायो माइनिंग से कचरे से ईंधन, अन्य उपयोगी सामग्री बनाई जा रही। 2027 तक दिल्ली को कूड़े के पहाड़ों से मुक्त करने की योजना है।
