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Delhi NCR News: 108वीं वर्षगांठ पर युद्ध सम्मेलन को याद कर भावुक हुआ सदन
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विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों को दी श्रद्धांजलि
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को याद करते हुए भावुक माहौल देखने को मिला। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में 1918 के ऐतिहासिक युद्ध सम्मेलन और प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान पर विस्तार से वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि 28 अप्रैल 1918 को इसी ऐतिहासिक चैंबर में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड की अध्यक्षता में युद्ध सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसमें देशभर से करीब 120 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। सम्मेलन का विषय प्रथम विश्वयुद्ध में भारत की भूमिका था।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह सम्मेलन केवल सैनिक भर्ती का मंच नहीं था, बल्कि इसलिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि महात्मा गांधी ने इसमें भाग लेकर ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति भारत के सहयोग का समर्थन किया था। महात्मा गांधी को विश्वास था कि युद्ध में भारत की निष्ठा का प्रतिफल स्वराज के रूप में मिलेगा। लेकिन इसके बदले भारत को रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग जैसे काले अध्याय मिले। उन्होंने बताया कि करीब 13 लाख भारतीय सैनिकों ने प्रथम विश्वयुद्ध में भाग लिया, जिनमें 74 हजार से अधिक वीरों ने अपने प्राण न्यौछावर किए। अध्यक्ष ने इन सैनिकों को अनाम नायक बताते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के रूप में उन्हें याद करना और श्रद्धांजलि देना हमारा कर्तव्य है। विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा भवन के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1912 में निर्मित पुराना सचिवालय केवल भवन नहीं, बल्कि भारत के संसदीय इतिहास का जन्मस्थल है। 1913 में इसी चैम्बर में केंद्रीय विधायी परिषद की पहली बैठक हुई थी, जहां गोपाल कृष्ण गोखले, मदन मोहन मालवीय और लाला लाजपत राय जैसे महान नेताओं की आवाज गूंजी थी। उन्होंने घोषणा की कि 30 अप्रैल 2026 को दिल्ली विधानसभा परिसर में युद्ध सम्मेलन की 108वीं वर्षगांठ पर विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी. के. सिंह मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम में युद्ध सम्मेलन की कार्यवाही पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को याद करते हुए भावुक माहौल देखने को मिला। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में 1918 के ऐतिहासिक युद्ध सम्मेलन और प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान पर विस्तार से वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि 28 अप्रैल 1918 को इसी ऐतिहासिक चैंबर में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड की अध्यक्षता में युद्ध सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसमें देशभर से करीब 120 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। सम्मेलन का विषय प्रथम विश्वयुद्ध में भारत की भूमिका था।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह सम्मेलन केवल सैनिक भर्ती का मंच नहीं था, बल्कि इसलिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि महात्मा गांधी ने इसमें भाग लेकर ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति भारत के सहयोग का समर्थन किया था। महात्मा गांधी को विश्वास था कि युद्ध में भारत की निष्ठा का प्रतिफल स्वराज के रूप में मिलेगा। लेकिन इसके बदले भारत को रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग जैसे काले अध्याय मिले। उन्होंने बताया कि करीब 13 लाख भारतीय सैनिकों ने प्रथम विश्वयुद्ध में भाग लिया, जिनमें 74 हजार से अधिक वीरों ने अपने प्राण न्यौछावर किए। अध्यक्ष ने इन सैनिकों को अनाम नायक बताते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के रूप में उन्हें याद करना और श्रद्धांजलि देना हमारा कर्तव्य है। विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा भवन के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1912 में निर्मित पुराना सचिवालय केवल भवन नहीं, बल्कि भारत के संसदीय इतिहास का जन्मस्थल है। 1913 में इसी चैम्बर में केंद्रीय विधायी परिषद की पहली बैठक हुई थी, जहां गोपाल कृष्ण गोखले, मदन मोहन मालवीय और लाला लाजपत राय जैसे महान नेताओं की आवाज गूंजी थी। उन्होंने घोषणा की कि 30 अप्रैल 2026 को दिल्ली विधानसभा परिसर में युद्ध सम्मेलन की 108वीं वर्षगांठ पर विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी. के. सिंह मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम में युद्ध सम्मेलन की कार्यवाही पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा।
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