DPCC Report: वजीराबाद डैम से आगे बढ़ते ही दम तोड़ने लगती है यमुना, आईएसबीटी से ओखला आने तक तक ऑक्सीजन गायब
नदी के शुद्धीकरण के सरकारी दावों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए रिपोर्ट बताती है कि वजीराबाद डैम के बाद नदी के पानी की गुणवत्ता तेजी से गिरी है। इसमें गिरने वाले नालों में भी प्रदूषक बढ़े हैं। बैराज के बाद यमुना के पानी में जलीय जीवों का जीवित रहना भी मुमकिन नहीं है।
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यमुना नदी की सेहत बेहद खराब है। इसकी गवाही बृहस्पतिवार को आई दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की रिपोर्ट देती है। नदी के शुद्धीकरण के सरकारी दावों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए रिपोर्ट बताती है कि वजीराबाद डैम के बाद नदी के पानी की गुणवत्ता तेजी से गिरी है। इसमें गिरने वाले नालों में भी प्रदूषक बढ़े हैं। बैराज के बाद यमुना के पानी में जलीय जीवों का जीवित रहना भी मुमकिन नहीं है।
डीपीसीसी की रिपोर्ट के अनुसार, आईटीओ ब्रिज, निजामुद्दीन ब्रिज, ओखला बैराज और असगरपुर में पानी में घुली ऑक्सीजन (डीओ) शून्य मिला। ऐसे में विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में ऑक्सीजन का शून्य स्तर यह बताता है कि वहां मछलियां और अन्य जलीय जीव जीवित नहीं रह सकते हैं। रिपोर्ट में फीकल कोलीफॉर्म (मानव मल से पैदा होता है बैक्टीरिया) का स्तर बेहद डराने वाला है। यह बैक्टीरिया पेट और अन्य संक्रामक बीमारियों का कारण बन सकता है। एमपीएन (मोस्ट प्रोबेबल नंबर) पानी में मौजूद मलजनित (फीकल) बैक्टीरिया की अनुमानित संख्या को दर्शाने वाली वैज्ञानिक माप है।
निर्धारित मानकों के अनुसार, स्नान के लिए उपयुक्त नदी के पानी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 100 मिलीलीटर पानी में 500 एमपीएन से कम होनी चाहिए। यदि यह मात्रा 2500 एमपीएन/ प्रति 100 मिलीलीटर से अधिक हो जाए, तो उस पानी को स्नान के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता। हकीकत यह है कि दिल्ली में यमुना में कई जगह इसकी मात्रा निर्धारित सीमा से 260 से लेकर 660 गुना तक अधिक है।
फीकल कोलीफॉर्म के आंकड़े भयावह
स्थान मात्रा
- आईएसबीटी ब्रिज 1,30,000
- ओखला बैराज 1,40,000
- असगरपुर 330000
- आईटीओ ब्रिज 120000
- निजामुद्दीन ब्रिज 110000
- हिंडन कट 92000
प्रति 100 मिलीलीटर पानी में मौजूद मलजनित बैक्टीरिया की संख्या।
पानी में मौजूद ऑक्सीजन की स्थिति भी रही खराब
पानी में मौजूद ऑक्सीजन (बीओडी) पल्ला में सबसे सही रही। डीपीसीसी के तय मानक के अनुसार, यह तीन मिलीग्राम प्रति लीटर या उससे कम होनी चाहिए। ऐसे में वजीराबाद में चार, आईटीओ ब्रिज पर 42, निजामुद्दीन ब्रिज पर 40, हिंडन कट में 30, ओखला बैराज में 46 रही। सबसे खराब स्थिति हरियाणा के असगरपुर किडवाली क्षेत्र में दर्ज की गई। यहां बीओडी 60 मिलीग्राम प्रति लीटर है।
दिल्ली के नाले रोज यमुना में उगल रहे जहर
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के 34 नाले सीधे यमुना और आगरा कैनाल में प्रदूषित पानी छोड़ रहे हैं। इनमें कई नालों का पानी निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक प्रदूषित पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार नालों के पानी में बीओडी का स्तर सबसे बड़ी चिंता का विषय है। मानक के अनुसार, यह स्तर 30 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन जांच में कई नालों में यह सीमा चार गुना से भी ज्यादा पाई गई। सबसे खराब स्थिति मुंगेशपुर नाले की रही, जहां बीओडी 140 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया।
बीओडी मानक से चार गुना अधिक
रिपोर्ट के अनुसार, बीओडी का स्तर बुपानिया नाले में 135, तुगलकाबाद नाले में 130, सप्लिमेंट्री, डीडी-6 और एल-3 नालों में 110 से 120 और शाहदरा नाले में 105 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला। रिपोर्ट में सामने आया है कि सभी 34 नालों में लगातार पानी नहीं बह रहा है। पहले समूह के 22 में से 10 नाले में नो फ्लो यानी पानी का बहाव नहीं मिला, जबकि दूसरे समूह के 17 में से दो नाले में भी पानी नहीं था। इस तरह कुल 12 नाले फिलहाल सूखे पाए गए। रासायनिक प्रदूषण के मामले में भी हालात चिंताजनक हैं। रिपोर्ट के अनुसार सीओडी का मानक 250 मिलीग्राम प्रति लीटर है, लेकिन मुंगेशपुर नाले में यह 360, बुपानिया में 328 और तुगलकाबाद नाले में 292 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। सीओडी का अधिक होना पानी में रासायनिक कचरे की अधिक मात्रा को दर्शाता है। इसके अलावा पानी में मौजूद ठोस गंदगी के कण (टीएसएस) यानी पानी में मौजूद ठोस गंदगी के कणों का स्तर भी 100 मिलीग्राम प्रति लीटर के मानक से दो से तीन गुना अधिक पाया गया।