{"_id":"69ac365a3edf1794010096bc","slug":"ugc-regulation-draft-protest-case-delhi-police-seeks-more-time-from-court-for-investigation-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-126771-2026-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूजीसी रेगुलेशन ड्राफ्ट विरोध मामला : दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से जांच के लिए और समय मांगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूजीसी रेगुलेशन ड्राफ्ट विरोध मामला : दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से जांच के लिए और समय मांगा
विज्ञापन
विज्ञापन
राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, अखिलेश यादव, ए राजा और कनिमोझी सहित कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
यूजीसी रेगुलेशन ड्राफ्ट के विरोध से जुड़े एक मामले में दिल्ली पुलिस ने राउज एवेन्यू कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए जांच के लिए समय मांगा है।मामला 2025 में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। इस मामले में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, अखिलेश यादव, ए राजा और कनिमोझी सहित कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है। शनिवार को हुई सुनवाई में लिंक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार की अदालत में दिल्ली पुलिस ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की और जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।
इससे पहले कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से सवाल किया था कि जिन आरोपियों को जांच में शामिल होना था, उन्हें नोटिस क्यों नहीं भेजे गए। अदालत ने यह भी पूछा था कि 10 आरोपियों को नोटिस दिए बिना ही उनके खिलाफ पुलिस रिपोर्ट कैसे दाखिल कर दी गई। पिछली सुनवाई 19 फरवरी को हुई थी, जिसमें एसीजेएम पारस दलाल ने कहा था कि चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया है। अदालत ने पाया था कि इनमें से सिर्फ एक आरोपी सीवीएमपी एझिलारसन को जांच में शामिल होने के लिए ईमेल के जरिये नोटिस भेजा था। हालांकि वह जांच में शामिल नहीं हुए, लेकिन इसके बाद उन्हें शामिल कराने के लिए जांच अधिकारी ने कोई और कदम नहीं उठाया।
कोर्ट ने यह भी देखा कि बाकी 10 आरोपियों को जांच में शामिल होने के लिए कोई नोटिस ही जारी नहीं किया। अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि जांच अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले और दिल्ली पुलिस के 2020 के स्टैंडिंग ऑर्डर का पालन नहीं किया। अदालत ने तब थाना प्रभारी (एसएचओ) और सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) को निर्देश दिया था कि वे इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें कि बिना नोटिस दिए आरोपियों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट किस आधार पर दाखिल की गई। कोर्ट ने यह भी कहा था कि एसएचओ और एसीपी यह स्पष्ट करें कि किस नियम, गाइडलाइंस या आदेश के तहत जांच में शामिल हुए बिना ही आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दायर की जा सकती है। साथ ही निर्देश दिया गया था कि यह रिपोर्ट पहले नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त को भेजी जाए और उसके बाद अदालत में दाखिल की जाए।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
यूजीसी रेगुलेशन ड्राफ्ट के विरोध से जुड़े एक मामले में दिल्ली पुलिस ने राउज एवेन्यू कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए जांच के लिए समय मांगा है।मामला 2025 में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। इस मामले में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, अखिलेश यादव, ए राजा और कनिमोझी सहित कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है। शनिवार को हुई सुनवाई में लिंक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार की अदालत में दिल्ली पुलिस ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की और जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।
इससे पहले कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से सवाल किया था कि जिन आरोपियों को जांच में शामिल होना था, उन्हें नोटिस क्यों नहीं भेजे गए। अदालत ने यह भी पूछा था कि 10 आरोपियों को नोटिस दिए बिना ही उनके खिलाफ पुलिस रिपोर्ट कैसे दाखिल कर दी गई। पिछली सुनवाई 19 फरवरी को हुई थी, जिसमें एसीजेएम पारस दलाल ने कहा था कि चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया है। अदालत ने पाया था कि इनमें से सिर्फ एक आरोपी सीवीएमपी एझिलारसन को जांच में शामिल होने के लिए ईमेल के जरिये नोटिस भेजा था। हालांकि वह जांच में शामिल नहीं हुए, लेकिन इसके बाद उन्हें शामिल कराने के लिए जांच अधिकारी ने कोई और कदम नहीं उठाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट ने यह भी देखा कि बाकी 10 आरोपियों को जांच में शामिल होने के लिए कोई नोटिस ही जारी नहीं किया। अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि जांच अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले और दिल्ली पुलिस के 2020 के स्टैंडिंग ऑर्डर का पालन नहीं किया। अदालत ने तब थाना प्रभारी (एसएचओ) और सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) को निर्देश दिया था कि वे इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें कि बिना नोटिस दिए आरोपियों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट किस आधार पर दाखिल की गई। कोर्ट ने यह भी कहा था कि एसएचओ और एसीपी यह स्पष्ट करें कि किस नियम, गाइडलाइंस या आदेश के तहत जांच में शामिल हुए बिना ही आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दायर की जा सकती है। साथ ही निर्देश दिया गया था कि यह रिपोर्ट पहले नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त को भेजी जाए और उसके बाद अदालत में दाखिल की जाए।