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West Asia Crisis: दिल्ली के बाजारों में युद्ध का असर, इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगा; बासमती चावल के दाम गिरे

सचिन कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 08 Mar 2026 02:20 AM IST
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सार

पश्चिमी एशिया के देशों से आने वाले सामान की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण व्यापारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

West Asia Crisis: Impact of war on Delhi markets
सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब दिल्ली के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। पश्चिमी एशिया के देशों से आने वाले सामान की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण व्यापारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। युद्ध के कारण पश्चिमी एशिया और खासकर ईरान से आयात और निर्यात होने वाली वस्तुओं पर प्रभाव पड़ सकता है। व्यापारियों के मुताबिक, आयात में देरी, परिवहन खर्च बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने के कारण बाजार में कई उत्पादों की कमी देखने को मिल रही है। दिल्ली के थोक और खुदरा बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कॉस्मेटिक उत्पाद और कुछ खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता कम हो गई है। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है और कई दुकानदारों को ग्राहकों को संतुष्ट करना भी मुश्किल हो रहा है।

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ईरान से आयात होने वाली वस्तुएं

  • काओ लिन- यह एक प्रकार की सफेद मिट्टी होती है जिसका उपयोग सिरेमिक, टाइल, कागज और कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। आपूर्ति प्रभावित होने से इन उद्योगों की लागत बढ़ सकती है।
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  • रॉ वूल / टैनरी वूल - यह बिना प्रोसेस की गई ऊन होती है, जिसका इस्तेमाल कपड़ा उद्योग और चमड़ा उद्योग में किया जाता है। इसकी कमी से ऊनी धागे और कपड़ों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
  • अनवॉश्ड शीप जेट ब्लैक टैनरी रॉ वूल- यह भेड़ों से प्राप्त कच्ची ऊन का विशेष प्रकार है, जिसका इस्तेमाल ऊनी वस्त्र और औद्योगिक उत्पाद बनाने में होता है।
  • इंडस्ट्रियल क्रश्ड रॉक सॉल्ट- औद्योगिक उपयोग के लिए इस्तेमाल होने वाला नमक, जिसका उपयोग रसायन उद्योग, पानी शुद्धिकरण और कुछ खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में होता है।
  • ऊनी धागा- इससे स्वेटर, शॉल और अन्य ऊनी कपड़े बनाए जाते हैं। आपूर्ति घटने से कपड़ा उद्योग प्रभावित हो सकता है।
  • वेट डेट्स / ईरानी खजूर- ईरान के खजूर दुनिया में काफी प्रसिद्ध हैं। इनका उपयोग सीधे खाने के अलावा मिठाइयों और खाद्य उद्योग में भी होता है।
  • इंडस्ट्रियल रॉक सॉल्ट- बड़े क्रिस्टल वाले नमक का उपयोग पशु आहार, औद्योगिक प्रक्रियाओं और कुछ रासायनिक उद्योगों में किया जाता है।
  • बादाम गिरी- यह सूखा मेवा है जिसका उपयोग मिठाइयों, बेकरी और हेल्थ फूड में होता है। आपूर्ति कम होने से कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • पियारोम खजूर- यह ईरान की एक प्रीमियम किस्म का खजूर है, जिसकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक रहती है।
  • पिस्ता की गिरी- पिस्ता का उपयोग मिठाई, आइसक्रीम और स्नैक्स उद्योग में किया जाता है। युद्ध के कारण इसकी कीमतों में तेजी आ सकती है।

ईरान को भारत से निर्यात होने वाली वस्तुएं

  • इंडियन बासमती 1121 सेला राइस-भारत का प्रीमियम बासमती चावल, जिसकी पश्चिम एशिया के देशों में काफी मांग है।
  • इंडियन फ्रेश केला-भारत से ताजा केले का निर्यात कई देशों में किया जाता है, जिनमें पश्चिम एशिया भी शामिल है।
  • हल्दी-मसाले- औषधीय गुणों के कारण हल्दी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग है।
  • डेल्टामेथ्रिन- यह एक कीटनाशक रसायन है जिसका उपयोग कृषि में कीट नियंत्रण के लिए किया जाता है।
  • कॉपर सल्फेट- यह रासायनिक यौगिक कृषि, जल शुद्धिकरण और औद्योगिक उपयोग में काम आता है।
  • पेशेंट फीडिंग कप- अस्पतालों में मरीजों को दवा या तरल पदार्थ देने के लिए इस्तेमाल होने वाला चिकित्सा उपकरण।
  • ब्लैक टी- भारत की काली चाय विश्वभर में प्रसिद्ध है और कई देशों को निर्यात की जाती है।
  • ग्लास आर्टवेयर- कांच से बने सजावटी और उपयोगी सामान, जिनकी विदेशी बाजारों में मांग रहती है।
  • एनिमल फीड सप्लीमें- पशुओं के पोषण के लिए बनाए जाने वाले विशेष आहार पूरक।
  • चीनी और गुड़- भारत से चीनी और गुड़ का निर्यात भी कई देशों में किया जाता है, जिसका उपयोग खाद्य उद्योग में होता है।

युद्ध के कारण चावल के दाम गिरे
इजराइल-ईरान युद्ध का असर खासकर बासमती चावल के निर्यात पर इसका गंभीर असर पड़ा है। मध्य पूर्व के बाजार लगभग बंद हो जाने से दिल्ली के नए बाजार से चावल की सप्लाई रुक गई है और कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है। दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश गुप्ता के मुताबिक, मिडिल ईस्ट का बाजार पिछले कुछ दिनों से लगभग ठप है।

इलेक्ट्रॉनिक सामान की आपूर्ति प्रभावित
राजधानी के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में मोबाइल एक्सेसरीज, कंप्यूटर पार्ट्स और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आपूर्ति धीमी पड़ गई है। व्यापारियों ने कहा कि उत्पादों के कई पुर्जे विदेशों से आयात किए जाते हैं और युद्ध की स्थिति के कारण शिपमेंट समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। व्यापारी ऋषि ने बताया कि पहले जो सामान 10 से 12 दिन में आ जाता था अब उसे आने में 30 दिन या उससे ज्यादा लग रहा है। माल देर से आने और परिवहन खर्च बढ़ने से कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के दाम हाल के दिनों में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे बिक्री भी प्रभावित हो रही है।

मशीनों के पुर्जों की कमी
पश्चिमी एशिया में छिड़े युद्ध के कारण मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों के पुर्जों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इन पुर्जों पर दिल्ली और आसपास के इलाकों के कई छोटे उद्योग निर्भर हैं। ओखला औद्योगिक क्षेत्र के व्यापारी प्रवीण शर्मा ने बताया कि कई जरूरी स्पेयर पार्ट्स विदेशों से आते हैं। अभी आयात में देरी हो रही है, जिससे उद्योगों को समय पर सामान नहीं मिल पा रहा। इसका असर उत्पादन और मरम्मत के काम पर पड़ रहा है।

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