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IGI Airport Security: परमाणु खतरों से निपटने की तैयारी, आईजीआई एयरपोर्ट पर लगेंगे अत्याधुनिक RDI सेंसर

शनि पाथौली, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 08 Mar 2026 06:21 AM IST
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सार

परमाणु और रेडियोलॉजिकल खतरों से समय रहते निपटने के लिए यहां अत्याधुनिक रेडियोलॉजिकल डिटेक्शन इक्विपमेंट (आरडीई) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

IGI Airport to be equipped with state-of-the-art sensors to tackle nuclear threats
आईजीआई एयरपोर्ट - फोटो : ani
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विस्तार

देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की तैयारी की जा रही है। परमाणु और रेडियोलॉजिकल खतरों से समय रहते निपटने के लिए यहां अत्याधुनिक रेडियोलॉजिकल डिटेक्शन इक्विपमेंट (आरडीई) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनकी मदद से एयरपोर्ट परिसर में किसी भी प्रकार के रेडियोधर्मी पदार्थ या परमाणु सामग्री की मौजूदगी का तुरंत और सटीक तरीके से पता लगाया जा सकेगा।

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यात्रियों और कार्गो की लगातार बढ़ती आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अब एयरपोर्ट पर बेहतर तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। आरडीई सिस्टम ऐसा सुरक्षा तंत्र है जो वातावरण में मौजूद रेडियोधर्मी विकिरण की पहचान करने में सक्षम होता है। यदि कोई व्यक्ति, सामान, वाहन या कार्गो कंटेनर के माध्यम से रेडियोधर्मी पदार्थ की तस्करी या अनधिकृत परिवहन की कोशिश की जाती है, तो यह सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर सकता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। इसलिए एयरपोर्ट की सुरक्षा-व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।
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एयरपोर्ट के विभिन्न स्थानों पर लगेंगे उपकरण
इन उपकरणों को हवाई अड्डे के विभिन्न स्थानों पर स्थापित किया जाएगा। इनमें मुख्य प्रवेश द्वार, कार्गो टर्मिनल, बैगेज स्क्रीनिंग क्षेत्र और अन्य संवेदनशील स्थान शामिल हो सकते हैं। इनके जरिए यात्रियों के सामान, कार्गो कंटेनर, वाहनों और अन्य वस्तुओं में मौजूद रेडियोधर्मी विकिरण का पता लगाया जा सकेगा। इनकी खरीद प्रक्रिया को लेकर निविदा भी जारी कर दी गई है।

कई तरह के उपकरणों का समूह है आरडीई सिस्टम
आरडीई सिस्टम कई तरह के उपकरणों का समूह होता है। इसमें पोर्टल मॉनिटर, हैंडहेल्ड डिटेक्टर और मोबाइल डिटेक्शन यूनिट जैसी तकनीक शामिल होती है। पोर्टल मॉनिटर ऐसे उपकरण होते हैं जिनके बीच से होकर व्यक्ति या वाहन गुजरते हैं। यदि उनमें किसी प्रकार का रेडियोधर्मी स्रोत मौजूद होता है तो सिस्टम तुरंत संकेत देकर सुरक्षा कर्मियों को सतर्क कर देता है। हैंडहेल्ड डिटेक्टर का इस्तेमाल सुरक्षा कर्मी संदिग्ध वस्तुओं या स्थानों की नजदीक से जांच करने के लिए करते हैं। मोबाइल डिटेक्शन यूनिट के माध्यम से एयरपोर्ट परिसर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर भी जांच की जा सकती है।

व्यस्त हवाई अड्डों पर अहम है आरडीई स्थापित करना
सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) और एयरपोर्ट सिक्योरिटी स्टैंडिंग कमेटी करती है। दोनों एजेंसियां समय-समय पर एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करती हैं और नई तकनीकों को अपनाने की सिफारिश करती हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार भी बड़े और व्यस्त हवाई अड्डों पर आरडीई प्रणाली स्थापित करना आवश्यक समझा जाता है। आईजीआई को देश के सबसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।

केंद्र सरकार ने भी उपलब्ध कराई थी बजटी सहायता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार रेडियोधर्मी सामग्री की अवैध तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। इसको ध्यान में रखते हुए भारत में भी प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा व्यवस्था को लगातार बेहतर किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाते हुए 2021 में कुछ हवाई अड्डों पर आरडीई प्रणाली स्थापित करने के लिए बजटीय सहायता उपलब्ध कराई थी।

पश्चिम एशिया तनाव का असर, दिल्ली एयरपोर्ट से 35 उड़ानें रद्द, 70 से अधिक देरी से

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे के संचालन पर भी देखने को मिल रहा है। शनिवार को बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शेड्यूल प्रभावित रहा। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार दिनभर में कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि बड़ी संख्या में विमान देरी से संचालित हुए। एयरपोर्ट से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल 35 उड़ानें रद्द की गईं, जिनमें प्रस्थान और आगमन दोनों प्रकार की उड़ानें शामिल हैं। इसके अलावा 70 से अधिक उड़ानें निर्धारित समय से काफी देरी से रवाना हुईं या अपने गंतव्य तक पहुंचने में विलंब हुआ।

विशेष रूप से पश्चिम की ओर जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका ज्यादा प्रभाव देखा गया। हवाई क्षेत्र में प्रतिबंध और सुरक्षा कारणों से कई एयरलाइनों को अपने मार्ग में बदलाव करना पड़ा है। इसके कारण दिल्ली से यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका जाने वाली उड़ानों को वैकल्पिक और लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है। नए रूट के चलते उड़ानों की अवधि बढ़ गई है और कुछ मामलों में विमान को बीच रास्ते में ईंधन भरने के लिए अतिरिक्त ठहराव भी करना पड़ रहा है। एयरलाइन अधिकारियों के अनुसार पश्चिमी देशों की ओर जाने वाली उड़ानों में औसतन तीन से चार घंटे तक की देरी देखी जा रही है। 

कई यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ को अपनी आगे की कनेक्टिंग फ्लाइट भी बदलनी पड़ी। एयरलाइंस यात्रियों को नई स्थिति के अनुसार अपडेट दे रही हैं और जहां संभव हो वहां सीमित स्तर पर संचालन जारी रखा गया है। इस बीच एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर उन्हें उड़ान से पहले अपनी एयरलाइन से नवीनतम जानकारी लेने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम दिशा की उड़ानों के कार्यक्रम में अचानक बदलाव हो सकते हैं, इसलिए यात्रियों को एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जांच कर लेनी चाहिए।

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