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Delhi NCR News: यमुना एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जा रहा ईस्टर्न पेरिफेरल का रैंप, जून तक इंटरचेंज होगा शुरू
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फोटो
प्रोजेक्ट अपडेट:
-60 हेक्टेयर में बन रहे 8 क्लोवरलीफ, परियोजना की लागत बढ़ाकर 531 करोड़ करने का प्रस्ताव
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कॉमर्शियल फ्लाइट शुरू होने की आहट के साथ यमुना एक्सप्रेस-वे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए इंटरचेंज का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। नोएडा के जीरो प्वाइंट से जेवर टोल जाने वाली साइड में यमुना एक्सप्रेस-वे पर रैंप डाला जा रहा है। इसकी दोनों ओर दीवार के बीच में मिट्टी और रोड़ी की भराई कर दी गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों का दावा है कि जून तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। इंटरचेंज जुड़ने पर दिल्ली, हरियाणा, रोहतक व गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट तक गाड़ियां फर्राटे भरते हुए आएंगी।
यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट से लगभग 10 किलोमीटर दूर जगनपुर-अफजलपुर गांव के पास 60 हेक्टेयर भूमि पर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को जोड़ने के लिए इंटरचेंज का निर्माण कराया जा रहा है। इंटरचेंज पर चारों ओर 8 क्लोवर लीफ की लंबाई 11 किलोमीटर है। इंटरचेंज में 8 लूप बनाए जा रहे हैं, जिनमें 4 उतरने और 4 चढ़ने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
बढ़ाई जाएगी श्रमिकों की संख्या
इसके बनने से मथुरा, अलीगढ़, आगरा, गाजियाबाद, बागपत और मेरठ से आने-जाने वाले वाहनों का 15-20 किमी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इंटरचेंज का कार्य लगभग 45 प्रतिशत पूरा हो गया है। इसकी लागत 350 से बढ़ाकर लगभग 531 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा।
यमुना एक्स्प्रेस-वे पर नोएडा जीरो प्वाइंट माइलस्टोन से लगभग 10 किलोमीटर माइलस्टोन पर 60 मीटर रोड से एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के लिए रैंप बनाया जा रहा है। एनआरआई सिटी से 60 मीटर रोड पर ईस्टर्न पेरिफेरल से पहले यमुना एक्सप्रेस-वे पर रैंप बनाया जा रहा है। रैंप पर मिट्टी भरकर यमुना एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के लिए साइड रोड तैयार की जा रही है।
एनएचएआई अधिकारियों का दावा है कि निर्माण कार्य में मशीनों, इंजीनियरों और श्रमिकों की संख्या में बढ़ाकर इसे जून में पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना में बदलाव कर उतरने-चढ़ने के लिए 8 क्लोवर लीफ बनाने के कारण इसकी भूमि में बढ़ोतरी हुई है, जिससे इसकी लागत बढ़ गई है।
वाहन चालकों को मिलेगी राहत
ईस्टर्न पेरिफेरल के माध्यम से मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, पलवल और दिल्ली से आने वाले वाहन इस इंटरचेंज के माध्यम से यमुना एक्सप्रेस-वे का उपयोग कर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मथुरा, टप्पल और आगरा से सीधे आ-जा सकेंगे।
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-60 हेक्टेयर में बन रहे 8 क्लोवरलीफ, परियोजना की लागत बढ़ाकर 531 करोड़ करने का प्रस्ताव
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कॉमर्शियल फ्लाइट शुरू होने की आहट के साथ यमुना एक्सप्रेस-वे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए इंटरचेंज का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। नोएडा के जीरो प्वाइंट से जेवर टोल जाने वाली साइड में यमुना एक्सप्रेस-वे पर रैंप डाला जा रहा है। इसकी दोनों ओर दीवार के बीच में मिट्टी और रोड़ी की भराई कर दी गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों का दावा है कि जून तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। इंटरचेंज जुड़ने पर दिल्ली, हरियाणा, रोहतक व गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट तक गाड़ियां फर्राटे भरते हुए आएंगी।
यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट से लगभग 10 किलोमीटर दूर जगनपुर-अफजलपुर गांव के पास 60 हेक्टेयर भूमि पर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को जोड़ने के लिए इंटरचेंज का निर्माण कराया जा रहा है। इंटरचेंज पर चारों ओर 8 क्लोवर लीफ की लंबाई 11 किलोमीटर है। इंटरचेंज में 8 लूप बनाए जा रहे हैं, जिनमें 4 उतरने और 4 चढ़ने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
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बढ़ाई जाएगी श्रमिकों की संख्या
इसके बनने से मथुरा, अलीगढ़, आगरा, गाजियाबाद, बागपत और मेरठ से आने-जाने वाले वाहनों का 15-20 किमी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इंटरचेंज का कार्य लगभग 45 प्रतिशत पूरा हो गया है। इसकी लागत 350 से बढ़ाकर लगभग 531 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा।
यमुना एक्स्प्रेस-वे पर नोएडा जीरो प्वाइंट माइलस्टोन से लगभग 10 किलोमीटर माइलस्टोन पर 60 मीटर रोड से एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के लिए रैंप बनाया जा रहा है। एनआरआई सिटी से 60 मीटर रोड पर ईस्टर्न पेरिफेरल से पहले यमुना एक्सप्रेस-वे पर रैंप बनाया जा रहा है। रैंप पर मिट्टी भरकर यमुना एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के लिए साइड रोड तैयार की जा रही है।
एनएचएआई अधिकारियों का दावा है कि निर्माण कार्य में मशीनों, इंजीनियरों और श्रमिकों की संख्या में बढ़ाकर इसे जून में पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना में बदलाव कर उतरने-चढ़ने के लिए 8 क्लोवर लीफ बनाने के कारण इसकी भूमि में बढ़ोतरी हुई है, जिससे इसकी लागत बढ़ गई है।
वाहन चालकों को मिलेगी राहत
ईस्टर्न पेरिफेरल के माध्यम से मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, पलवल और दिल्ली से आने वाले वाहन इस इंटरचेंज के माध्यम से यमुना एक्सप्रेस-वे का उपयोग कर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मथुरा, टप्पल और आगरा से सीधे आ-जा सकेंगे।