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विश्व हीमोफीलिया दिवस: हर महीने 20 से अधिक मरीज पहुंच रहे नागरिक अस्पताल
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- गुरुग्राम में बढ़ रहे फैक्टर-8 के सबसे ज्यादा मामले, मुफ्त इलाज से मरीजों को राहत
सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में हीमोफीलिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, हर महीने 20 से अधिक मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें फैक्टर-8 की कमी से पीड़ित मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो हीमोफीलिया का सबसे सामान्य प्रकार माना जाता है। हर साल विश्व हीमोफीलिया दिवस 17 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस गंभीर आनुवंशिक बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि हीमोफीलिया का स्थायी इलाज फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन नियमित इलाज और सावधानी के जरिए मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। नागरिक अस्पताल में इस बीमारी का इलाज पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। इसके साथ ही विभिन्न ग्रुप्स में जुड़कर भी मदद ली जा सकती है, हीमोफीलिया फेडेरशन और सोसाइटी फाॅर हीमोफीलिया केयर नाम की संस्थांए जिले में ऐसे मरीजों की सहायता कर रही हैं।
सिर्फ पुरुषों में होती है यह बीमारी-
डॉक्टरों के अनुसार, हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें खून का थक्का सही तरीके से नहीं बनता। इसके कारण मामूली चोट लगने पर भी खून बहना बंद नहीं होता। कई मामलों में बिना किसी चोट के भी शरीर के अंदर या बाहर अचानक रक्तस्राव हो सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। यह बीमारी जीन के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचती है और पुरुषों में अधिक पाई जाती है, क्योंकि उनके पास केवल एक X गुणसूत्र होता है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 21, फरवरी में 30 और मार्च में 28 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें फैक्टर-8 के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए।
नागरिक अस्पताल में आए मामले -
महीने फैक्टर-8 फैक्टर-11 कुल
-जनवरी- 16 5 21
-फरवरी- 23 7 30
-मार्च - 22 6 28
वर्जन -
मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, चोट लगने से बचना चाहिए और समय-समय पर इलाज कराते रहना चाहिए, ताकि गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके। -
डाॅ. नवीन, सीनियर मेडिकल अधिकारी, नागरिक अस्पताल
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सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में हीमोफीलिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, हर महीने 20 से अधिक मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें फैक्टर-8 की कमी से पीड़ित मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो हीमोफीलिया का सबसे सामान्य प्रकार माना जाता है। हर साल विश्व हीमोफीलिया दिवस 17 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस गंभीर आनुवंशिक बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि हीमोफीलिया का स्थायी इलाज फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन नियमित इलाज और सावधानी के जरिए मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। नागरिक अस्पताल में इस बीमारी का इलाज पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। इसके साथ ही विभिन्न ग्रुप्स में जुड़कर भी मदद ली जा सकती है, हीमोफीलिया फेडेरशन और सोसाइटी फाॅर हीमोफीलिया केयर नाम की संस्थांए जिले में ऐसे मरीजों की सहायता कर रही हैं।
सिर्फ पुरुषों में होती है यह बीमारी-
डॉक्टरों के अनुसार, हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें खून का थक्का सही तरीके से नहीं बनता। इसके कारण मामूली चोट लगने पर भी खून बहना बंद नहीं होता। कई मामलों में बिना किसी चोट के भी शरीर के अंदर या बाहर अचानक रक्तस्राव हो सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। यह बीमारी जीन के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचती है और पुरुषों में अधिक पाई जाती है, क्योंकि उनके पास केवल एक X गुणसूत्र होता है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 21, फरवरी में 30 और मार्च में 28 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें फैक्टर-8 के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए।
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नागरिक अस्पताल में आए मामले -
महीने फैक्टर-8 फैक्टर-11 कुल
-जनवरी- 16 5 21
-फरवरी- 23 7 30
-मार्च - 22 6 28
वर्जन -
मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, चोट लगने से बचना चाहिए और समय-समय पर इलाज कराते रहना चाहिए, ताकि गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके। -
डाॅ. नवीन, सीनियर मेडिकल अधिकारी, नागरिक अस्पताल
