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World Kidney Day: डायबिटीज और उच्च रक्तचाप से किडनी रोग का बढ़ा खतरा, स्वस्थ रखने के लिए जीवन शैली सुधारें

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 12 Mar 2026 01:56 AM IST
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सार

क्रॉनिक किडनी डिजीज के अधिकतर मामलों के पीछे डायबिटीज और उच्च रक्तचाप को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ऐसे में लगभग 60-70 फीसदी मरीजों में ये दोनों ही कारण किडनी की धीरे-धीरे होने वाली बीमारी के लिए मुख्य हैं।

World Kidney Day: Diabetes and high blood pressure increase the risk of kidney disease
demo - फोटो : Freepik.com
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विस्तार

अगर आप भी डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के मरीज हैं, तो क्रॉनिक किडनी डिजीज कभी भी आपको अपनी चपेट में ले सकता है। क्रॉनिक किडनी डिजीज के अधिकतर मामलों के पीछे डायबिटीज और उच्च रक्तचाप को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ऐसे में लगभग 60-70 फीसदी मरीजों में ये दोनों ही कारण किडनी की धीरे-धीरे होने वाली बीमारी के लिए मुख्य हैं।

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डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का लंबे समय तक नियंत्रण न करने पर किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कम होने लगती है, जिससे शरीर में टॉक्सिन जमा हो सकते हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे नियमित जांच कराएं, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें और जीवनशैली में सुधार करें। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से गंभीर किडनी बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
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नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों ने किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की जरूरत पर जोर दिया है। किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएस सोलंकी ने बताया कि बहुत से लोग यह नहीं जानते कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी सामान्य बीमारियां समय के साथ किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। उन्होंने बताया कि क्रॉनिक किडनी डिजीज के लगभग 60-70 प्रतिशत मामलों के पीछे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जिम्मेदार हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती चरणों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए समय पर जांच और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण बेहद जरूरी है।

स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली सुधारें
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सोलंकी ने बताया कि किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली सुधार महत्वपूर्ण है। इसमें ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना, नमक का सेवन कम करना, पर्याप्त पानी पीना और धूम्रपान से दूर रहना शामिल है। ये सरल कदम किडनी फेल्योर और डायलिसिस की जरूरत को काफी हद तक रोक सकते हैं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि लोग समय-समय पर ब्लड क्रिएटिनिन, यूरिन जांच और ब्लड प्रेशर जैसी सरल जांच कराएं। शुरुआती चरण में किडनी रोग का पता लगाना और उसका समय पर इलाज करना रोग की प्रगति को रोकने में मदद करता है।

समय पर सावधानी बरतें और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराएं
आरएमएल अस्पताल के मेडिसन डॉ. रमेश मीणा ने बताया कि विश्व किडनी दिवस जागरूकता बढ़ाने का दिन नहीं है, बल्कि लोगों को अपनी किडनी की सेहत पर ध्यान देने और नियमित स्क्रीनिंग कराने के लिए प्रेरित करने का अवसर भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विशेष रूप से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग नियमित रूप से किडनी टेस्ट कराएं और अपने खानपान और जीवनशैली में सुधार करें। उन्होंने बताया कि अगर लोग समय पर सावधानी बरतें और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करें, तो क्रॉनिक किडनी डिजीज की गंभीर अवस्था से बचा जा सकता है। इसके अलावा, लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों का सही इस्तेमाल करना और हेल्दी जीवनशैली अपनाना जरूरी है।

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