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World Organ Donation Day: अंगदान में दिल्ली-एनसीआर राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे, सामाजिक आंदोलन का आह्वान
Thu, 13 Aug 2026 04:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 13 Aug 2026 04:01 AM IST
सार
यहां मौत के बाद दान से होने वाले प्रत्यारोपण की हिस्सेदारी करीब तीन फीसदी है, जबकि देश में यह औसत 17.5 से 18 फीसदी है।
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जरूरतमंद मरीजों को उपयुक्त अंग मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अंगदान को महादान कहा जाता है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर में मौत के बाद अंगदान की स्थिति राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बेहद कमजोर है। यहां मौत के बाद दान से होने वाले प्रत्यारोपण की हिस्सेदारी करीब तीन फीसदी है, जबकि देश में यह औसत 17.5 से 18 फीसदी है। ऐसे में जरूरतमंद मरीजों को उपयुक्त अंग मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
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विश्व अंगदान दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को ओखला स्थित निजी अस्पताल में आयोजित ‘गिव द गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम में एनओटीटीओ के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। वर्तमान में 1,05,560 मरीज प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं। इनमें 73,646 किडनी और 23,396 मरीज लीवर प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। देश में हर 20 मिनट में एक नया मरीज इस सूची में जुड़ रहा है।
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किडनी के मरीज सबसे ज्यादा : हर साल दो लाख से अधिक नए मरीज किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत वाली श्रेणी में आते हैं, जबकि करीब 14 हजार किडनी प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं। लिवर और हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की संख्या भी सालाना करीब 50 हजार है। पिछले साल करीब 5,100 लीवर और केवल 239 हृदय प्रत्यारोपण हुए।
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अंगदान से बच सकती है आठ लोगों की जिंदगी : विशेषज्ञों ने कहा कि अंगदान बढ़ाने के लिए अस्पतालों के साथ समाज और परिवारों को भी जागरूक करना होगा। एक व्यक्ति मृत्यु के बाद अंगदान कर आठ लोगों की जिंदगी बचा सकता है। किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, आंत और पैंक्रियाज के अलावा कॉर्निया, त्वचा और हड्डी जैसे ऊतक भी दान किए जा सकते हैं।
एक दशक में प्रत्यारोपण चार गुना से ज्यादा : देश में वर्ष 2013 में करीब 4,900 अंग प्रत्यारोपण हुए थे। पिछले साल यह संख्या बढ़कर 20,138 से अधिक हो गई। इसके बावजूद उपलब्ध अंगों की तुलना में जरूरत कहीं अधिक है। ‘जुग-जुग’ अभियान के जरिए लोगों को अंगदान का संकल्प लेने और जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
2805 मरीजों की अंगदान के इंतजार में हुई मौत : वर्ष 2020 से 2024 के बीच 2,805 मरीजों की मृत्यु अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हुए हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक, अंगों की उपलब्धता बढ़ाना प्रत्यारोपण व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है।
अंगदान को बनाया जाए सामाजिक आंदोलन : दधीचि देहदान समिति
विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर दधीचि देहदान समिति ने डिफेंस एन्कलेव में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी और समिति के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट आलोक कुमार ने अंगदान को महादान बताते हुए सामाजिक आंदोलन बनाने पर जोर दिया।
हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दधीचि ऋषि के त्याग से प्रेरणा लेकर देहदान और अंगदान की भावना को घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत है। एक अंगदाता कई लोगों को जीवन देने का माध्यम बन सकता है। उन्होंने लोगों से अंगदान का संकल्प पत्र भरने और अपनी इच्छा परिवार को बताने की अपील की।
उन्होंने कहा कि दिल्ली भाजपा और दधीचि देहदान संस्था का हर परिवार में अंगदान पर चर्चा कराने का संकल्प है ताकि लोगों के मन में दान का भाव जागे। एडवोकेट आलोक कुमार ने कहा कि दधीचि ऋषि के त्याग की परंपरा हमें जीवन के बाद भी समाज के लिए योगदान करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि समिति का लक्ष्य है कि हर घर में अंगदान की चर्चा हो और लोग भ्रम व भय से बाहर निकलकर जीवन बचाने के इस अभियान से जुड़ें।