सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Worrying revelation about women s health Hormonal and fertility problems are increasing at younger age

महिला स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक खुलासा: कम उम्र में बढ़ रहीं हार्मोनल और फर्टिलिटी समस्याएं; जानिए क्या वजह

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Akash Dubey Updated Tue, 14 Apr 2026 07:19 PM IST
विज्ञापन
सार

देश में 20 से 25 साल की युवतियों में हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आधुनिक जीवनशैली, तनाव, खराब खान-पान और नींद की कमी इसके मुख्य कारण हैं।

Worrying revelation about women s health Hormonal and fertility problems are increasing at younger age
महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक खुलासा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

देश में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक नया और चिंताजनक खुलासा हुआ है। अब 20 से 25 साल की उम्र की युवतियों में भी हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन (फर्टिलिटी) से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि पहले ये समस्याएं आमतौर पर 30 साल के बाद देखने को मिलती थीं। यह बदलाव केवल शरीर में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों की वजह से नहीं है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है। ऐसे में बदलती दिनचर्या, तनाव, खराब खान-पान और नींद की कमी जैसे कई कारण मिलकर इस समस्या को बढ़ा रहे हैं।

Trending Videos

सीनियर कंसल्टेंट और आईवीएफ व स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. प्रीति अरोड़ा धामिजा ने बताया कि मौजूदा समय में महिलाओं के स्वास्थ्य में एक स्पष्ट और चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां हार्मोनल असंतुलन और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं हमारी पारंपरिक अपेक्षाओं से कहीं अधिक कम उम्र में ही सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, मौजूदा समय में कम उम्र की महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसोओएस), मोटापा और ओवेरियन रिजर्व (अंडाशय में अंडों की संख्या) में कमी जैसे मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। ओवेरियन रिजर्व में कमी का मतलब है कि महिला की प्रजनन क्षमता कम होने लगती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

पहले की तुलना में बहुत कम उम्र में ही पीरियड्स शुरू
डॉ. प्रीति अरोड़ा धामिजा के अनुसार, अब लड़कियों में पहले की तुलना में बहुत कम उम्र में ही पीरियड्स शुरू हो रहे हैं। जहां पहले 12-13 साल की उम्र में मासिक धर्म शुरू होना सामान्य माना जाता था, वहीं अब कई मामलों में यह 8-9 साल की उम्र में ही शुरू हो रहा है। इससे शरीर में हार्मोनल बदलाव जल्दी शुरू हो जाते हैं और इसका असर आगे चलकर प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही आधुनिक जीवनशैली इस समस्या को और गंभीर बना रही है। आज की युवा पीढ़ी में देर रात तक जागना, मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल, जंक फूड का सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी आम हो गई है। ये सभी आदतें शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ती हैं।

लगातार रहने वाला तनाव भी एक बड़ा कारण
सफदरजंग अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मिलौनी ने बताया कि लगातार रहने वाला तनाव (क्रॉनिक स्ट्रेस) भी एक बड़ा कारण है। तनाव के कारण शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे ओव्यूलेशन (अंडा बनने और निकलने की प्रक्रिया) प्रभावित होती है। इसका सीधा असर गर्भधारण की क्षमता पर पड़ता है। इसके अलावा, खराब नींद भी एक अहम कारण है। पर्याप्त और सही समय पर नींद न लेने से शरीर की जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) प्रभावित होती है, जिससे हार्मोनल सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ता है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में असुरक्षित यौन व्यवहार और बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल भी महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इससे संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

क्या करें बचाव के लिए?
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें
- रोजाना व्यायाम करें
- पर्याप्त नींद लें
- तनाव कम करने की कोशिश करें

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed