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Delhi NCR News: बिग बर्ड काउंट में यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में दिखी सबसे अधिक पक्षियों की संख्या
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-डीडीए के सात जैव-विविधता पार्कों में पक्षियों की हुई, कुछ पार्कों में दिखा सुधार, तो कुछ में कमी
-सबसे खास बात तो यह रही कि फेरुगिनस पोचार्ड देखने को मिला, आईयूसीएन की रेड लिस्ट में नियर थ्रेटेंड की सूची में आता
-इस दौरान छात्र, वैज्ञानिक और अधिकारी पार्कों में सुबह 8 बजे से 10 बजे तक पक्षियों की संख्या की गणना में शामिल हुए
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी जैसे बड़े और घनी आबादी वाले शहर में जैव-विविधता पार्क न केवल शहर को हरियाली और ताजगी देते हैं, बल्कि पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी सुरक्षित ठिकाना है। ऐसे में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के सात जैव-विविधता पार्क में हाल ही में दो घंटे की बर्ड काउंट 2026 की गई। ऐसे में इस हालिया बिग बर्ड काउंट में कुछ पार्कों में पक्षियों की संख्या बढ़ी है, जबकि कुछ में कमी देखने को मिली है। यह आंकड़े दिल्ली के पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को दर्शाते हैं। रिपोर्ट में 2020 से 2026 तक के रिकॉर्ड दिए गए हैं। साथ ही, इसमें हर पार्क में देखे गए पक्षी प्रजातियों की संख्या सामने आई।
इस साल बिग बर्ड काउंट में यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। यहां इस वर्ष कुल 90 प्रजातियों के पक्षी देखे गए। हालांकि, पिछले कुछ साल में संख्या थोड़ी कम हुई थी, फिर भी यह सबसे अधिक रही। सबसे खास बात तो यह रही कि फेरुगिनस पोचार्ड देखने को मिला। प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में नियर थ्रेटेंड की सूची में आता है। इसके अलावा, पाइड एवोसेट, बूटेड ईगल और ऑरेंज हेडेड थ्रश भी वैज्ञानिकों को देखने को मिले। इसके अलावा, कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क ने भी अच्छी बढ़त दिखाई। यहां 2026 में 81 प्रजातियां दर्ज की गईं, जो पिछले साल की तुलना में 2025 को छोड़कर बढ़ी हैं। इस बार मार्श हरियर और फेरुगिनस पोचार्ड जैसे प्रमुख पक्षी देखने को मिले। डीडीए की तरफ से स्थापित ये पार्क यमुना बेसिन और अरावली पहाड़ियों जैसे महत्वपूर्ण भूदृश्यों को बचाने और पुनर्स्थापित करने में मदद करते हैं। ऐसे में हर साल आयोजित की जाने वाली बर्ड काउंट गतिविधियों से यह पता चलता है कि शहर में पक्षियों की विविधता कैसी है।
रिपोर्ट के अनुसार, तुगलकाबाद बायोडायवर्सिटी पार्क में भी सुधार हुआ, जहां 61 प्रजातियां देखी गईं। यहां ब्लैक रेडस्टार्ट विशेष रूप से नजर आया। हालांकि, कुछ पार्कों में पक्षियों की संख्या घटी है। अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क में 2026 में केवल 49 प्रजातियां रिकॉर्ड हुईं, जो पहले की तुलना में कम हैं। तीलपथ वैली में 36 और नीला हौज में 25 प्रजातियां ही देखी गईं। नॉर्दर्न रिज (कमला नेहरू रिज) में 52 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिसमें ऑरेंज हेडेड थ्रश खास नजर आई। दिल्ली में स्थित सात जैव विविधता पार्क में रविवार को ‘बिग बर्ड काउंट 2026’ का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्र, वैज्ञानिक और अधिकारी पार्कों में सुबह 8 बजे से 10 बजे तक पक्षियों की संख्या की गणना में शामिल हुए। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पार्क दिल्ली के पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाने बने हुए हैं। कुछ जगहों पर दुर्लभ और प्रवासी पक्षियों का आना अच्छी खबर है, लेकिन कुछ पार्कों में संख्या में गिरावट चिंता का विषय है।
-- -- -- -
वर्जन
दिल्ली विकास प्राधिकरण के जैव विविधता पार्क अब जलवायु परिवर्तन के अनुकूल नीले-हरे अवसंरचना के रूप में विकसित हो चुके हैं, जो दिल्ली जैसे शहरी केंद्रों को बड़ी संख्या में पारिस्थितिक वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करते हैं। हालांकि कुल संख्या में कमी आई है, लेकिन डीडीए जैव विविधता पार्कों में प्रजाति विविधता में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। इस वर्ष शीत ऋतु में देरी हुई और मानसून के लंबे समय तक चलने के कारण राजस्थान में कई अस्थायी जल निकाय बन गए। इसके परिणामस्वरूप प्रवासी पक्षियों के आगमन में देरी हुई, जिससे उनके झुंड कम संख्या में दिखाई दिए।
-डॉ. फैयाज खुदसर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बायोडाइवर्सिटी पार्क
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-सबसे खास बात तो यह रही कि फेरुगिनस पोचार्ड देखने को मिला, आईयूसीएन की रेड लिस्ट में नियर थ्रेटेंड की सूची में आता
-इस दौरान छात्र, वैज्ञानिक और अधिकारी पार्कों में सुबह 8 बजे से 10 बजे तक पक्षियों की संख्या की गणना में शामिल हुए
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी जैसे बड़े और घनी आबादी वाले शहर में जैव-विविधता पार्क न केवल शहर को हरियाली और ताजगी देते हैं, बल्कि पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी सुरक्षित ठिकाना है। ऐसे में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के सात जैव-विविधता पार्क में हाल ही में दो घंटे की बर्ड काउंट 2026 की गई। ऐसे में इस हालिया बिग बर्ड काउंट में कुछ पार्कों में पक्षियों की संख्या बढ़ी है, जबकि कुछ में कमी देखने को मिली है। यह आंकड़े दिल्ली के पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को दर्शाते हैं। रिपोर्ट में 2020 से 2026 तक के रिकॉर्ड दिए गए हैं। साथ ही, इसमें हर पार्क में देखे गए पक्षी प्रजातियों की संख्या सामने आई।
इस साल बिग बर्ड काउंट में यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। यहां इस वर्ष कुल 90 प्रजातियों के पक्षी देखे गए। हालांकि, पिछले कुछ साल में संख्या थोड़ी कम हुई थी, फिर भी यह सबसे अधिक रही। सबसे खास बात तो यह रही कि फेरुगिनस पोचार्ड देखने को मिला। प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में नियर थ्रेटेंड की सूची में आता है। इसके अलावा, पाइड एवोसेट, बूटेड ईगल और ऑरेंज हेडेड थ्रश भी वैज्ञानिकों को देखने को मिले। इसके अलावा, कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क ने भी अच्छी बढ़त दिखाई। यहां 2026 में 81 प्रजातियां दर्ज की गईं, जो पिछले साल की तुलना में 2025 को छोड़कर बढ़ी हैं। इस बार मार्श हरियर और फेरुगिनस पोचार्ड जैसे प्रमुख पक्षी देखने को मिले। डीडीए की तरफ से स्थापित ये पार्क यमुना बेसिन और अरावली पहाड़ियों जैसे महत्वपूर्ण भूदृश्यों को बचाने और पुनर्स्थापित करने में मदद करते हैं। ऐसे में हर साल आयोजित की जाने वाली बर्ड काउंट गतिविधियों से यह पता चलता है कि शहर में पक्षियों की विविधता कैसी है।
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रिपोर्ट के अनुसार, तुगलकाबाद बायोडायवर्सिटी पार्क में भी सुधार हुआ, जहां 61 प्रजातियां देखी गईं। यहां ब्लैक रेडस्टार्ट विशेष रूप से नजर आया। हालांकि, कुछ पार्कों में पक्षियों की संख्या घटी है। अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क में 2026 में केवल 49 प्रजातियां रिकॉर्ड हुईं, जो पहले की तुलना में कम हैं। तीलपथ वैली में 36 और नीला हौज में 25 प्रजातियां ही देखी गईं। नॉर्दर्न रिज (कमला नेहरू रिज) में 52 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिसमें ऑरेंज हेडेड थ्रश खास नजर आई। दिल्ली में स्थित सात जैव विविधता पार्क में रविवार को ‘बिग बर्ड काउंट 2026’ का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्र, वैज्ञानिक और अधिकारी पार्कों में सुबह 8 बजे से 10 बजे तक पक्षियों की संख्या की गणना में शामिल हुए। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पार्क दिल्ली के पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाने बने हुए हैं। कुछ जगहों पर दुर्लभ और प्रवासी पक्षियों का आना अच्छी खबर है, लेकिन कुछ पार्कों में संख्या में गिरावट चिंता का विषय है।
वर्जन
दिल्ली विकास प्राधिकरण के जैव विविधता पार्क अब जलवायु परिवर्तन के अनुकूल नीले-हरे अवसंरचना के रूप में विकसित हो चुके हैं, जो दिल्ली जैसे शहरी केंद्रों को बड़ी संख्या में पारिस्थितिक वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करते हैं। हालांकि कुल संख्या में कमी आई है, लेकिन डीडीए जैव विविधता पार्कों में प्रजाति विविधता में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। इस वर्ष शीत ऋतु में देरी हुई और मानसून के लंबे समय तक चलने के कारण राजस्थान में कई अस्थायी जल निकाय बन गए। इसके परिणामस्वरूप प्रवासी पक्षियों के आगमन में देरी हुई, जिससे उनके झुंड कम संख्या में दिखाई दिए।
-डॉ. फैयाज खुदसर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बायोडाइवर्सिटी पार्क
