Delhi: जेएनयू छात्र संघ के चारों पदाधिकारी निष्कासित, लाइब्रेरी में हुई तोड़फोड़ के मामले में कार्रवाई
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) ने छात्र संघ के चारों पदाधिकारियों सहित पूर्व अध्यक्ष को निष्कासित कर दिया है। साथ ही सभी को कैंपस से आउट ऑफ बॉन्ड घोषित किया है।
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) ने छात्र संघ के चारों पदाधिकारियों सहित पूर्व अध्यक्ष को निष्कासित कर दिया है। साथ ही सभी को कैंपस से आउट ऑफ बॉन्ड घोषित किया है। यानी कैंपस से बाहर किया गया है। साथ जुर्माना भी लगाया गया है। यह कार्रवाई पिछले वर्ष नंवबर महीने की 21 तारीख को जेएनयू डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में हुई तोड़फोड़ और बायोमेट्रिक फेस रिकॉग्नाइजेशन सिस्टम की मशीनें उखाड़ फेंकने के विरोध में की गई है। इस संबंध में जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर ने आदेश भी जारी किया है। जिसमें छात्रों के ऊपर तोड़फोड़ करने सहित कई दूसरे आरोप है। इस तोड़फोड़ के चलते जेएनयू प्रशासन को अनुमानित करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। तोड़फोड़ में जेएनयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के. गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव और संयुक्त सचिव दानिश अली भी शामिल रही थी। जेएनयू प्रशासन ने पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार पर भी कार्रवाई की है।
हालांकि नीतीश कुमार को सिर्फ दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित और कैंपस से आउट ऑफ बॉन्ड किया है। 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। निष्कासित किए जाने के संबंध में जेएनयू छात्र संघ ने एक बयान जारी किया। इसके अनुसार जेएनयू कुलगुरु सरकार की सिर्फ कठपुतली बन गई है। यह कार्रवाई ठीक उसी समय की है जब यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को रोकने के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन तैयार कर रहे हैं।
छात्रों की आवाज दबा रहा प्रशासन
इस कार्रवाई को छात्रों की आवाज दबाने के तौर पर देखा जाना चाहिए। एसएल में बैचलर्स के 60 से ज्यादा छात्रों की गैर-कानूनी हिरासत और सोमवार को जेएनयू में निजीकरण के खिलाफ सफल हड़ताल से प्रशासन का गुस्सा नए स्तर पर पहुंच गया है। छात्र संघ के खिलाफ निष्कासित और कैंपस से बाहर रहने के आदेश प्रशासन के छात्र-विरोधी एजेंडे को दिखाते हैं जो कैंपस के छात्रों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सिर्फ छात्रों की असहमति की आवाज उठाने के लिए बाहर निकालना चाहता है।
जांच समिति का हुआ था गठन
बता दें कि जेएनयू लाइब्रेरी में हुई तोड़फोड़ मामले में कार्यवाहक लाइब्रेरियन और मुख्य सुरक्षा अधिकारी से प्रशासन को रिपोर्ट मिली थी। जिसके बाद इस पूरे मामले की जांच के लिए प्रॉक्टोरियल जांच समिति गठित की गई। जांच में छात्रों को अपना पक्ष रखने का भी मौका दिया गया। तोड़फोड़ मामले में संतुष्टि भरा जवाब न मिलने पर चारों पदाधिकारियों को निष्कासित करने के आदेश जारी किए।
जेएनयू में हॉस्टल वार्डन को 48 घंटे के अंदर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने सभी हॉस्टल वार्डन को 48 घंटे के अंदर अवैध निर्माण हटाने के संबंध में निर्देश दिए हैं। विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन करने पर वार्डन के पद से भी हटाया जाएगा। इसको लेकर विश्वविद्यालय के डीन छात्र कार्यालय ने सोमवार को सर्कुलर जारी कर दिया। सर्कुलर के अनुसार ऐसे देखने को मिला है कि कुछ हॉस्टल वार्डन विश्वविद्यालय के हॉस्टल परिसर के अंदर और आसपास अवैध निर्माण गतिविधियां अस्थायी और स्थायी तौर पर कर रहे है।
विश्वविद्यालय ने समय-समय पर सभी कर्मचारियों को ऐसे कार्यों से बचने के निर्देश भी जारी किए। इस संबंध में पिछले वर्ष तीन दिसंबर को सर्कुलर भी जारी किया था उसके बावजूद अवैध निर्माण की सूचनाएं सामने आ रही है। सभी वार्डन को निर्देश है कि वार्डन फ्लैट के अंदर और बाहर से कोई भी अवैध निर्माण 48 घंटे के भीतर हटाएं। विश्वविद्यालय के आवास आवंटन नियमों के अनुसार अवैध निर्माण पर पूरी तरह से रोक है। विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन करने पर वार्डन पद से हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
