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Delhi Riot Case: आगजनी और दंगे के आरोपी फैजान बरी...दंगाई भीड़ का था हिस्सा; अदालत ने बताई ये बड़ी वजह

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: राहुल तिवारी Updated Sat, 31 Jan 2026 02:57 PM IST
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सार

Delhi Riot Case: दिल्ली दंगों से जुड़े आगजनी और दंगा मामले में अदालत ने आरोपी फैजान को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष की गवाही में गंभीर विरोधाभास है। इस मामले में फैजान के दो सह-आरोपियों को फरवरी 2025 में ही बरी कर दिया गया था।

Court acquits Faizan alias Aryan accused of arson and rioting in Delhi riots case
सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों (Delhi Riot Case) के दौरान दंगे और आगजनी के आरोपी फैजान को बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले में गंभीर असंगतियों का हवाला देते हुए कहा कि एकमात्र पहचान करने वाले गवाह की गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं होगा।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह आरोपी फैजान उर्फ आर्यन के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे। फैजान पर 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान ब्रिजपुरी रोड स्थित अरुण मॉडर्न पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आग लगाने का आरोप था। अदालत ने उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

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28 जनवरी को जारी आदेश में अदालत ने कहा कि इन तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, मैं यह पाता हूं कि अभियोजन पक्ष के गवाह (पीडब्ल्यू2 कांस्टेबल पीयूष) की एकमात्र गवाही पर भरोसा करना अत्यंत असुरक्षित होगा। इसलिए, यह निष्कर्ष निकाला है कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा है और आरोपी संदेह के लाभ का हकदार है।

फैजान पर आरोप था कि वह 25 फरवरी 2020 को कथित रूप से स्कूल में तोड़फोड़ करने और आग लगाने वाली दंगाई भीड़ का हिस्सा था, जिससे एक करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। अभियोजन पक्ष का दावा था कि करीब 200 लोगों ने जबरन परिसर में प्रवेश किया, संपत्ति और वाहनों को नुकसान पहुंचाया और इमारत में आग लगा दी।

इस मामले में शुरुआत में फैजान सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उसके दो सह-आरोपियों को फरवरी 2025 में बरी कर दिया गया था। फैजान को 2022 में फरार होने के बाद घोषित अपराधी घोषित किया गया था। उसे अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ अलग से मुकदमा चला।

अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने में हुई अस्पष्टीकृत देरी और जांच एजेंसी द्वारा मौके पर कथित रूप से मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों की जांच न किए जाने का भी उल्लेख किया अदालत ने कहा कि इन विरोधाभासों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, और जोड़ा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा है इसलिए, अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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