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Delhi News: सीट बेल्ट न लगाने से बढ़ रहा हादसों का खतरा
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2025-26 में घायल कार यात्रियों में 69 प्रतिशत लोगों ने नहीं लगाई थी सीट बेल्ट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सीट बेल्ट न लगाना कार यात्रियों के लिए घातक बनता जा रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), के ट्रॉमा सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025-26 में सड़क दुर्घटना में घायल हुए 10 में से करीब 7 कार यात्री हादसे के समय सीट बेल्ट नहीं पहने हुए थे।
जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर (जेपीएनएटीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में घायल कार यात्रियों में 69 प्रतिशत लोगों ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। साल 2024-25 में यह आंकड़ा 46 प्रतिशत था। वहीं, सीट बेल्ट न पहनने वाले ड्राइवरों की संख्या भी 19 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है। ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. कामरान फारूक ने बताया कि सीट बेल्ट कार में सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। दुर्घटना के दौरान सीट बेल्ट न पहनने वाले लोगों को सिर, छाती और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि पिछली सीट पर बैठने वाले यात्रियों को भी सीट बेल्ट जरूर पहननी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में ट्रॉमा सेंटर में सड़क दुर्घटना के 19,472 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हैं। इनमें 77 प्रतिशत दोपहिया वाहन सवार, 17 प्रतिशत पैदल यात्री और 6 प्रतिशत कार सवार शामिल थे।
दुर्घटनाओं के सबसे अधिक शिकार युवा
दुर्घटनाओं के सबसे अधिक शिकार युवा हुए। हादसों में घायल लोगों में 21 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 35 प्रतिशत और 31 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 23 प्रतिशत लोग थे। यानी लगभग 60 प्रतिशत मरीज 40 वर्ष से कम उम्र के थे। गंभीर चोटों के कारण हर पांच में से एक मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। भर्ती मरीजों में 27 प्रतिशत को आईसीयू में रखना पड़ा, जबकि 23 प्रतिशत मरीजों की सर्जरी की गई। एम्स के आंकड़ों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा नियमों, खासकर सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सीट बेल्ट न लगाना कार यात्रियों के लिए घातक बनता जा रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), के ट्रॉमा सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025-26 में सड़क दुर्घटना में घायल हुए 10 में से करीब 7 कार यात्री हादसे के समय सीट बेल्ट नहीं पहने हुए थे।
जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर (जेपीएनएटीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में घायल कार यात्रियों में 69 प्रतिशत लोगों ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। साल 2024-25 में यह आंकड़ा 46 प्रतिशत था। वहीं, सीट बेल्ट न पहनने वाले ड्राइवरों की संख्या भी 19 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है। ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. कामरान फारूक ने बताया कि सीट बेल्ट कार में सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। दुर्घटना के दौरान सीट बेल्ट न पहनने वाले लोगों को सिर, छाती और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि पिछली सीट पर बैठने वाले यात्रियों को भी सीट बेल्ट जरूर पहननी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में ट्रॉमा सेंटर में सड़क दुर्घटना के 19,472 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हैं। इनमें 77 प्रतिशत दोपहिया वाहन सवार, 17 प्रतिशत पैदल यात्री और 6 प्रतिशत कार सवार शामिल थे।
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दुर्घटनाओं के सबसे अधिक शिकार युवा
दुर्घटनाओं के सबसे अधिक शिकार युवा हुए। हादसों में घायल लोगों में 21 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 35 प्रतिशत और 31 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 23 प्रतिशत लोग थे। यानी लगभग 60 प्रतिशत मरीज 40 वर्ष से कम उम्र के थे। गंभीर चोटों के कारण हर पांच में से एक मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। भर्ती मरीजों में 27 प्रतिशत को आईसीयू में रखना पड़ा, जबकि 23 प्रतिशत मरीजों की सर्जरी की गई। एम्स के आंकड़ों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा नियमों, खासकर सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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