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Delhi News: लोगों की जान बचाना पड़ा भारी, उधार से चल रहा इलाज
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मालवीय नगर अग्निकांड के दौरान रोहित की कमर टूटी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में आग के दौरान लोगों की जान बचाना रोहित को भारी पड़ गया। हादसे के दौरान वह घायल हो गए थे, डॉक्टरों ने उनकी कमर में दो रॉड डाली हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें अभी लंबे समय तक आराम और इलाज की जरूरत है, जिसके कारण वह काम पर लौटने में असमर्थ हैं।
रोहित ने बताया कि मैं चाहता तो हादसे के दौरान भाग सकता था लेकिन मैंने लोगों की जान बचाना जरूरी समझा। मैं घर में अकेला कमाने वाला हूं। आज मैं कमा नहीं रहा हूं, जिससे मेरा परिवार सड़क पर आ गया है। ऐसे में 32 साल के रोहित आज खुद मदद के इंतजार में हैं। घटना के बाद रोहित का इलाज कई दिनों तक अस्पताल में चला। इलाज के दौरान परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। परिवार के लोगों ने बताया कि सीमित आय के कारण दवाइयों, अस्पताल खर्च और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो गया। रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह इलाज जारी रखा गया लेकिन अब और किसी बाहरी से मदद नहीं ली जा सकती है।
परिवार के मुताबिक, घर का पूरा खर्च पहले ही रोहित की आय पर निर्भर था लेकिन अब वह लंबे समय से काम पर नहीं जा पा रहे हैं, जिससे आय का कोई साधन नहीं बचा है। किराया, राशन, दवाइयां व अन्य दैनिक जरूरतें पूरी करना अब मुश्किल हो गया है। परिवार ने बताया कि कई बार उधार लेकर गुजारा करना पड़ रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में आग के दौरान लोगों की जान बचाना रोहित को भारी पड़ गया। हादसे के दौरान वह घायल हो गए थे, डॉक्टरों ने उनकी कमर में दो रॉड डाली हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें अभी लंबे समय तक आराम और इलाज की जरूरत है, जिसके कारण वह काम पर लौटने में असमर्थ हैं।
रोहित ने बताया कि मैं चाहता तो हादसे के दौरान भाग सकता था लेकिन मैंने लोगों की जान बचाना जरूरी समझा। मैं घर में अकेला कमाने वाला हूं। आज मैं कमा नहीं रहा हूं, जिससे मेरा परिवार सड़क पर आ गया है। ऐसे में 32 साल के रोहित आज खुद मदद के इंतजार में हैं। घटना के बाद रोहित का इलाज कई दिनों तक अस्पताल में चला। इलाज के दौरान परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। परिवार के लोगों ने बताया कि सीमित आय के कारण दवाइयों, अस्पताल खर्च और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो गया। रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह इलाज जारी रखा गया लेकिन अब और किसी बाहरी से मदद नहीं ली जा सकती है।
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परिवार के मुताबिक, घर का पूरा खर्च पहले ही रोहित की आय पर निर्भर था लेकिन अब वह लंबे समय से काम पर नहीं जा पा रहे हैं, जिससे आय का कोई साधन नहीं बचा है। किराया, राशन, दवाइयां व अन्य दैनिक जरूरतें पूरी करना अब मुश्किल हो गया है। परिवार ने बताया कि कई बार उधार लेकर गुजारा करना पड़ रहा है।
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