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BCI: लॉ कॉलेजों में गड़बड़ियों पर रोक के लिए BCI ने निरीक्षण के दिए निर्देश, शिक्षा की गुणवत्ता पर रहेगा फोकस

Sat, 25 Jul 2026 11:28 AM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Sat, 25 Jul 2026 11:28 AM IST
सार

BCI Inspection: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने देशभर के लॉ कॉलेजों के निरीक्षण का आदेश दिया है। इसका उद्देश्य संस्थानों में संभावित गड़बड़ियों पर रोक लगाना और कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। निरीक्षण के दौरान शैक्षणिक मानकों, बुनियादी सुविधाओं और नियमों के पालन की जांच की जाएगी।

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BCI orders law college inspections to curb irregularities, ensure quality education
बार काउंसिल ऑफ इंडिया - फोटो : Official Website (https://allindiabarexamination.com/)

विस्तार

BCI Inspection: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कानूनी शिक्षा देने वाले सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीन आने वाले हर लॉ कॉलेज (चाहे वह उनका अपना कॉलेज हो या उनसे जुड़ा हुआ) का तुरंत फिजिकल निरीक्षण करें और छह हफ्ते के अंदर यह प्रक्रिया पूरी करें।

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BCI के चेयरमैन और सीनियर वकील मनन कुमार मिश्रा ने वाइस-चांसलर, रजिस्ट्रार और लॉ फैकल्टी के प्रमुखों को एक सर्कुलर जारी किया। इसमें कहा गया कि इन निरीक्षणों का मकसद यह जांचना है कि क्या लॉ कॉलेज फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, टीचिंग और एकेडमिक सुविधाओं से जुड़े तय मानकों को पूरा कर रहे हैं या नहीं।

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लॉ कॉलेजों की निगरानी में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर BCI की सख्ती

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कहा है कि किसी लॉ कॉलेज को मान्यता (एफिलिएशन) देने के बाद विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। विश्वविद्यालयों को लगातार यह देखना चाहिए कि कॉलेज नियमों और शैक्षणिक मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। BCI के अनुसार, कई बार विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभाते, जिसकी वजह से अदालतों ने भी नाराजगी जताई है।

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BCI ने यह भी कहा कि उसे कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता है। कई मामलों में विश्वविद्यालय बिना सही जांच-पड़ताल और निरीक्षण के ही लॉ कॉलेजों को मान्यता दे देते हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और छात्रों को नुकसान हो सकता है।

लॉ कॉलेजों में सुविधाओं और शिक्षकों की होगी जांच

BCI के निर्देश के अनुसार, विश्वविद्यालयों को अपने सभी लॉ कॉलेजों का नियमित निरीक्षण करना होगा। इसके लिए विशेष निरीक्षण टीम बनाई जाएगी, जो कॉलेजों में कक्षाओं, पुस्तकालय, कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा, मूट कोर्ट, लीगल एड क्लीनिक, सेमिनार हॉल, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं की जांच करेगी।

इसके साथ ही विश्वविद्यालय यह भी सुनिश्चित करेंगे कि कॉलेजों में योग्य शिक्षक मौजूद हों, निर्धारित शिक्षण घंटे पूरे किए जा रहे हों और कक्षाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हों। BCI का कहना है कि सभी लॉ कॉलेजों को मान्यता अवधि के दौरान तय शैक्षणिक और बुनियादी मानकों को बनाए रखना होगा।

सप्ताहांत और शाम की कक्षाओं पर BCI की सख्ती

बीसीआई ने विश्वविद्यालयों को नियमित विधि पाठ्यक्रमों के अनिवार्य स्वरूप को कमजोर करने वाली किसी भी अनुचित सप्ताहांत, शाम या शिफ्ट-आधारित कक्षाओं की पहचान करने और उन्हें बंद करने का निर्देश भी दिया है।
 
इसमें कहा गया है कि ऐसी व्यवस्थाओं के तहत आगे कोई एडमिशन नहीं होना चाहिए और चेतावनी दी गई कि ऐसे कोर्स से ग्रेजुएट होने वालों को वकालत करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

इसमें कहा गया, "बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने निर्देश दिया है कि पूरी प्रक्रिया - जिसमें फिजिकल इंस्पेक्शन, जांच-पड़ताल, उचित आदेश जारी करना और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यूनिवर्सिटी-वार एक समेकित रिपोर्ट सौंपना शामिल है - छह हफ्ते के भीतर पूरी की जाए।"

BCI ने यूनिवर्सिटीज से यह भी कहा है कि वे तीन कामकाजी दिनों के भीतर सर्कुलर मिलने की पुष्टि करें, इसे लागू करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें और छह हफ्ते के भीतर यूनिवर्सिटी-वार अनुपालन रिपोर्ट सौंपें। उसने चेतावनी दी कि सही ढंग से इंस्पेक्शन न करने पर रेगुलेटरी कार्रवाई की जाएगी।

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