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Personal Growth: बदलाव को मौका समझें, न कि परेशानी; इन्हीं में छिपा है आगे बढ़ने का रास्ता

इंग्रिड लेमन, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू Published by: शाहीन परवीन Updated Thu, 05 Feb 2026 10:25 AM IST
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सार

Fear of Change: बदलाव से डरना इंसानी फितरत है, लेकिन सच यही है कि हर बदलाव अपने साथ सीखने, खुद को सुधारने और आगे बढ़ने का नया मौका लेकर आता है। जो बदलाव को अपनाते हैं, वही समय के साथ मजबूत और बेहतर बनते हैं।

Don’t Fear Change, It’s the First Step Toward Growth and Learning
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार

Personal Growth: आज नेतृत्व का मतलब सिर्फ दिशा दिखाना नहीं, बल्कि लगातार बदलती परिस्थितियों के साथ खुद को और अपनी टीम को ढालना है। तकनीक, बाजार और कार्यस्थल की अपेक्षाएं इतनी तेजी से बदल रही हैं कि पुराने नेतृत्व मॉडल अक्सर काम नहीं आते।

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पहले बदलाव को एक लक्ष्य बनाकर टीम को प्रेरित किया जाता था, लेकिन अब बदलाव खुद ही रोजमर्रा की सच्चाई बन चुका है। ऐसे दौर में सफल लीडर वही होता है, जो अनिश्चितता से घबराने के बजाय उसे काम करने के नए तरीके में बदल देता है और बदलाव को संगठन की संस्कृति का हिस्सा बना देता है।

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बदलाव एक सफर है

आधुनिक लीडर जानते हैं कि बदलाव कभी खत्म नहीं होता। वे कर्मचारियों को सिर्फ लाभ नहीं बताते, बल्कि बताते हैं कि अगर बदलाव नहीं होगा, तो क्या नुकसान हो सकता है। वे छोटी सफलताओं को मानते हैं, ईमानदारी से बात करते हैं और टीम की समझ बढ़ाने पर ध्यान देते हैं। भले ही कोई टीम सीधे प्रभावित न हो, वे उन्हें भी संगठन में हो रहे बदलावों से अवगत कराते हैं, ताकि हर कोई बदलाव का हिस्सा रहे।

सहज रहें

अनियंत्रित बदलावों से निपटने के लिए कर्मचारियों में सही सोच और सही तैयारी जरूरी है। इसके लिए उन्हें बदलाव से जुड़े कौशलों का लगातार अभ्यास कराना चाहिए, ताकि यह उनकी आदत बन जाए। बदलाव सिर्फ रणनीति नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव भी है। पहले लीडर केवल फायदे बताकर कर्मचारियों को आश्वस्त करते थे, लेकिन अब उन्हें यह सीखना होता है कि बदलाव के साथ सहज कैसे रहा जाए। जब कर्मचारी मानसिक रूप से तैयार होते हैं, तभी वे व्यवहार में भी बदल पाते हैं। यह नियमित अभ्यास उन्हें हर परिस्थिति में काम आने वाली एक स्वाभाविक क्षमता देता है।

अनुमान लगाना भी जरूरी

सफल लीडर केवल वर्तमान परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया नहीं करते, बल्कि आने वाले भविष्य का अंदाजा भी लगाते हैं। वे इस प्रक्रिया में अपने टीम को भी शामिल करते हैं। एआई नई नीतियां या बदलती बाजार प्रवृत्तियां, ये सभी बदलाव के संकेत हो सकते हैं। लीडर कर्मचारियों को इन विषयों पर शोध करने और अपनी टीम के साथ जानकारी साझा करने का काम देते हैं। इससे टीम मिलकर संभावित परिस्थितियों का विश्लेषण करती है और उनके सामना करने के लिए रणनीतियां बनाती करती है।

सकारात्मक रूप से अपनाएं

सफल लीडर बदलाव के बारे में सिर्फ सकारात्मक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। वह बताते हैं कि बदलाव क्यों हो रहा है, कौन प्रभावित होगा और इसका असर क्या होगा। टीम को सही जानकारी देकर वे उन्हें समझने और जुड़ने का मौका भी देते हैं। इस तरह बदलाव डरावना नहीं, बल्कि सीखने और सुधारने का अवसर बन जाता है। जब लीडर बदलाव को रोजमर्रा का हिस्सा बना देते हैं, तो संगठन लचीला, सक्षम और आत्मविश्वासी बन जाता है।

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