Tips: आप सभी को खुश नहीं कर सकते, एक्सपर्ट से समझें कार्यस्थल पर विपरीत परिस्थितियों से कैसे निपटें
काम में ज्यादा जिम्मेदारी लेने वाले लोग अक्सर अतिरिक्त काम के दबाव और अपेक्षाओं के कारण बर्नआउट का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में हर काम के लिए ‘हां’ कहने से बचना, रिश्तों को समय देना, थकान व्यक्त करना और जिम्मेदारियां साझा करना काम और निजी जीवन का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
विस्तार
कार्यस्थल पर कई ऐसे लोग होते हैं, जो अपने काम और जिम्मेदारियों में बहुत अनुशासित और समर्पित रहते हैं। उनके इसी कारण लोग उन पर अधिक भरोसा भी करते हैं। लेकिन इसका एक नकारात्मक पहलू भी है। अक्सर ऐसे लोगों पर और जिम्मेदारी लाद दी जाती है। कई बार ऐसा भी होता है कि ऐसे मेहनती लोग काम की अधिकता के कारण बर्नआउट का शिकार होने लगते हैं। कई बार लगातार काम करने की समस्या उनके निजी जीवन व रिश्तों को भी प्रभावित करने लगती है। अगर आप भी ऐसे लोगों में शामिल हैं, तो निम्नलिखित उपाय आपके लिए कारगर साबित हो सकते हैं।
हरदम 'हां' कहने से बचें
भले ही आत्म-नियंत्रण आपकी ताकत हो, आप दबाव में भी शांत रहते हों, और कठिन परिस्थितियों को संतुलित ढंग से संभालते हों। फिर भी आपका यही गुण कई बार आपके लिए चुनौती बन जाता है। इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप हर काम के लिए तुरंत 'हां' न कहें और खुले संवाद को महत्व दें, ताकि जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बना रहे।
रिश्तों को समय दें
लगातार बढ़ता मानसिक बोझ और हर समय खुद को नियंत्रित रखने की कोशिश व्यक्ति की भावनात्मक ऊर्जा को धीरे-धीरे कम कर देती है। जब दिमाग लगातार काम, जिम्मेदारियों के बोझ और अपेक्षाओं में उलझा रहता है, तो व्यक्ति शारीरिक रूप से मौजूद होते हुए भी भावनात्मक रूप से अपनों के बीच में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाता। इसलिए जरूरी है कि काम और निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमाएं तय की जाएं ताकि रोजमर्रा की भागदौड़ में भी रिश्तों को समय दे सकें।
अपनी थकान व्यक्त करें
ऐसे लोग बाहर से हमेशा शांत, संतुलित और सक्षम दिखाई देते हैं। उनकी कार्यकुशलता के कारण लोग उनको थकान को समझ नहीं पाते और उनसे लगातार ऊंची अपेक्षाएं बनाए रखते हैं। समस्या तब बढ़ती है, जब व्यक्ति खुद भी अपनी बकान को व्यक्त नहीं करता और सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश करता रहता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते अपनी वास्तविक स्थिति और काम के बोझ के बारे में खुलकर बात की जाए और जरूरत पड़ने पर विराम लेने में संकोच न करें, ताकि संतुलन बना रहे।
ऊर्जा बनाए रखें
जब आप पर काम का बोझ अधिक होता है और हर काम को अच्छे ढंग से करने की कोशिश में आप अपनी सीमाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, तब शुरुआत में यह समर्पण जैसा लगता है, लेकिन समय के साथ यही आदत थकावट और चिड़चिड़ापन का कारण बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि ऐसे लक्ष्य तय करें, जो वास्तविक और संभव हों, और यह समझें कि हर जिम्मेदारी अकेले उठाना जरूरी नहीं है। जरूरत पड़ने पर काम बांटना और सहायता लेना कमजोरी नहीं, चल्कि कामों को प्रबंधित करने की आपकी कला को दर्शाएगा।
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