Career Tips: दूसरों की गलतियों से सीख लें, उनसे सीख लेकर अपनी समझ और क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान दें
The Conversation: दूसरों की परेशानियों से प्रसन्न होने की आम मानवीय भावना को जर्मन भाषा में 'शाडेनफ्रायड' कहा जाता है। कार्यस्थल पर अक्सर ऐसा होता रहता है, लेकिन इसे अनैतिक व्यवहार में बदलने से रोकना बेहद जरूरी है। यहां बताए एक्सपर्ट टिप्स की मदद आप दूसरों की गलती से सीखकर खुद को बेहतर बना सकते हैं।
विस्तार
Career Tips: कार्यस्थल पर कभी-कभी हम मन ही मन किसी सहकर्मी के साथ कुछ गलत होने पर खुशी महसूस कर लेते हैं। भले ही हम इसे खुले तौर पर स्वीकार न करें, लेकिन यह भावना अनजाने में कई लोगों के भीतर पैदा हो सकती है। दूसरों की परेशानियों से प्रसन्न होने की इस आम मानवीय भावना को जर्मन भाषा में 'शाडेनफ्रायड' कहा जाता है। प्रतिस्पर्धी कामकाजी माहौल ऐसी भावनाओं को और अधिक प्रबल चना सकता है।
हालांकि, इस भावना को अपने आप में बुरा मानना जरूरी नहीं, लेकिन इसे अनैतिक व्यवहार में बदलने से रोकना बेहद जरूरी है। शोथ बताते हैं कि सही समझ और आत्म-नियंत्रण के जरिये इस भावना को संतुलित किया जा सकता है।
भावना को पहचानें
यह वह भावना है जब आप किसी और की परेशानी को देखकर अपने आप को बेहतर महसूस करते हैं। हम अनजाने में खुद को किसी और से तुलना करके ऊपर उठाने की कोशिश करते हैं। बजाय इसके अगर संभव हो तो सहयोग करें और मदद का हाथ बढ़ाएं। इससे नकारात्मक भावना कम होती है।
चिंतन करें
जब ऐसी भावना आए, तो थोड़ा रुककर खुद से ईमानदारी से पूछे कि क्या मैं सच में ऐसा महसूस करना चाहता हूं? क्या कभी ऐसी ही स्थिति मेरे साथ भी हो सकती है? और क्या मैं इस असफलता से कुछ सीख सकता हूं? जब आप खुद को उनकी जगह रखकर देखने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें सिर्फ एक गलती करने बाला व्यक्ति समझने के बजाय इन्सान के रूप में समझ पाते हैं, और यही सोच इस तरह की नकारात्मक भावनाओं को कम करने में मदद करती है।
नकारात्मकता से बचें
जब किसी और की असफलता देखकर मन में नकारात्मक या खुशी महसूस हो, तो यह बहुत जरूरी है। कि वह भावना आपके व्यवहार में न दिखे। इस भावना के कारण गपशप करना, किसी सहकर्मी की छवि खराब करना या जानबूझकर सहयोग न देना कार्यस्थल के लिए बेहद हानिकारक होता है। ऐसे व्यवहार से टीम में सहयोग की भावना कमजोर पड़ती है और एक नकारात्मक कार्यसंस्कृति बनती है, जहां लोग एक-दूसरे का साथ देने के बजाय गिराने की सोचने लगते हैं। इसलिए भावनाओं को पहचानना ठीक है, लेकिन उन्हें ऐसे कामों में बदालने से बचना जरूरी है, जो संगठन और रिश्तों दोनों को नुकसान पहुंचाएं।
आत्म-सुधार में लगे
किसी सहकमी की असफलता पर ध्यान देने के बजाय, इस मौके की खुद को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करें। सोचें कि आप अपने काम, कौशल और सोच को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं। जब आप अपनी ऊर्जा सीखने, मेहनत करने और अपने पेशेवर विकास में लगाते हैं, तो दूसरों की तुलना अपने आप कम हो जाती है और आप अधिक सकारात्मक व आत्मविश्वासी महसूस करते हैं।
-द कन्वर्सेशन
