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Self Respect: सबको खुश करना मुमकिन नहीं, इसलिए अपनी खुशी और आत्मसम्मान को प्राथमिकता दीजिए

माइकल गेरवाइस, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू Published by: शाहीन परवीन Updated Wed, 28 Jan 2026 09:02 AM IST
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सार

Self-worth: हर किसी को खुश करने की कोशिश करना आसान लगता है, लेकिन इससे अक्सर हम खुद को भूल जाते हैं। अपनी अहमियत और आत्मसम्मान को समझना उतना ही ज़रूरी है जितना दूसरों की तवज्जो देना।

You Can’t Please Everyone: Why Respecting Your Self-Worth Matters
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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Personal Value: अक्सर हम सिर्फ इस बात पर ध्यान देते हैं कि लोग हमारे बारे में क्या सोच रहे हैं, हमें पसंद कर रहे हैं या नहीं, हमारी तारीफ हो रही है या नहीं। धीरे-धीरे यही आदत हमारे आत्म-सम्मान को दूसरों के हाथों में सौंप देती है। सच यह है कि हर इन्सान की सोच अलग होती है, इसलिए सबको खुश करना संभव नहीं। जब आप खुद को समझना, स्वीकार करना और अपने मूल्यों, मेहनत व लक्ष्यों पर ध्यान देना सीखते हैं, तो अंदर से संतुष्टि मिलती है। यही आंतरिक संतुष्टि आपको मजबूत बनाती है और दूसरों की राय आपके आत्म-सम्मान को प्रभावित नहीं कर पाती।

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आंतरिक संतुष्टि विकसित करें

अपने आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपके लिए वास्तव में क्या मायने रखता है और आपके मूल्य क्या हैं। जब आप अपने काम और फैसले इन्हीं मूल सिद्धांतों के अनुसार लेते हैं, न कि दूसरों की उम्मीदों के हिसाब से, तो भीतर से संतुष्टि मिलती है। साथ ही, अपनी छोटी-बड़ी उपलब्धियों और अच्छी खूबियों को पहचानना और उनका जश्न मनाना सीखें, क्योंकि इससे खुद पर भरोसा बढ़ता है। ऐसी गतिविधियां अपनाएं, जो आपको सुकून और खुशी दें और अपने लक्ष्यों पर शांत मन से काम करते हुए हर प्रगति पर खुद को शाबाशी दें। यही आदतें आपको संतुलित और आत्मविश्वासी बनाती हैं।

अपनी समझ को प्राथमिकता दें

अपने भीतर उठने वाले नकारात्मक विचारों को सच मान लेने के बजाय पहले उन्हें पहचानें और उनकी जगह सकारात्मक और यथार्थपूर्ण सोच रखें। मन को समझने के लिए रोज थोड़ा समय अकेले बिताएं, ताकि आप अपनी भावनाओं, जरूरतों और थकान को पहचान सकें। जिन लोगों की बातें आपको कमजोर महसूस कराती हैं या आपकी ऊर्जा खत्म कर देती हैं, उनसे दूरी बनाना गलत नहीं है। यह आत्म-सुरक्षा का हिस्सा है। साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि हर व्यक्ति की राय उसके अपने अनुभव और सोच से बनती है, इसलिए किसी का निर्णय आपकी पूरी काबिलियत या मूल्य को तय नहीं करता। अंत में, अपने लिए खुद मार्गदर्शक बनें और बाहरी प्रतिक्रियाओं की जगह अपने सही-गलत की समझ को प्राथमिकता दें।

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सहायता लेना कोई गलत नहीं

अपने जीवन में ऐसे लोगों को जगह दें, जो आपको समझें, सम्मान दें और जिनके साथ आप सुरक्षित महसूस करें। अगर ऐसा कोई तुरंत न मिले, तो खुद के लिए ही मित्र बनें। साथ ही, सोशल मीडिया और लगातार खबरें देखने से मन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, इसलिए इनके प्रभाव को सीमित करें और बार-बार दूसरों से पुष्टि पाने की आदत से बाहर निकलने की कोशिश करें। यदि यह समस्या गहरी हो और अकेले संभालना मुश्किल लगे, तो पेशेवर सहायता लेना बिल्कुल सही कदम है।

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