CBSE: सीबीएसई ने लॉन्च किया 'पेरेंटिंग कैलेंडर' 2026-27, स्कूल और अभिभावकों के बीच बढ़ेगा तालमेल
CBSE Parenting Calendar: सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 'पेरेंटिंग कैलेंडर' लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य स्कूलों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा छात्रों के शैक्षणिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देना है।
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CBSE: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने बुधवार को एकेडमिक सेशन 2026-27 के लिए 'पेरेंटिंग कैलेंडर' लॉन्च किया। इसका मकसद स्कूलों और माता-पिता के बीच व्यवस्थित जुड़ाव को मजबूत करना और छात्रों की सर्वांगीण भलाई को बढ़ावा देना है।
इस कैलेंडर को CBSE के ऑफिशियल YouTube चैनल पर लाइव इवेंट के जरिए लॉन्च किया गया, जिसमें स्कूल के प्रिंसिपल, टीचर, काउंसलर, वेलनेस एजुकेटर और माता-पिता शामिल हुए।
बोर्ड ने एक बयान में कहा, "नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के विजन के अनुरूप, CBSE ने एकेडमिक सेशन 2025-26 में यह पहल शुरू की थी। इसका साफ मकसद माता-पिता और स्कूलों के बीच साझेदारी को मजबूत करना और छात्रों के सर्वांगीण कल्याण को बढ़ावा देना था।"
छात्रों के समग्र विकास और अभिभावकों की भागीदारी पर जोर
बोर्ड ने बताया कि इस पहल को देशभर में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। स्कूलों, अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे इसकी उपयोगिता और प्रभाव साबित हुआ है।
मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर, CBSE Parenting Calendar 2026-27 को और बेहतर बनाया गया है। इसमें अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने, शिक्षकों की निगरानी में गतिविधियां आयोजित करने और छात्रों के मानसिक, सामाजिक व शैक्षणिक विकास को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं।
CBSE ने कहा कि नया पेरेंटिंग कैलेंडर स्कूलों और अभिभावकों के बीच नियमित और व्यवस्थित संवाद को बढ़ावा देगा, जिससे छात्रों के समग्र विकास में मदद मिलेगी।
समावेशन और बदलते शिक्षा माहौल पर फोकस
CBSE ने कहा कि नए पेरेंटिंग कैलेंडर में अभिभावकों और स्कूलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए नई गतिविधियां जोड़ी गई हैं। इसमें शिक्षकों की निगरानी में कार्यक्रम और छात्रों के मानसिक, सामाजिक व शैक्षणिक विकास को बेहतर बनाने के लिए विशेष पहलें शामिल हैं। साथ ही, आज के समय में बच्चों की परवरिश के दौरान माता-पिता को आने वाली चुनौतियों से निपटने में भी यह कैलेंडर उनकी मदद करेगा।
इसके दायरे को बेहतर बनाने के लिए इसमें नए हिस्से जोड़े गए हैं। इनमें अलग-अलग तरह के सीखने वालों के लिए बराबरी वाले तौर-तरीकों को बढ़ावा देने के मकसद से 'समावेशन' (inclusion) पर खास हिस्से और माता-पिता व छात्रों को बदलते सिलेबस और पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी उम्मीदों के हिसाब से ढलने में मदद करने के लिए 'बदलावों का सामना करने' (coping with changes) से जुड़े हिस्से शामिल हैं।
स्कूलों से कैलेंडर अपनाने की अपील
माता-पिता के लिए वर्कशॉप वाले हिस्से को भी विकास से जुड़े नज़रिए के साथ और मजबूत किया गया है, जिससे स्कूल उम्र और हालात के हिसाब से सही जुड़ाव वाले प्रोग्राम बना सकें।
CBSE के अनुसार, इस कैलेंडर को इस तरह से बनाया गया है कि इससे माता-पिता और बच्चे के बीच सार्थक बातचीत को बढ़ावा मिले, घर और स्कूल के बीच साझेदारी मजबूत हो और माता-पिता अपने बच्चे के विकास के सफर में सक्रिय रूप से शामिल हो सकें।
बोर्ड ने कहा, "कुल मिलाकर, इस पहल का मकसद एक ऐसा माहौल बनाना है जो हर सीखने वाले के सर्वांगीण विकास, भलाई और मुश्किलों का सामना करने की क्षमता को बढ़ावा दे।"
बोर्ड ने बताया कि यह कैलेंडर उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। साथ ही, बोर्ड ने उससे जुड़े स्कूलों से अपील की है कि वे छात्रों के लिए एक ऐसा माहौल बनाने के लिए इसे अपनाएं और लागू करें जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद करे, सबको साथ लेकर चले और उन्हें सहयोग दे।