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CUET से बदला DU में दाखिले का ट्रेंड: वीसी बोले- असमानता कम हुई, अब हर कोने से आ रहे हैं प्रतिभाशाली छात्र

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Akash Kumar Updated Wed, 24 Jun 2026 07:04 PM IST
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सार

CUET: दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि सीयूईटी ने देशभर के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किया है। इसके जरिए अब विभिन्न बोर्डों, राज्यों, छोटे शहरों और गांवों के छात्रों को भी डीयू में प्रवेश मिल रहा है। उन्होंने नई शिक्षा नीति, चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम, शोध और एआई आधारित शिक्षा पर भी विस्तार से बात की।
 

DU VC Yogesh Singh Says CUET Ensures Equal Opportunity, Boosts Diversity in University Admissions
Yogesh Singh, DU VC - फोटो : PTI
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विस्तार

CUET: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) ने देशभर के छात्रों के लिए एक समान अवसर उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर है क्योंकि इससे अलग-अलग शिक्षा बोर्डों और राज्यों के विद्यार्थियों को समान आधार पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलता है।



उन्होंने कहा कि पहले विश्वविद्यालय में कुछ चुनिंदा बोर्डों के छात्रों का दबदबा देखने को मिलता था, क्योंकि विभिन्न बोर्डों में अंक देने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती थी। सीयूईटी लागू होने के बाद अब देश के अधिकांश राज्यों, बड़े शहरों, छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं।

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'दिल्ली विश्वविद्यालय मिनी इंडिया है'

योगेश सिंह ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय देश की विविधता को दर्शाता है। उनके अनुसार, अब प्रवेश प्रक्रिया अधिक समावेशी हो गई है और विभिन्न सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों की भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस बदलाव का स्वागत करता है।

नीट विवाद के बीच सीयूईटी का किया समर्थन

नीट यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर चल रही बहस के बीच कुलपति ने सीयूईटी का समर्थन किया। उन्होंने माना कि परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन उनका समाधान संभव है। उनका कहना था कि सीयूईटी के माध्यम से विश्वविद्यालयों को प्रतिभाशाली और मेधावी छात्र मिल रहे हैं।

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चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पर क्या बोले?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत शुरू किए गए चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पर बात करते हुए योगेश सिंह ने बताया कि इस बार करीब 25,000 छात्र चौथे वर्ष में अध्ययन कर रहे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय हर साल लगभग 70,000 छात्रों को प्रथम वर्ष में प्रवेश देता है।

उन्होंने बताया कि एनईपी के तहत छह सेमेस्टर पूरा करने के बाद छात्र तीन वर्षीय डिग्री लेकर बाहर निकल सकते हैं। पहले बैच के लगभग 45,000 छात्रों ने यह विकल्प चुना था।

चौथे वर्ष में रिसर्च और उद्यमिता के अवसर

कुलपति ने कहा कि चौथे वर्ष में छात्रों को रिसर्च, उद्यमिता, प्रोजेक्ट कार्य और सामाजिक गतिविधियों जैसे कई विकल्प दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में छात्रों के प्रोजेक्ट्स की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई थी, जिसे अच्छा प्रतिसाद मिला।

नए ढांचे से बढ़ीं बुनियादी ढांचे की चुनौतियां

योगेश सिंह ने स्वीकार किया कि चार वर्षीय कार्यक्रम लागू होने के बाद विश्वविद्यालय और कॉलेजों के सामने बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां आई हैं। उन्होंने कहा कि पहले कॉलेज मुख्य रूप से शिक्षण पर केंद्रित थे, लेकिन अब उनसे शोध, नवाचार और उद्यमिता को भी बढ़ावा देने की अपेक्षा की जा रही है।

2,000 करोड़ रुपये से हो रहा विस्तार कार्य

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार और उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी (HEFA) के सहयोग से विश्वविद्यालय में विस्तार कार्य चल रहा है। इसके लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये की सहायता मिली है और कई नए भवनों का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, इन परियोजनाओं को पूरा होने में समय लगेगा।

एआई और नई तकनीकों पर बढ़ा फोकस

कुलपति ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रहा है। विश्वविद्यालय में एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस से जुड़े कई पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत इन विषयों में माइनर कोर्स भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

ऑनलाइन कोर्स और 'सेमेस्टर अवे' योजना पर काम

योगेश सिंह ने बताया कि छात्रों को स्वयं (SWAYAM) और अन्य ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के जरिए क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा भी दी जा रही है। इसके अलावा प्रस्तावित "सेमेस्टर अवे" कार्यक्रम पर भी काम चल रहा है और आवश्यक संशोधनों के बाद इसे फिर से कार्यकारी परिषद के समक्ष रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों के लिए अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराना है और उनकी जरूरतें हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

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