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Samwad: भविष्य में ऐसे लोगों की मांग बढ़ेगी जो AI को समझते हुए काम करेंगे, डॉ. तृप्ता की शिक्षकों को खास सलाह

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Wed, 24 Jun 2026 02:50 PM IST
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सार

Uttarakhand Samwad 2026: देहरादून में आयोजित उत्तराखंड संवाद 2026 में एआई और शिक्षा के भविष्य पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान डॉ. तृप्ता ठाकुर ने कहा कि AI शिक्षा में बड़े बदलाव ला रहा है, लेकिन इसके लिए शिक्षकों को भी पूरी तरह तैयार होना जरूरी है।

Uttarakhand Samwad 2026: AI in Education – Revolution or Challenge? Dr. Tripta Thakur’s View
Uttarakhand Samwad 2026 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

Uttarakhand Samwad 2026:  Uttarakhand Samwad 2026: देहरादून में आयोजित अमर उजाला संवाद के मंच पर एआई, शिक्षा और भविष्य विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस चर्चा में यूटीयू की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने शिक्षा, तकनीक और भविष्य के कौशल को लेकर अपने विचार साझा किए।



शिक्षा में AI का इस्तेमाल एक चुनौती है या खतरा? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। हर नई वैज्ञानिक तकनीक की तरह इसमें भी अवसर (opportunities) और चुनौतियां (challenges) दोनों मौजूद हैं।
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विज्ञान जब आगे बढ़ता है तो वह समाज को नई सुविधाएं और विकास के रास्ते देता है, लेकिन साथ ही कुछ खतरे भी पैदा करता है। उदाहरण के लिए, जब परमाणु ऊर्जा (nuclear energy) का विकास हुआ तो उससे बिजली उत्पादन जैसे लाभ मिले, लेकिन परमाणु बम जैसी विनाशकारी शक्ति भी सामने आई। इसी तरह AI को भी हमें दोनों दृष्टिकोण से देखना होगा।
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आज के समय में सबसे बड़ी चिंता यह है कि छोटे बच्चों के हाथ में समय से पहले स्मार्टफोन पहुंच रहा है, जो उनके लिए उचित नहीं माना जाता। कई देशों, जैसे यूके और अमेरिका में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए स्मार्टफोन उपयोग पर नियंत्रण की बातें भी सामने आई हैं।

यह भी पढ़ें: बच्चे AI इस्तेमाल कर रहे, शिक्षकों के लिए इसे अपनाना बड़ी चुनौती, मंच पर बोले तेजस्वी घनशाला

तकनीक के साथ जरूरी है शिक्षक-छात्र संवाद की भूमिका

AI के क्षेत्र में अवसर बहुत अधिक हैं। अब कोई भी विद्यार्थी घर बैठे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों से सीख सकता है। इससे शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और ज्ञान तक पहुंच आसान हो जाएगी।

हालांकि, शिक्षा केवल तकनीक से पूरी नहीं होती। शिक्षक और छात्र के बीच सीधा संवाद और चर्चा (interaction) बहुत जरूरी है। कई बार हम किसी विषय को तब बेहतर समझते हैं जब हम उस पर शिक्षक से सवाल-जवाब करते हैं और चर्चा करते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों के लिए यह है कि AI बहुत तेजी से विकसित हो रहा है, जबकि अधिकांश शिक्षक अभी इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। इसलिए सबसे पहले आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षकों को AI के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जाए। आने वाले समय में ऐसे शिक्षकों की मांग बढ़ेगी जो तकनीक और पारंपरिक शिक्षा दोनों को साथ लेकर चल सकें। AI शिक्षा में क्रांति लाएगा, लेकिन उसका सही उपयोग तभी संभव है जब शिक्षक और विद्यार्थी दोनों इसके लिए तैयार हों।

AI को समझने वालों की बढ़ेगी मांग

आगे उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसे लोगों की मांग तेजी से बढ़ेगी जो AI को अच्छी तरह समझते हों। खासकर उन इंजीनियर्स और पेशेवरों को अधिक अवसर मिलेंगे, जिन्हें AI की जानकारी और उसका उपयोग करना आता है।

उन्होंने कहा कि AI हमारे लिए एक उपयोगी टूल और साधन बनेगा, लेकिन इसका इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ करना होगा।

डॉ. तृप्ता ठाकुर ने बताया कि भारत सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है। सरकार यह समझने और तय करने की कोशिश कर रही है कि AI को शिक्षा से बेहतर तरीके से कैसे जोड़ा जाए और इसके उपयोग को किस तरह नियंत्रित (रेगुलेट) किया जाए, ताकि इसका लाभ छात्रों को मिल सके।

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