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Delhi: भाषाई विविधता को बढ़ावा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने 55 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित पुस्तकों का किया विमोच
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शाहीन परवीन
Updated Thu, 08 Jan 2026 01:55 PM IST
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सार
Indian languages: केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भारतीय भाषा समिति की 55 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रधान ने कहा कि भारतीय भाषाओं को नष्ट करने के कई प्रयास हुए, लेकिन वे समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं और आज भी हमारी संस्कृति और ज्ञान का अभिन्न हिस्सा हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
- फोटो : ANI
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विस्तार
Education Minister: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी एकता की शक्ति हैं। भारतीय भाषाओं को नष्ट करने के प्रयासों के बाद भी वे समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं। औपनिवेशिक काल की मैकाले मानसिकता के विपरीत, भारतीय सभ्यता ने हमेशा भाषाओं को संवाद और सांस्कृतिक सद्भाव के सेतु के रूप में देखा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय भाषाओं में शिक्षा के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है। आज भारत विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण बना हुआ है, जहां भाषा समाज को जोड़ने का माध्यम है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री दिल्ली के कौशल भवन में भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में 55 साहित्यिक कृतियों के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुसूचित सूची में अधिक भाषाओं को शामिल करने से लेकर शास्त्रीय ग्रंथों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद और भारतीय भाषाओं में पढ़ाई का मौका दिया जा रहा है। इससे, भारतीय भाषाओं को मजबूती तो लगातार बढ़ावा मिला है। उनका मानना है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। इसलिए हमें सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने पर काम करना होगा।
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भारत लोकतंत्र की जननी है और भाषाई विविधता से समृद्ध देश है। यह समाज का दायित्व है कि वह राष्ट्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक संपदा का संरक्षण करे और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में जागरूक करें। कुल 55 साहित्यिक कृतियों में से केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) की शास्त्रीय भाषा उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा तैयार 41 पुस्तकें, केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी) द्वारा प्रकाशित 13 पुस्तकें और तिरुक्कुरल सांकेतिक भाषा श्रृंखला शामिल हैं।