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Hindi News ›   Education ›   Hindi-Urdu Literary Evening at JNU Highlights Poetry and Cultural Harmony

JNU: जेएनयू में हिन्दी-उर्दू का संगम, कवि सम्मेलन में गूंजे कविता-शायरी के स्वर; साहित्य के संरक्षण पर जोर

Sun, 12 Jul 2026 12:53 PM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Sun, 12 Jul 2026 12:53 PM IST
सार

JNU Hindi Urdu Mushaira: जेएनयू में आयोजित मुशायरा और कवि सम्मेलन में हिन्दी और उर्दू साहित्य का खूबसूरत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया तथा साहित्य, भाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

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Hindi-Urdu Literary Evening at JNU Highlights Poetry and Cultural Harmony
जेएनयू, JNU - फोटो : JNU: @www.jnu.ac.in/main/

विस्तार

JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सभागार में मुशायरा एवं कवि सम्मेलन हुआ। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था रौशनाई की ओर से महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में हिन्दी और उर्दू जगत के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शायरों, कवियों, शिक्षाविदों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ गायिका एवं साहित्यकार डॉ. किरण तिवारी ने सरस्वती वंदना की भावपूर्ण प्रस्तुति से किया। संस्था के संरक्षक एवं पीएफ कमिश्नर आलोक यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। रौशनाई की संस्थापक एवं शायरा सिया सचदेव ने संस्था की स्थापना की प्रेरणा साझा करते हुए कहा कि यह संस्था प्रेम, विश्वास, संघर्ष तथा उम्मीद का प्रतीक है।
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समारोह के दौरान मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी संस्कृति विभाग की निदेशक नुसरत मेहदी को उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान के लिए महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। डॉ. राजेश शर्मा ने महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान की परंपरा, उसके उद्देश्य और स्वर्गीय महेंद्र सिंह के व्यक्तित्व एवं समाजसेवा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. अल्पना सुहासिनी ने किया।
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मुशायरा एवं कवि सम्मेलन में डॉ. अखलाक आहन (जेएनयू), सुधाकर पाठक, डॉ. किरण तिवारी, अमित शुक्ला, ज्योति जुल्का, पुष्प राज, अभिषेक शर्मा और आरिश रईस ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। समापन पर सिया सचदेव ने कहा कि रौशनाई भविष्य में भी भारतीय भाषाओं के साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों का सिलसिला जारी रखेगी।

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