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Hindi News ›   Education ›   HUL's First Female CEO Priya Nair: Story Behind Kan Khajura Teson & Top Hurun India Professional CEO Rank

HUL की पहली महिला CEO प्रिया नायर: हासिल किया हुरुन इंडिया वूमेन लीडर्स में शीर्ष स्थान, पढ़ें प्रेरणादायक सफर

Mon, 03 Aug 2026 11:29 AM IST
Akash Kumar ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Akash Kumar Updated Mon, 03 Aug 2026 11:29 AM IST
सार

हार्वर्ड से पढ़ाई कर चुकी हैं। मां से प्रेरणा लेकर हमेशा कुछ नया सीखने की ललक को वह अपनी सबसे बड़ी ताकत बताती हैं। नई चुनौतियां लेने के जुनून के कारण उन्हें ‘कॉरपोरेट एथलीट’ कहा जाता है। ‘कान खजूरा टेसन’ जैसे अभियान की सूत्रधार प्रिया नायर हिंदुस्तान यूनिलीवर की पहली महिला सीईओ भी बनी हैं।
 

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HUL's First Female CEO Priya Nair: Story Behind Kan Khajura Teson & Top Hurun India Professional CEO Rank
प्रिया नायर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कान खजूरा टेसन की कहानी: 2013-14 का दौर। बिहार व झारखंड के सैकड़ों गांवों में घंटों बिजली गायब रहती थी। न टीवी था, न एफएम रेडियो की पहुंच। बड़ी-बड़ी मार्केटिंग रणनीतियां यहां आकर बेअसर हो जाती थीं। लेकिन, हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) की मार्केटिंग टीम में एक ऐसी नेतृत्वकर्ता थीं, जिन्होंने गौर किया कि यहां के लगभग हर ग्रामीण की जेब में एक कीपैड फोन जरूर है। बस, इसी सोच से जन्म हुआ ऐतिहासिक विचार ‘कान खजूरा टेसन’ (कनखजूरा स्टेशन) का।

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योजना बेहद सरल थी। ग्रामीणों को एक टोल-फ्री नंबर पर मिस कॉल देनी होती थी। कुछ ही सेकंड में उनके फोन पर वापस कॉल आती और गाने, चुटकुले व खेती-बाड़ी संबंधी उपयोगी जानकारी सुनाई जाती। इन्हीं के बीच एचयूएल के उत्पादों के विज्ञापनों का प्रचार भी होता।
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कुछ ही महीनों में यह कार्यक्रम भारत का सबसे बड़ा मोबाइल एंटरटेनमेंट चैनल बन गया और विज्ञापन जगत के प्रतिष्ठित कांस लायंस में तीन गोल्डन अवॉर्ड भी जीते। इस सफलता के पीछे का दिमाग था प्रिया नायर का, जो फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में वह एचयूएल के 92 साल के इतिहास में पहली महिला सीईओ बनीं और ‘कैंडेर हुरुन इंडिया वूमेन लीडर्स लिस्ट-2026' में शीर्ष ‘प्रोफेशनल सीईओ' चुनी गईं।

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1995 में शुरू हुआ सफर

प्रिया नायर का जन्म 31 मार्च, 1972 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ। उनके पिता सुकुमार विश्वनाथ नायर थे, जिनका अब निधन हो चुका है, जबकि उनकी मां डॉ. सुधा सुकुमार नायर पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से बीकॉम और सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट, पुणे से एमबीए किया।

1995 में उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) में अपने कॅरिअर की शुरुआत की और डव, रिन, एक्स व पेप्सोडेंट जैसे ब्रांड्स की मार्केटिंग में अहम भूमिका निभाई। प्रिया ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम को भी पूरा किया है। उनके पति मनमोहन नायर बिजनेसमैन हैं और उनकी एक बेटी, महक है।

फील्ड से सीखी मार्केटिंग की बारीकियां

होम केयर डिवीजन की जिम्मेदारी संभालते हुए प्रिया नायर ने सिर्फ लैब रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं किया। वह गांवों में जाकर उपभोक्ताओं की जरूरतों और उनकी रोजमर्रा की चुनौतियों को करीब से समझती थीं, जिसके आधार पर 'कम पानी में ज्यादा सफाई' वाला फॉर्मूला सफल हुआ। उन्हें भारत में फैब्रिक सॉफ्टनर श्रेणी को लोकप्रिय बनाने और 'लक्मे' को डिजिटल जेनरेशन के हिसाब से री-ब्रांड करने का भी श्रेय दिया जाता है।

30 साल का सफर, एक ही कंपनी के साथ

प्रिया नायर ने करीब 30 वर्षों तक हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) में काम किया। एंट्री-लेवल मैनेजर के रूप में शुरुआत कर वह अपनी मेहनत और नेतृत्व क्षमता के दम पर सीईओ बनीं। वह उपभोक्ताओं की जरूरतों को समझने पर जोर देती हैं, इसलिए उन्हें 'कंज्यूमर फर्स्ट लीडर' कहा जाता है। एचयूएल से पहले वह यूनिलीवर की ग्लोबल चीफ मार्केटिंग ऑफिसर और ब्यूटी एंड वेलबीइंग की ग्लोबल प्रेसिडेंट भी रहीं, जहां उन्होंने अरबों यूरो के कारोबार का नेतृत्व किया।

लंदन का 'कल्चरल शॉक' व भारतीय जड़ें

जब प्रिया यूनिलीवर के वैश्विक मुख्यालय (लंदन) पहुंचीं, तो वहां काम करने का तरीका काफी फॉर्मल और डाटा-ओरिएंटेड था। प्रिया ने 'डाटा विथ एम्पैथी' के जरिये अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने बोर्ड मीटिंग्स में सिर्फ ग्राफ दिखाने के बजाय उपभोक्ताओं की असल कहानियां सुनाईं, जिससे उनके फैसले ज्यादा असरदार साबित हुए। उनके सहयोगियों के अनुसार, प्रिया नई-नई जिम्मेदारियां और चुनौतियां लेने से कभी पीछे नहीं हटतीं, इसलिए उन्हें कई लोग 'कॉरपोरेट एथलीट' भी कहते हैं।

25 साल नौकरी, फिर पढ़ाई

प्रिया नायर 'लाइफलॉन्ग लर्निंग' में गहरा विश्वास रखती हैं। करीब 25 साल कॉरपोरेट जगत में बिताने के बाद भी उन्होंने अपनी मां के प्रोत्साहन पर हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के लीडरशिप प्रोग्राम में दाखिला लिया। दिलचस्प बात यह है कि इसी समय उनकी बेटी भी विश्वविद्यालय में कदम रखने जा रही थीं। उनकी मां आज भी मुंबई में कम शुल्क पर क्लिनिक चलाती हैं, जबकि उनकी बहन टाटा मेमोरियल अस्पताल में कैंसर सर्जन हैं। प्रिया कई बार कह चुकी हैं कि उनकी मां उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।

पेंटिंग और सिनेमा की शौकीन

कॉरपोरेट जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद प्रिया नायर को पेंटिंग (चित्रकारी) करना और कैनवास पर रंग बिखेरना बेहद पसंद है। इसके अलावा, वह बिजनेस और लीडरशिप की किताबें पढ़ने और सिनेमा की शौकीन हैं। उन्हें पॉडकास्ट सुनना, खासकर राज शमानी के पॉडकास्ट पसंद हैं। कला और सिनेमा से प्रिया नायर को इंसानी सोच और कहानियों को समझने में मदद मिलती है, जो मार्केटिंग में काम आती है। कूनूर में उनका पसंदीदा स्थान ‘कैफे कॉफी बीन’ है।

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